Minor Nominee Rules : माता-पिता अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अलग-अलग जगहों पर निवेश करते हैं। कोई लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेता है, तो कोई म्यूचुअल फंड, बैंक एफडी या ईपीएफ में पैसा जमा करता है। निवेश करते समय नॉमिनी बनाना भी बेहद जरूरी होता है, ताकि निवेशक की मौत होने पर रकम पाने की प्रक्रिया आसान हो सके। लेकिन अगर नॉमिनी कोई नाबालिग बच्चा है, तो पैसा सीधे उसके हाथ में नहीं दिया जाता। दरअसल, 18 साल से कम उम्र के बच्चे को नॉमिनी बनाया जा सकता है, लेकिन वह खुद उस रकम को संभाल या प्राप्त नहीं कर सकता। ऐसे मामले में बच्चे की ओर से रकम लेने और उसकी देखभाल करने के लिए अभिभावक या नियुक्त व्यक्ति की जरूरत होती है।
नाबालिग बच्चे को नॉमिनी बना सकते हैं
वित्तीय संपत्तियों में नाबालिग बच्चे को नॉमिनी बनाने पर सामान्य तौर पर कोई न्यूनतम उम्र की शर्त नहीं होती। यानी बच्चा एक साल, 5 साल या 15 साल का हो, उसे नॉमिनी बनाया जा सकता है। हालांकि, सिर्फ बच्चे का नाम नॉमिनी के तौर पर दर्ज करना पर्याप्त नहीं होता। नाबालिग होने की वजह से उसके लिए अभिभावक या नियुक्त व्यक्ति की जानकारी भी देनी पड़ती है। संबंधित वित्तीय संस्था अपने नियमों के अनुसार बच्चे और अभिभावक से जुड़े दस्तावेज मांग सकती है।
नाबालिग को पैसा सीधे क्यों नहीं मिलता?
अगर नॉमिनी की उम्र 18 साल से कम है, तो वह कानूनी रूप से रकम को खुद संभालने की स्थिति में नहीं होता। इसलिए बीमा की रकम, एफडी की राशि या अन्य वित्तीय संपत्ति से जुड़ी रकम की प्रक्रिया उसके अभिभावक के जरिए पूरी की जाती है। अभिभावक बच्चे की ओर से रकम प्राप्त कर सकता है और उसके वयस्क होने तक उसकी देखभाल करता है। उदाहरण के लिए, अगर आपने 10 साल के बच्चे को नॉमिनी बनाया है और आपकी मृत्यु हो जाती है, तो बच्चा तुरंत रकम अपने हिसाब से इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। 18 साल की उम्र तक उसके लिए नियुक्त अभिभावक की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
अभिभावक का चुनाव सोच-समझकर करें
नाबालिग नॉमिनी के मामले में अभिभावक की भूमिका काफी अहम होती है। अभिभावक बच्चे की ओर से मिलने वाली रकम से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया पूरी करता है और उसे संभालने की जिम्मेदारी निभाता है। इसलिए नॉमिनी फॉर्म भरते समय अभिभावक का नाम और अन्य जरूरी जानकारी सही तरीके से देना चाहिए। कई मामलों में अभिभावक का केवाईसी, बच्चे के साथ रिश्ते का प्रमाण और अन्य दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। हालांकि, दस्तावेज और प्रक्रिया वित्तीय उत्पाद तथा संस्था के नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
लाइफ इंश्योरेंस में क्या है नियम?
लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी में भी नाबालिग बच्चे को नॉमिनी बनाया जा सकता है। अगर पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाती है और नॉमिनी बच्चा नाबालिग है, तो बच्चे की ओर से बीमा की रकम प्राप्त करने के लिए नियुक्त व्यक्ति या अभिभावक की जरूरत पड़ती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे के नाबालिग होने के दौरान बीमा की रकम की प्रक्रिया उसके हित में पूरी हो सके और रकम की देखभाल की जा सके।
म्यूचुअल फंड में भी नाबालिग को नॉमिनी बना सकते हैं
म्यूचुअल फंड निवेश में भी नाबालिग बच्चे को नॉमिनी बनाने की सुविधा है। ऐसे मामले में बच्चे के नाबालिग होने के कारण उसके अभिभावक की जानकारी देना जरूरी हो सकता है। नॉमिनी बनने का मतलब यह नहीं है कि बच्चे को तुरंत म्यूचुअल फंड की यूनिट या उससे जुड़ी रकम अपने नियंत्रण में मिल जाती है। नाबालिग होने के दौरान जरूरी प्रक्रिया उसके अभिभावक के जरिए पूरी की जाती है।
FD और दूसरी वित्तीय संपत्तियों में भी ध्यान रखें
बैंक एफडी जैसी वित्तीय संपत्तियों में भी नाबालिग को नॉमिनी बनाया जा सकता है। लेकिन यहां भी नाबालिग की उम्र को ध्यान में रखना जरूरी है। अगर नॉमिनी 18 साल से कम उम्र का है, तो रकम से जुड़ी प्रक्रिया बैंक के नियमों के अनुसार अभिभावक या नियुक्त व्यक्ति के माध्यम से पूरी हो सकती है। इसी तरह ईपीएफ और दूसरी वित्तीय संपत्तियों में नाबालिग नॉमिनी के लिए संबंधित संस्था के नियम लागू होते हैं।
नॉमिनी बनना और मालिक बनना अलग-अलग है
यह बात समझना सबसे जरूरी है कि नॉमिनी का नाम दर्ज होने से वह व्यक्ति हर स्थिति में संपत्ति का अंतिम मालिक नहीं बन जाता। नॉमिनी की भूमिका मुख्य रूप से निवेशक की मृत्यु के बाद रकम या संपत्ति प्राप्त करने और प्रक्रिया को आसान बनाने से जुड़ी होती है। अंतिम रूप से संपत्ति पर अधिकार किसका होगा, यह वसीयत और लागू उत्तराधिकार कानूनों पर निर्भर कर सकता है। इसलिए केवल नॉमिनी दर्ज कर देने से उत्तराधिकार से जुड़ी हर समस्या खत्म नहीं हो जाती।
18 साल की उम्र पूरी होने के बाद क्या होगा?
जब नॉमिनी बच्चा 18 साल की उम्र पूरी कर लेता है, तो वह वयस्क हो जाता है। इसके बाद संबंधित वित्तीय संस्था के नियमों के अनुसार रकम या संपत्ति को उसके नियंत्रण में देने की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। इस तरह नाबालिग नॉमिनी के मामले में अभिभावक की भूमिका मुख्य रूप से उस समय तक रहती है, जब तक बच्चा नाबालिग है। इसलिए निवेश करते समय नॉमिनी के साथ-साथ उसके अभिभावक की जानकारी भी सही तरीके से दर्ज करना जरूरी है। बच्चे को नॉमिनी बनाना उसके भविष्य की वित्तीय सुरक्षा के लिहाज से अच्छा कदम हो सकता है। लेकिन नॉमिनी फॉर्म भरते समय बच्चे की उम्र, अभिभावक की जानकारी और संबंधित वित्तीय संस्था के नियमों को जरूर ध्यान में रखना चाहिए।
