FD vs PPF: भारत में फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) निवेश के लिए सबसे लोकप्रिय इंस्ट्रूमेंट हैं। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश की सुविधा बैंक और वित्तीय संस्थान प्रदान करते हैं। एफडी में निवेश पर रेगुलर सेविंग अकाउंट की तुलना में अधिक ब्याज में मिलता है। फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा अवधि के अनुसार, ब्याज दर तय की जाती है। इसमें निवेश की अवधि कुछ महीने से लेकर कई साल तक होती है। मैच्योरिटी पर मूल राशि के साथ ब्याज का भुगतान किया जाता है। FD में ब्याज आमतौर पर सालाना या तिमाही आधार पर तय की जाती है।
पब्लिक प्रोविडेंट फंड
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) एक लॉन्ग टर्म सेविंग स्कीम है। इसे सरकार चलाती है। इस स्कीम को रिटायरमेंट प्लानिंग के हिसाब से डिजाइन किया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस स्कीम में निवेश की रकम इसलिए सुरक्षित मानी जाती है, क्योंकि निवेश की गारंटी सरकार लेती है। यह एक लॉन्ग टर्म निवेश वाली स्कीम है। पीपीएफ में निवेश करने वाले कुछ गलतियां कर देते हैं, जिसकी वजह से उन्हें वित्तीय रूप से नुकसान झेलना पड़ जाता है।
FD vs PPF
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) खाते की मैच्योरिटी या लॉक-इन पीरियज 15 वर्ष है। इसके बाद आप दो बार 5-5 साल के लिए निवेश की अवधि को बढ़ा सकते हैं। इस स्कीम में सात साल बाद आंशिक निकासी की अनुमति है। हालांकि, फिक्स्ड डिपॉजिट की मैच्योरिटी की अवधि 7 दिनों से लेकर 10 वर्षों तक हो सकती है। कुछ बैंक फ्लेक्सिबल विकल्प प्रदान करते हैं जो दंड के साथ जल्दी निकासी की अनुमति देते हैं। कम जोखिम और अलग-अलग रिटर्न के साथ एफडी और पीएफ दोनों ही टैक्स बेनिफिट की लिस्ट में शामिल हैं। फिक्स्ड डिपॉजिट आम तौर पर बचत खातों की तुलना में अधिक निश्चित रिटर्न प्रदान करते हैं।
फिक्स्ड डिपॉजिट उन लोगों के लिए बेहतर साबित हो सकती है, जो निश्चित रिटर्न के साथ स्थिर, शॉर्ट से मिड अवधि के निवेश ऑप्शन की तलाश में हैं, जबकि पीपीएफ टैक्स सेविंग और चक्रवृद्धि वृद्धि के अतिरिक्त लाभ के साथ लॉन्ग टर्म रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए मुफीद साबित हो सकती है।
