Knowledge News: आज के जमाने में पुरुष हो या महिला.. हर व्यक्ति फैशन(fashion) की दौड़ में अच्छा दिखने की होड़ में लगा हुआ है। हर कपड़े पर लोगों के अलग जूतें (shoes) और सैंडल (sandal) होते हैं। लेकिन आप कितने भी फैशनेबल जूतें या सैंडल पहन लें आपको असली आराम घर के हवाई चप्पलों में ही मिलता होगा। क्या आपने कभी सोचा है इन चप्पलों का नाम हवाई क्यों पड़ा होगा? चलिए जानते हैं बिना हवा में उड़े हुए ये चप्पलें हवाई क्यूं कहलाती हैं?
कैसे हुई शुरुआत?
पहले के लोग या तो नंगे पैर या तो पैरों में लकड़ी के खड़ाऊ पहनकर चलते थे। फिर औद्योगिक क्रांति हुई और युरोप में मशीनों का अविष्कार हुआ। मशीनों के अविष्कार के बाद चप्पलों का निर्माण शुरु हुआ।
कहां से आया नाम?
जापान (Japan) से कुछ मजदूरों को मजदूरी करने के लिए अमेरिका भेजा गया था। उन्होंने पैरों में रबर से बनी कोइ चीज़ पहनी थी, जिसे जोरी कहते थे। उसे ही देखकर अमेरिकियों ने भी चप्पल बनाने के बारे में सोचा। अमेरिका के हवाई आईंलैंड(Hawi Island) में टी नामक एक पेड़ पाया जाता है, जिससे रबर(Rubber) निकालता था। उसी का उपयोग करके अमेरिका(America) में पहली बार चप्पल(Slipper) बनाया गया। धीरे-धीरे इसका निर्यात आइलैंड के बाहर भी किया जाने लगा। चूंकि इसे हवाई आईलैंड से बनाकर भेजा जा रहा था इसलिए इसे हवाई चप्पल कहा जाने लगा।
भारत में कैसे आईं चप्पलें?
ऐसा कहते हैं कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों ने हवाई चप्पल पहनकर युद्ध लड़ा। उसके बाद जिस ब्राजिलियन शू कम्पनी ने पूरी दुनिया में इसको प्रसिद्ध किया उसका नाम ‘हवाईनाज़’(Havaianas) था। इसी कंपनी ने नीले फीते वाली उजली चप्पलें पहली बार बनाई। जो आज दुनिया के हर आम घरों में पाई जाती है। भारत में इन चप्पलों को लाने का क्रेडिट बाटा कंपनी (BATA) को जाता है। आज भी बाटा का नाम भारत के टॉप फुटवियर (Footwear) कंपनी में शामिल है।
