अमावस्या के दिन तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाकर प्रणाम किया जा सकता है। तुलसी माता की पूजा करने की मनाही नहीं है। हालांकि इस दिन तुलसी की पत्तियां तोड़ना वर्जित माना जाता है। पूजा के लिए पहले से तोड़े गए तुलसी दल इस्तेमाल कर सकते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार अमावस्या के दिन तुलसी दल नहीं तोड़ना चाहिए। भगवान विष्णु या उनके किसी स्वरूप को तुलसी अर्पित करनी हो तो एक दिन पहले ही पत्तियां तोड़कर साफ स्थान पर रख लें।
शाम होने के बाद तुलसी की पत्तियां तोड़ना या पौधे को अनावश्यक रूप से छूना उचित नहीं माना जाता। संध्या के समय तुलसी के पास घी या तिल के तेल का दीपक जलाकर परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना कर सकते हैं।
तुलसी के पत्ते हमेशा स्नान करने और स्वच्छ वस्त्र पहनने के बाद ही तोड़ने चाहिए। मान्यता है कि पत्तियां तोड़ने से पहले तुलसी माता को प्रणाम करना चाहिए। नाखून से पत्ता तोड़ने के बजाय उंगलियों का धीरे से प्रयोग करें।
यदि तुलसी का पौधा सूख गया है तो उसे सामान्य कूड़े में न डालें। सूखे पौधे को साफ मिट्टी में दबाया जा सकता है या किसी पवित्र जलधारा में प्रवाहित किया जा सकता है। पुराने गमले में नया तुलसी का पौधा भी लगाया जा सकता है।
अमावस्या के दिन घर की सफाई के साथ तुलसी के आसपास का स्थान भी साफ करें। यहां जूते-चप्पल, झाड़ू या कूड़ादान न रखें। तुलसी के पास स्वच्छता और शांत वातावरण बनाए रखना शुभ माना जाता है।
अमावस्या पर पितरों के लिए दीपदान करने की परंपरा है। तुलसी के पास भगवान विष्णु और तुलसी माता के निमित्त दीपक जलाएं। पितरों के नाम का दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर या दक्षिण दिशा में रखने की परंपरा है। परिवार की परंपरा अलग हो तो उसी का पालन करें।