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Digital ID: 6.1 करोड़ से ज्यादा किसानों के पास भूमि रिकॉर्ड की डिजिटल आईडी, आधार कार्ड की तरह करता है काम

Kisan Pehchaan Patra: 'डिजिटल कृषि मिशन' को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट कमेटी ने 2024 में 2,817 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ मंजूरी दी थी। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 1,940 करोड़ रुपए थी। इस मिशन का उद्देश्य 11 करोड़ किसानों के लिए डिजिटल आईडी जनरेट करना है।

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Kisan Pehchaan Patra

Digital ID: देश में 14 राज्यों के 6.1 करोड़ से अधिक किसानों की डिजिटल आईडी बन गई है। यह जानकारी ताजा सरकारी डेटा में दी गई है। डिजिटल आईडी एक तरह से आधार कार्ड की तरह ही होती है, जिसमें किसानों के भूमि रिकॉर्ड के साथ-साथ अन्य जानकारियां होती हैं।

डिजिटल कृषि मिशन के हिस्से एग्री स्टैक के तहत किसानों को दी गई इन डिजिटल आईडी को राज्य सरकारों या केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के द्वारा व्यवस्थित किया जाता है। डिजिटल आईडी को किसानों से जुड़े विभिन्न डेटा से जोड़ा जाता है, जिसमें भूमि और पशुधन का रिकॉर्ड, बोई गई फसलें और प्राप्त लाभ शामिल हैं। इससे ऋण, फसल बीमा और पीएम किसान भुगतान में भी तेजी लाने में मदद मिलती है।

उत्तर प्रदेश सबसे आगे

उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 1.3 करोड़ किसानों की डिजिटल आईडी जनरेट हुई हैं। वहीं, महाराष्ट्र में 99 लाख, मध्य प्रदेश में 83 लाख, आंध्र प्रदेश में 45 लाख, गुजरात में 44 लाख और राजस्थान में 75 लाख डिजिटल आई़डी जारी हुई हैं। डेटा के मुताबिक, तमिलनाडु, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना और मध्य प्रदेश ने भी डिजिटल आईडी उपलब्ध कराने में काफी प्रगति की है।

11 करोड़ किसानों की डिजिटल आईडी बनाना लक्ष्य

'डिजिटल कृषि मिशन' को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट कमेटी ने 2024 में 2,817 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ मंजूरी दी थी। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 1,940 करोड़ रुपए थी। इस मिशन का उद्देश्य 11 करोड़ किसानों के लिए डिजिटल आईडी जनरेट करना है।

इसमें दो वर्षों के भीतर देश भर में डिजिटल फसल सर्वेक्षण शुरू करने की भी योजना बनाई गई है, जिसमें वित्त वर्ष 2024-25 में 400 जिले और वित्त वर्ष 2025-26 में सभी जिले शामिल होंगे। एग्री स्टैक प्लेटफॉर्म किसानों के जनसांख्यिकीय विवरण, भूमि जोत और बोई गई फसलों पर व्यापक और उपयोगी डेटा प्रदान करता है, जिससे किसान क्रेडिट, बीमा, खरीद आदि जैसे लाभ किसानों को आसानी से उपलब्ध कराए जा सके।

इनपुट-आईएएनएस

Vishal Maithil
Vishal Mathelauthor

विशाल मैथिल टाइम्स नाऊ नवभारत में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर 2023 से जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता में 6+ वर्षों के अनुभव के साथ वह टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया, गैजेट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर गहरी समझ रखते हैं। वे ऑटोमोबाइल, बिजनेस, यूटिलिटी और हाइपरलोकल से लेकर एजुकेशन और इंटरनेशनल बीट्स पर भी काम कर चुके हैं। भोपाल से ताल्लुक रखने वाले विशाल ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मीडिया रिसर्च में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। रिसर्च के क्षेत्र में उनके कई पेपर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर, अमर उजाला, मासिक पत्रिका "संदेश" और सोशल मीडिया फर्म में भी काम किया है। टेक-यूटिलिटी और बिजनेस से जुड़ी खबरों को आसान और काम की भाषा में समझाना विशाल को खूब आता है। वो कोशिश करते हैं कि कम शब्दों में ज्यादा और साफ-सुथरी जानकारी मिल जाए। किताबें पढ़ना और संगीत सुनना उनका पसंदीदा काम है। आप इनसे Vishal.mathel@timesgroup.com पर संपर्क कर सकते हैं।

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