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अब ट्रेन में नहीं खत्म होगा पानी! रेलवे ने कोचों में शुरू की स्मार्ट IoT तकनीक, पानी कम होते ही मिलेगा अलर्ट

चलती ट्रेन में अक्सर पानी को लेकर दिक्कत होती है, खासतौर पर गर्मी के मौसम में, हालांकि ट्रेन से सफर करने वाले करोड़ों लोगों को जल्द ही इस समस्या से राहत मिलने वाली है।

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अब ट्रेन में नहीं खत्म होगा पानी! रेलवे ने कोचों में शुरू की स्मार्ट IoT तकनीक/Photo-AI

भारतीय रेलवे यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार नई तकनीकों को अपना रहा है। इसी दिशा में रेलवे ने ट्रेनों में पानी की कमी की समस्या का समाधान निकालने के लिए IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) आधारित स्मार्ट वाटर मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करना शुरू कर दिया है। इस तकनीक की मदद से ट्रेन के कोच में लगे पानी के टैंक का स्तर रियल टाइम में मॉनिटर किया जाएगा और पानी कम होने पर संबंधित कर्मचारियों को तुरंत अलर्ट भेजा जाएगा।

पानी खत्म होने की समस्या से मिलेगी राहत

अक्सर लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रा के दौरान कोच के वॉशरूम या वॉशबेसिन में पानी खत्म होने की शिकायतें सामने आती हैं। नई स्मार्ट तकनीक के जरिए अब इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। कोच में लगे सेंसर लगातार टैंक के जलस्तर की निगरानी करेंगे और निर्धारित सीमा से नीचे पानी पहुंचते ही कंट्रोल सिस्टम को सूचना भेज देंगे। इससे अगले स्टेशन या निर्धारित स्थान पर समय रहते पानी की व्यवस्था की जा सकेगी।

IoT सेंसर से होगी रियल टाइम निगरानी

रेलवे द्वारा अपनाई गई इस तकनीक में प्रत्येक कोच के पानी के टैंक पर IoT आधारित सेंसर लगाए जा रहे हैं। ये सेंसर वायरलेस नेटवर्क के माध्यम से पानी का स्तर रिकॉर्ड करते हैं। जैसे ही टैंक में पानी कम होता है, संबंधित अधिकारियों और मेंटेनेंस टीम के मोबाइल या कंट्रोल सिस्टम पर 'लो वॉटर अलर्ट' पहुंच जाता है। इससे कर्मचारियों को किसी यात्री की शिकायत का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

हजारों कोचों में लागू की जा रही योजना

जानकारी के अनुसार, रेलवे ने 56,994 कोचों को इस प्रणाली के लिए चिन्हित किया है। इनमें से 1,576 कोचों में IoT सेंसर पहले ही लगाए जा चुके हैं, जबकि 38,310 कोचों में सेंसर लगाने की योजना पर काम चल रहा है। इसके अलावा 55,418 कोचों में आगे चरणबद्ध तरीके से यह तकनीक लागू की जाएगी।

यात्रियों को मिलेगा बेहतर सफर का अनुभव

रेलवे का मानना है कि इस स्मार्ट सिस्टम के लागू होने से यात्रियों को यात्रा के दौरान पानी की कमी जैसी असुविधा का सामना कम करना पड़ेगा। साथ ही मेंटेनेंस टीम भी पहले से तैयार रह सकेगी, जिससे ट्रेनों में सेवा की गुणवत्ता बेहतर होगी और शिकायतों में कमी आएगी।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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