Cybercrime: केंद्रीय गृह मंत्रालय की साइबर क्राइम यूनिट ने लोगों को फ्रॉड को लेकर अलर्ट किया। साइबर क्राइम यूनिट ने कहा कि सरकारी कार्यालयों से ईमेल पर प्राप्त होने वाले संदिग्ध ई-नोटिस से सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि साइबर अपराधी लोगों को इसके जरिए अपनी जाल में फंसाकर उन्हें ठगने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों से सावधानी बरतने का आग्रह करते हुए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने एक विज्ञापन में कहा कि सभी को ई-नोटिस में नामित अधिकारी की पहचान वेरिफाई करने के लिए हमेशा इंटरनेट की जांच करनी चाहिए और संबंधित विभाग को फोन करना चाहिए।
नोटिस की आड़ फ्रॉड की कोशिश
साइबर क्राइम यूनिट ने लोगों को ऐसे समय में अलर्ट किया है, जब सरकार के ई-नोटिस की आड़ में 'फर्जी ईमेल' भेजे जाने के कई मामले सामने आ रहे हैं। विज्ञापन में साइबर अपराध यूनिट ने चेतावनी दी कि इस तरह के ई-नोटिस एक फ्रॉड हो सकते हैं, जो लोगों को साइबर धोखाधड़ी का शिकार बना सकते हैं। ऐसे ई-मेल का जवाब देने से पहले जांच करें कि ई-मेल किसी वेरिफाई सरकारी वेबसाइट से आया है या नहीं, जिसका अंत "gov.in" से होता है।
ऐसे करें फर्जी ईमेल की पहचान
इस महीने की शुरुआत में, केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने धोखाधड़ी वाले ईमेल के बारे में चेतावनी जारी की थी। एडवाइजरी के अनुसार, इन ईमेल में दिल्ली पुलिस साइबर अपराध और आर्थिक अपराध, केंद्रीय आर्थिक खुफिया ब्यूरो (CEIB), खुफिया ब्यूरो और दिल्ली के साइबर सेल जैसी प्रमुख संस्थाओं के नाम, हस्ताक्षर, मुहर और लोगो गलत तरीके से लगे होते हैं।
इसमें कहा गया है कि ऐसे किसी भी ईमेल के प्राप्तकर्ता को इस धोखाधड़ी के प्रयास के बारे में पता होना चाहिए। जनता को सूचित किया जाता है कि अटैचमेंट के साथ ऐसे किसी भी ईमेल का जवाब नहीं दिया जाना चाहिए और ऐसे मामलों की सूचना निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर पुलिस स्टेशन को दी जानी चाहिए।
इस तरह के फर्जी नोटिफिकेशन
गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए पिछले साल अगस्त में इसी तरह की एडवाइजरी जारी की थी। इस एडवाइजरी में यूजर्स को सीईओ के नाम से भेजे जाने वाले नकली ईमेल के बारे में चेतावनी दी गई थी, जिसमें 'तत्काल नोटिफिकेशन' और अदालत नोटिफिकेशन जैसे विषय शीर्षक थे। समाचार एजेंसी पीटीआई ने अपनी रिपोर्ट में आई4सी के हवाले से कहा कि ये भ्रामक ईमेल विभिन्न सरकारी कार्यालयों और व्यक्तियों को लक्ष्य करके भेजे जाते हैं और उन पर साइबर अपराधों का झूठा आरोप लगाते हुए उनसे जवाब देने का आग्रह किया जाता है।
