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ये क्या... महिला ने बना डाला अनोखा रिकॉर्ड, ज्वालामुखी पीक पर बिताए 32 दिन

  • Authored by: किशन गुप्ता
  • Updated Apr 24, 2023, 09:55 AM IST

मैक्सिको की रहने वाली 31 वर्षीय एथलीट पेरला तिजेरिना ने ज्वालामुखी 'पिको डी ओरीज़ाबा' की चोटी पर 32 दिन बिताकर एक अनोखा रिकॉर्ड बना दिया है। बता दें, इस दौरान यह पूरी ज्वालामुखी बर्फ से ढकी थी। ऐसे में उन्होंने अपना अनुभव अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है।

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मैक्सिकन एथलीट पेरला तिजेरिना (Image Credit : perlatijerina_/Instagram)

KEY HIGHLIGHTS
  • मैक्सिकन एथलीट ने बनाया अनोखा रिकॉर्ड
  • बर्फ से ढकी ज्वालामुखी के पीक पर रही 32 दिन
  • इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा किया अपना अनुभव

Mexican Athlete Perla Tijerina: दुनिया जितनी ही आश्चर्यों से भरी है, लोग उतने ही आश्चर्यचकित कर देने वाले रिकॉर्ड बनाते हैं। आमतौर पर देखा जाता है कि एथलीट कभी ऊंचे पहाड़ों को नाप देते हैं तो कभी बर्फीली चोटियों का फतह कर देते हैं। लेकिन अगर कहा जाए कि ज्वालामुखी की चोटी पर दिन गुजारने का अनोखा रिकॉर्ड दर्ज हुआ है तो यह हैरान कर देने वाली बात है। इससे भी हैरान कर देने वाली है कि महिला एथलीट ने इस चोटी पर 32 दिन तक गुजारे हैं।

जी हां, सुनने में यह मामला थोड़ा आश्चर्य कर देने वाला जरूर है लेकिन सच है। मैक्सिकन की एक महिला एथलीट, जिसका नाम पेरला तिजेरिना है, ने यह अनोखा रिकॉर्ड बनाया है। महिला 32 दिनों तक ज्वालामुखी की पीक पर रही। इस ज्वालामुखी का नाम 'पिको डी ओरीज़ाबा' है, जो अमेरिका में स्थित है और इन दिनों बर्फ से ढकी है और इसकी ऊंचाई 5636 मीटर है। महिला ने इसी बर्फ से ढकी चोटी पर अपना 32 दिन बिताया और बताया कि कैसे वह इतने दिनों तक यहां रही और किस तरह उसने टेंट में खाना बनाया, खाया और रोमांच का अनुभव लिया।

'मैजिकल' चैलेंज के तहत पेरला ने बनाया यह अनोखा रिकॉर्ड

31 साल की पेरला ने महिलाओं को सशक्त करने के लिए 'मैजिकल' नाम के चैलेंज के तहत यह अनोखा रिकॉर्ड अपने नाम किया। वे उन महिलाओं को प्रेरणा देना चाहता हैं, जो यह कहती हैं कि वह एक महिला हैं औक कुछ नहीं कर सकतीं। उसने अपना सारा अनुभव अपने इंस्टाग्राम अकाउंट 'perlatijerina_' पर शेयर किया है। साथ ही एथलीट ने बताया कि उसने 5000 मीटर की ऊंचाई पर चढ़ने के लिए प्रैक्टिस में एक सप्ताह का समय बिताया था। अब पेरला का सपना है कि वह दुनिया के 14 ऐसे ही पहाड़ों की चढ़ाई करना चाहती हैं और दिन बिताना चाहती हैं, वो भी बिना ऑक्सीजन के...।

किशन गुप्ता
किशन गुप्ताauthor

<p>देश की धार्मिक राजधानी काशी में जन्म लिया और घाटों पर खेल-कूदकर बड़ा हुआ। साल 2019 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री ली। यही से पत्रकारिता की शुरुआत भी हुई। इसी साल जुलाई में हैदराबाद स्थित रामोजी रॉव के स्वामित्व वाले ईटीवी भारत से करियर की शुरुआत हुई। बतौर ट्रेनी यहां एक साल से अधिक का समय बिताया। यह पहली दफा था, जब घर से दूर निकला था। लेकिन चस्का था तो काम करने, एक अच्छा पत्रकार बनने का। यहां रहकर चंद्रयान - 2 को कवर करने का मौका मिला। इसके बाद राजस्थान में शिक्षक भर्ती को लेकर उम्मीदवारों की ओर से हुए हिंसक विरोध को भी करीब से देखा। इस दौरान पथराव का भी सामना करना पड़ा। लेकिन काम करने का एक जुनून था। यह पहली दफा था, जब मैंने किसी बड़ी न्यूज को कवर किया था। इसके बाद ये सिलसिला चलता गया। कुछ समय ऐसा भी आया, जब होम पेज भी काम करने को मिला। करीब एक साल से अधिक समय बिताने के बाद ईटीवी भारत से अलविदा लिया और अपने गृह जिले में पहुंचा, जहां के एक लोकल चैनल टूडेज इंडिया न्यूज में काम करने का मौका मिला। यहां करीब डेढ़ साल से अधिक का समय बिता, जहां रहकर बनारस के साथ-साथ पूर्वांचल को भी कवर करने का मौका मिला। राजनीति और क्राइम की खबरों में खासा रूचि होने के कारण अक्सर फोकस भी इसी पर रहता था। इस दौरान कोविड के दंश को भी देखा। कोरोना काल का यह वो भयानक मंजर था, जिसकी किसी को आशंका न थी। इस दौरान खबरों के माध्यम से देश के दुख-दर्द को करीब से महसूस करने का मौका मिला। फिर मई 2022 में वनइंडिया ज्वाइन कर ली, यहां से फीचर राइटिंग की शुरुआत करते हुए मैंने ट्रैवेल पर काम करना शुरू किया। ऑफिस बैंगलोर था, तो वहां जाने के लिए काफी सोचना भी पड़ा लेकिन दिमाग में था कि बड़ा कुछ करना है तो देश की आर्थिक राजधानी के लिए निकल पड़ा। यहां काफी कम समय ही बिता, करीब 9 महीने तक काम करने के बाद यहां से अलविदा लिया। फिर समय आया देश के प्रतिष्ठित संस्थान टाइम्स नेटवर्क से जुड़ने का। मार्च 2023 में मैं Timesnowhindi.com के वायरल टीम से जुड़ा। इस बीच तमाम ट्रेंडिंग, वायरल और अजब-गजब जैसी कई खबरें की। बीट अलग होने के कारण थोड़ा चैलेंजिंग था लेकिन उस चैलेंज को पूरा करते हुए और चुनौतियों का सामना करते हुए आज एक साल से ऊपर का समय हो गया है।</p>

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