आपने लोगों के मुंह से ये हमेशा सुना होगा कि अगर पैसा है तो उससे जमीन खरीद लो, उससे ज्यादा मुनाफा कोई स्कीम और कोई बाजार नहीं दे पाएगा। ये बात कितनी सही है, वह आप सोशल मीडिया पर इस वायरल पोस्ट से समझ सकते हैं। हाल में ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्वप्निल कोम्मावर नाम के एक शख्स ने अपनी स्टोरी शेयर की है। स्वप्निल एक स्टॉक मार्केट ट्रेडर हैं और वे बताते हैं कि कैसे जमीन में इनवेस्ट करना फायदे का सौदा है। स्वप्निल ने बताया कि उनके चाचा ने कई साल पहले एक जमीन खरीदी थी। जिसकी कीमत उस वक्त बेहद ही कम थी मगर आज उस जमीन की कीमत करोड़ों में है।
60 हजार का निवेश, करोड़ों का फायदा
स्वप्निल के अनुसार, उनके चाचा ने साल 1990 में अपने शहर में चार एकड़ जमीन खरीदी थी। उस समय जमीन की कीमत करीब 15 हजार रुपये प्रति एकड़ थी। इस तरह कुल मिलाकर उन्होंने सिर्फ 60 हजार रुपये में चार एकड़ जमीन खरीद ली। समय के साथ उस इलाके का काफी विकास हुआ। छोटा सा कस्बा धीरे-धीरे एक जिले में बदल गया, जिससे जमीन की कीमत भी तेजी से बढ़ गई।
DMart ने खरीदी आधी जमीन
कई साल बाद देश की बड़ी रिटेल कंपनी DMart ने उस जमीन में से दो एकड़ जमीन करीब 25 करोड़ रुपये में खरीद ली। इस तरह सिर्फ 60 हजार रुपये का निवेश कई साल बाद करोड़ों में बदल गया। खास बात यह है कि जमीन का आधा हिस्सा अभी भी उनके पास है।
अब हर महीने हो रही लाखों की कमाई
जमीन बेचकर मिले 25 करोड़ रुपये को उनके चाचा ने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश कर दिया। इस FD से उन्हें हर महीने करीब 14.5 लाख रुपये ब्याज के रूप में मिलते हैं।
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया
स्वप्निल की स्टोरी देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लोगों ने उस पर तरह-तरह की प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने इसे सही निवेश का बेहतर उदाहरण बताया तो कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि हर जमीन की कीमत इतनी नहीं बढ़ती, यह काफी हद तक स्थान और किस्मत पर भी निर्भर करता है। एक यूजर ने तो यह भी कहा कि 1990 में तुम्हारे चाचा के पास अगर 60000 रुपए थे तो तुम लोग वैसे ही बहुत अमीर थे और उतना पैसा उस वक्त सबके पास नहीं होता था। दूसरे ने कहा कि 1990 में इतना पैसा अगर तुम किसी सही कंपनी में भी इनवेस्ट करते तो अब तक शायद इतने पैसे बन जाते, 90 में 60000 की कीमत आज के 6000000 लाख के बराबर थी।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। टाइम्स नाउ नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।
