सरकार ने इन नेशनल एक्सप्रेसवे पर टोल रेट में कटौती की, नई दरें 15 फरवरी 2026 से लागू
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Feb 13, 2026, 10:08 AM IST
National Expressway toll Tax: सरकार ने आंशिक रूप से चालू राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पर टोल फीस कम करने के लिए नेशनल हाईवे फीस नियमों में संशोधन किया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बताया कि अब अधूरे एक्सप्रेसवे के तैयार हिस्से पर कम दर से टोल वसूला जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, संशोधित नियम 15 फरवरी 2025 से पूरे देश में लागू हो जाएंगे।
सरकार ने आंशिक रूप से चालू राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पर टोल दरों में कटौती की (तस्वीर-istock)
National Expressway toll Tax : सरकार ने राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब यदि कोई एक्सप्रेसवे पूरी तरह तैयार और चालू नहीं है, तो उसके अधूरे हिस्से के लिए लोगों से पूरा टोल नहीं लिया जाएगा। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस संबंध में राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण और वसूली) नियम, 2008 में संशोधन की अधिसूचना जारी की है। ये नए नियम 15 फरवरी से लागू होंगे।
आंशिक रूप से चालू एक्सप्रेसवे पर राहत
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक मंत्रालय के अनुसार, पहले ऐसी स्थिति में भी एक्सप्रेसवे का पूरा टोल वसूला जाता था, जब वह शुरू से अंत तक पूरी तरह चालू नहीं होता था। यानी यदि किसी एक्सप्रेसवे का कुछ हिस्सा ही तैयार था और बाकी पर काम चल रहा था, तब भी वाहन चालकों से पूरी लंबाई के हिसाब से शुल्क लिया जाता था। इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था। अब नए नियमों के तहत यदि कोई राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पूरी तरह से तैयार नहीं है, तो केवल उसके चालू और तैयार हिस्से पर ही टोल लिया जाएगा। साथ ही, यह टोल सामान्य राष्ट्रीय राजमार्ग के बराबर दर से वसूला जाएगा, न कि एक्सप्रेसवे की ऊंची दर से।
पहले क्यों लिया जाता था ज्यादा टोल
सरकार के मुताबिक, राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पर टोल शुल्क सामान्य राष्ट्रीय राजमार्ग की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक होता है। इसकी वजह यह है कि एक्सप्रेसवे तेज और बिना रुकावट के सफर का अनुभव देते हैं। इन सड़कों पर बेहतर ढांचा, कम ट्रैफिक बाधाएं और उच्च गुणवत्ता की सुविधाएं होती हैं, जिससे यात्रा समय कम लगता है। लेकिन जब एक्सप्रेसवे पूरी तरह से तैयार नहीं होता और कहीं-कहीं निर्माण कार्य जारी रहता है, तब वह पूरी तरह निर्बाध यात्रा का अनुभव नहीं दे पाता। ऐसे में भी लोगों से 25 प्रतिशत अधिक शुल्क वसूला जाना कई बार आलोचना का कारण बनता था।
क्या बदलेगा नए नियम से
नए प्रावधान के अनुसार, यदि कोई एक्सप्रेसवे शुरू से अंत तक पूरी तरह चालू नहीं है, तो उसके केवल तैयार हिस्से पर ही टोल लिया जाएगा। वह भी सामान्य राष्ट्रीय राजमार्ग की दर के अनुसार। इसका मतलब है कि अब वाहन चालकों को अधूरी सुविधा के लिए पूरा और अधिक शुल्क नहीं देना पड़ेगा। यह बदलाव उन लाखों लोगों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है, जो रोजाना या नियमित रूप से एक्सप्रेसवे का उपयोग करते हैं। इससे उनकी यात्रा लागत कम होगी और उन्हें अधिक पारदर्शिता का अनुभव मिलेगा।
15 फरवरी से लागू होंगे नियम
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण और वसूली) नियम, 2008 में किया गया यह संशोधन 15 फरवरी से प्रभावी होगा। यानी इस तारीख के बाद जिन एक्सप्रेसवे का काम पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है, वहां नई दरें लागू होंगी। सरकार का कहना है कि यह कदम लोगों के हित में उठाया गया है ताकि वे केवल उतनी ही सुविधा के लिए भुगतान करें, जितनी उन्हें वास्तव में मिल रही है।
आम यात्रियों को क्या होगा फायदा
इस फैसले से खासतौर पर निजी वाहन चालकों, ट्रक ऑपरेटरों और बस सेवाओं को फायदा होगा। टोल दर कम होने से परिवहन लागत घटेगी, जिसका असर माल ढुलाई और यात्री किराए पर भी पड़ सकता है। कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम टोल वसूली प्रणाली को अधिक न्यायसंगत और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब अधूरे एक्सप्रेसवे पर लोगों को अतिरिक्त बोझ नहीं उठाना पड़ेगा और उन्हें उनकी यात्रा के बदले उचित शुल्क ही देना होगा।
