गणेश चतुर्थी भजन (Ganesh Chaturthi Bhajan): गणेश चतुर्थी का पावन पर्व आ चुका है। शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को भगवान श्री गणेश का प्राकट्य हुआ था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन अवसर पर गणपति बप्पा अपने भक्तों के बीच आते हैं और अनंत चतुर्दशी तक उनके घरों में निवास करते हैं। दस दिनों तक चलने वाली इस पावन अवधि को गणेशोत्सव या गणेश महोत्सव के रूप में पूरे देश में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इन दस दिनों में भगवान गणेश की विशेष कृपा पाने के लिए उनका भव्य श्रृंगार और विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है।
भक्तों का विश्वास है कि विघ्नहर्ता गणेश जी को मोदक और लड्डू अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए वो उन्हें प्रसन्न करने के लिए रोजाना विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट मोदक, बेसन और मोतीचूर के लड्डुओं का भोग लगाते हैं। बप्पा का यह सानिध्य भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लेकर आता है। गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी भक्त इस पूरे 10 दिन भक्त गणेश वंदना, आरती और भजन करते हैं। यहां देखें भगवान गणेश के कुछ बेहद लोकप्रिय भजन। इन भजनों की मधुर धुन और सरल शब्द लोगों को कुछ देर के लिए रोजमर्रा की चिंताओं से दूर ले जाते हैं और मन में विश्वास, उम्मीद और सकारात्मकता भर देते हैं:
गणेश जी के भजन (Ganesh Ji ke Bhajan Lyrics)
1. सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची
सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची,
नुरवी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची,
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची,
कंठी झळके माळ मुक्ताफळाची।
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती,
दर्शनमात्रे मन कामना पुरती,
जय देव जय देव।
रत्नखचित फरा तूज गौरीकुमरा,
चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा,
हिरे जडित मुकुट शोभतो बरा,
रुणझुणती नुपुरे चरणी घागरिया।
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती,
दर्शनमात्रे मन कामना पुरती,
जय देव जय देव।
लंबोदर पीतांबर फणी वरवंदना,
सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना,
दास रामाचा वाट पाहे सदना,
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवंदना।
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती,
दर्शनमात्रे मन कामना पुरती,
जय देव जय देव।
शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुख को,
दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरीहर को,
हाथ लिए गुड़-लड्डू सांई सुरवर को,
महिमा कहे न जाए लागत हूँ पद को।
जय जय जी गणराज विद्या सुखदाता,
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता,
जय देव जय देव।
अष्टौ सिद्धि दासी संकट को बैरी,
विघ्नविनाशन मंगल मूरत अधिकारी,
कोटि सूरज प्रकाश ऐसी छबि तेरी,
गंडस्थल मदमस्तक झूले शशि गहरी।
जय जय जी गणराज विद्या सुखदाता,
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता,
जय देव जय देव।
भावभगत से कोई शरणागत आवे,
संतत संपत सबही भरपूर पावे,
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे,
गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे।
जय जय जी गणराज विद्या सुखदाता,
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता,
जय देव जय देव।
सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची,
नुरवी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची,
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची,
कंठी झळके माळ मुक्ताफळाची।
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती,
दर्शनमात्रे मन कामना पुरती,
जय देव जय देव।
2. घर में पधारो गजानंद जी मेरे घर में पधारो
घर में पधारो गजानंद जी,
मेरे घर में पधारो,
ऋद्धि-सिद्धि लेके आओ गणराजा,
मेरे घर में पधारो।
राम जी आना, लक्ष्मण जी आना,
संग में लाना सीता मैया,
मेरे घर में पधारो।
ब्रह्मा जी आना, विष्णु जी आना,
भोले शंकर को ले आना,
मेरे घर में पधारो।
लक्ष्मी जी आना, गौरी जी आना,
सरस्वती मैया को ले आना,
मेरे घर में पधारो।
विघ्न को हरना, मंगल करना,
कारज शुभ कर जाना,
मेरे घर में पधारो।
घर में पधारो गजानंद जी,
मेरे घर में पधारो,
ऋद्धि-सिद्धि लेके आओ गणराजा,
मेरे घर में पधारो।
3. गजानन कर दो बेड़ा पार
गजानन कर दो बेड़ा पार,
आज हम तुम्हें मनाते हैं,
तुम्हें मनाते हैं,
गजानन तुम्हें मनाते हैं।
सबसे पहले तुम्हें मनावें,
सभा बीच में तुम्हें बुलावें,
सभा बीच में तुम्हें बुलावें।
गजानन कर दो बेड़ा पार।
आओ पार्वती के लाला,
मूषक वाहन, सूंड सुंदाला,
मूषक वाहन, सूंड सुंदाला।
गजानन कर दो बेड़ा पार।
भक्त जनों ने टेर लगाई,
सबने मिलकर महिमा गाई,
सबने मिलकर महिमा गाई।
गजानन कर दो बेड़ा पार।
उमापति शंकर के प्यारे,
तू भक्तों के काज सवारे,
तू भक्तों के काज सवारे।
गजानन कर दो बेड़ा पार।
लड्डू-पेड़ा भोग लगावें,
पान-सुपारी, पुष्प चढ़ावें,
पान-सुपारी, पुष्प चढ़ावें।
गजानन कर दो बेड़ा पार।
गजानन कर दो बेड़ा पार,
आज हम तुम्हें मनाते हैं,
तुम्हें मनाते हैं,
गजानन तुम्हें मनाते हैं।
4. पहले ध्यान श्री गणेश का, मोदक भोग लगाओ
पहले ध्यान श्री गणेश का,
मोदक भोग लगाओ।
भक्ति मन से कर लो भक्तो,
गणपति के गुण गाओ।
पहले ध्यान श्री गणेश का।
द्वार-द्वार, घर-आँगन सब पर,
शुभ प्रभु की है प्रतिमा।
देवों में जो देव पूज्य है,
गणपति की है गरिमा।
मंगल अति सुमंगल है जो,
मंगल अति सुमंगल है जो,
उनको नयन बसाओ।
पहले ध्यान श्री गणेश का।
आरती, स्तुति, भजन, प्रार्थना,
शंख-नाद भी गूँजे।
मंगल जल दर्शन से गणपति,
तन-मन सबका भीगे।
सब भक्तों का मंगल कर दो,
सब भक्तों का मंगल कर दो,
मन सबका हर्षाओ।
पहले ध्यान श्री गणेश का।
सब त्यौहार उन्हीं से शुभ हैं,
गणपति का त्योहारा।
मूषक वाहन श्री गणेश का,
ऐसा देव हमारा।
कीर्तन-भजन नारायण करते,
कीर्तन-भजन नारायण करते,
उत्सव आज मनाओ।
पहले ध्यान श्री गणेश का।
पहले ध्यान श्री गणेश का,
मोदक भोग लगाओ।
भक्ति मन से कर लो भक्तो,
गणपति के गुण गाओ।
5. संकट हर लो, मंगल कर दो
संकट हर लो, मंगल कर दो,
प्यारे शिव-गौरा के लाल,
अब विनती सुन लो गणपति देवा।
हे गणनायक देव गजानन,
मूषक चढ़कर आओ,
हाथ जोड़कर द्वार खड़े हैं,
अब ना देर लगाओ।
गजानन जल्दी से तुम आओ,
आकर के अपने भक्तों का
तुम जान लो दिल का हाल,
अब विनती सुन लो गणपति देवा।
तुमको ना बतलाएँ तो हम,
अपनी किसे बताएं,
तुम ही बता दो सिद्धिविनायक,
किसके द्वार पे जाएं।
बताओ किसको अपनी सुनाएं,
दुःख के बादल ने घेरा हमें,
संकट का फैला जाल,
अब विनती सुन लो गणपति देवा।
संकटहर्ता संकट काटो,
चारों तरफ तेरा राज,
कर दो अब खुशियों की वर्षा,
हे गणपति महाराज।
हमारे पूर्ण कर दो काज,
सबके पूरे तुम काम करो,
जग में है तेरी मिसाल,
अब विनती सुन लो गणपति देवा।
टूट रही है आस की डोरी,
डोल रहा विश्वास,
अब तो हमें तुम अपनी दया का
दे दो प्रभु प्रसाद।
कहीं अब टूट ना जाए आस,
जैसे भी हो अब तो तुमको,
देवा करना है कमाल,
अब विनती सुन लो गणपति देवा।
संकट हर लो, मंगल कर दो,
प्यारे शिव-गौरा के लाल,
अब विनती सुन लो गणपति देवा।
