CRS Mark on Mobile Phones: टेक्नोलॉजी और डिजिटल वर्ल्ड के इस दौर में बच्चों से लेकर जवान तक और जवान से लेकर बुजुर्ग तक, सभी सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं। इसके अलावा, बीते कुछ समय से गेम्स की दुनिया में भी काफी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। गेम्स का वर्चस्व तो इसी बात से समझा जा सकता है कि मार्केट में अब गेम्स डेडिकेटेड मोबाइल फोन्स और कंप्यूटर्स बड़े लेवल पर खरीदे जा रहे हैं। हालांकि, भारत में कंप्यूटर की तुलना में मोबाइल फोन की बिक्री कई गुना ज्यादा है।
लापरवाही की तो धोखा खा सकते हैं आप
ऑनलाइन शॉपिंग के जमाने में आजकल ज्यादातर लोग ई-कॉमर्स वेबसाइट से ही मोबाइल फोन ऑर्डर कर देते हैं। हालांकि, दुकानों से भी काफी मोबाइल फोन खरीदे जाते हैं। आपने ऐसे तो कई मामले देखे और सुने होंगे जिनमें ई-कॉमर्स कंपनियां ग्राहक को हजारों रुपये के मोबाइल फोन के बजाय डिब्बे में साबुन पैक करके डिलीवर कर देते हैं। लेकिन, मोबाइल फोन की जगह साबुन आना ही धोखा नहीं है। अगर आप मोबाइल फोन के डिब्बे में मोबाइल फोन ही मिलता है तो ऐसी स्थिति में भी आप धोखा खा सकते हैं।
मोबाइल फोन के डिब्बे पर होना चाहिए CRS मार्क
दरअसल, भारत सरकार ने उपभोक्ताओं के हित को ध्यान में रखते हुए कई मानक तैयार किए हैं। इसी के तहत देश में बिजनेस करने वाली सभी मोबाइल फोन कंपनियों के लिए भी कुछ नियम बनाए गए हैं, जिन्हें सख्ती से फॉलो किया जाता है। भारत में मोबाइल फोन बेचने वाली सभी मोबाइल फोन कंपनियां हैंडसेट के डिब्बे पर CRS मार्क लगाती हैं। ये CRS मार्क इस बात का प्रतीक है कि आपने जो प्रोडक्ट खरीदा है, वह मानकों के हिसाब से तैयार बिल्कुल असली प्रोडक्ट है।
बॉक्स पर CRS मार्क नहीं है तो क्या होगा
अगर किसी मोबाइल फोन पर CRS मार्क नहीं है तो इसका सीधा मतलब ये हुआ कि वो मोबाइल फोन मानकों के हिसाब ने नहीं बना है। इतना ही नहीं, बिना सीआरएस मार्क वाला मोबाइल फोन नकली भी हो सकता है। इसलिए अब आप जब कभी भी नया मोबाइल फोन खरीदें तो उसके बॉक्स पर CRS का मार्क जरूर देख लें। इस बात का खास ध्यान रखें कि बॉक्स पर CRS मार्क ठीक तरह से बना हो, गलत तरीके से बने सीआरएस मार्क वाले मोबाइल फोन को बिल्कुल न खरीदें, वर्ना आपके साथ धोखा होना तय है।
