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Knowledge News: हवाई जहाज की तरह नहीं उड़तीं हवा में, फिर भी चप्पलें क्यों कहलाती हैं 'हवाई चप्पल'

  • Authored by: आदित्य साहू
  • Updated Jun 12, 2023, 06:01 PM IST

Knowledge News: अमेरिका के हवाई आईंलैंड(Hawi Island) में टी नामक एक पेड़ पाया जाता है, जिससे रबर(Rubber) निकालता था। उसी का उपयोग करके अमेरिका(America) में पहली बार चप्पल(Slipper) बनाया गया। भारत में इन चप्पलों को लाने का क्रेडिट बाटा कंपनी (BATA) को जाता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर (ट्विटर)

KEY HIGHLIGHTS
  • बहुत ही रोचक है हवाई चप्पलों का इतिहास
  • द्वितीय विश्व युद्ध ने निभाई अहम भूमिका
  • दुनियाभर में ऐसे पहुंचा हवाई चप्पल

Knowledge News: आज के जमाने में पुरुष हो या महिला.. हर व्यक्ति फैशन(fashion) की दौड़ में अच्छा दिखने की होड़ में लगा हुआ है। हर कपड़े पर लोगों के अलग जूतें (shoes) और सैंडल (sandal) होते हैं। लेकिन आप कितने भी फैशनेबल जूतें या सैंडल पहन लें आपको असली आराम घर के हवाई चप्पलों में ही मिलता होगा। क्या आपने कभी सोचा है इन चप्पलों का नाम हवाई क्यों पड़ा होगा? चलिए जानते हैं बिना हवा में उड़े हुए ये चप्पलें हवाई क्यूं कहलाती हैं?

कैसे हुई शुरुआत?

पहले के लोग या तो नंगे पैर या तो पैरों में लकड़ी के खड़ाऊ पहनकर चलते थे। फिर औद्योगिक क्रांति हुई और युरोप में मशीनों का अविष्कार हुआ। मशीनों के अविष्कार के बाद चप्पलों का निर्माण शुरु हुआ।

कहां से आया नाम?

जापान (Japan) से कुछ मजदूरों को मजदूरी करने के लिए अमेरिका भेजा गया था। उन्होंने पैरों में रबर से बनी कोइ चीज़ पहनी थी, जिसे जोरी कहते थे। उसे ही देखकर अमेरिकियों ने भी चप्पल बनाने के बारे में सोचा। अमेरिका के हवाई आईंलैंड(Hawi Island) में टी नामक एक पेड़ पाया जाता है, जिससे रबर(Rubber) निकालता था। उसी का उपयोग करके अमेरिका(America) में पहली बार चप्पल(Slipper) बनाया गया। धीरे-धीरे इसका निर्यात आइलैंड के बाहर भी किया जाने लगा। चूंकि इसे हवाई आईलैंड से बनाकर भेजा जा रहा था इसलिए इसे हवाई चप्पल कहा जाने लगा।

भारत में कैसे आईं चप्पलें?

ऐसा कहते हैं कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों ने हवाई चप्पल पहनकर युद्ध लड़ा। उसके बाद जिस ब्राजिलियन शू कम्पनी ने पूरी दुनिया में इसको प्रसिद्ध किया उसका नाम ‘हवाईनाज़’(Havaianas) था। इसी कंपनी ने नीले फीते वाली उजली चप्पलें पहली बार बनाई। जो आज दुनिया के हर आम घरों में पाई जाती है। भारत में इन चप्पलों को लाने का क्रेडिट बाटा कंपनी (BATA) को जाता है। आज भी बाटा का नाम भारत के टॉप फुटवियर (Footwear) कंपनी में शामिल है।

आदित्य साहू
आदित्य साहूauthor

आदित्य साहू टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स और ट्रेडिंग कंटेंट लिखतें हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के बाद वह पिछले 10 सालों से मीडिया में सक्रिय हैं। स्पोर्ट्स इवेंट की रियल टाइम कवरेज, डाटा टॉपिक्स और अनोखे कंटेंट आइडियाज को आकर्षक और एंगेजिंग तरीके से प्रस्तुत करना आदित्य की खासियत है। उनकी कॉपी राइटिंग और इंटरेस्टिंग हेडलाइन बनाने की क्षमता उन्हें डिजिटल दुनिया में अलग पहचान देती है। 15,000 से अधिक बायलाइन स्टोरी पब्लिश कर चुके आदित्य का लक्ष्य हर खबर को यूनिक एंगल और स्टोरीटेलिंग के रोचक अंदाज में पेश करना है।

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