कुछ दिन पहले ही दिल्ली का एक वीडियो हुआ था जिसने एक बार फिर ऐप-बेस्ड कैब में AC को लेकर यात्रियों और ड्राइवरों के अधिकार पर बहस छेड़ दी। वीडियो में एक कैब ड्राइवर यात्री को AC चालू करने से मना कर देता है, सिर्फ इसलिए क्योंकि यात्री ने स्वेटर और कैप पहन रखी थी। ड्राइवर का तर्क था कि जब यात्री “गर्म कपड़ों” में है, तो उसे ठंडक की जरूरत ही नहीं है।
यहां तक कि उसने यात्री को कपड़े उतारने की सलाह तक दे डाली। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर जोरदार बहस शुरू हो गई, क्या AC चलाना ड्राइवर की मर्जी है या फिर यात्री का हक? आइए, इस पूरे मुद्दे को आसान सवाल-जवाब और नियमों के जरिए समझते हैं।
क्या ड्राइवर को कानूनी रूप से AC चलाना जरूरी है?
भारतीय कानून के तहत फिलहाल ऐसा कोई स्पष्ट नियम नहीं है जो ऐप-बेस्ड कैब ड्राइवर को यात्री के कहने पर AC चालू करने के लिए मजबूर करे। मोटर व्हीकल एक्ट में AC को अनिवार्य सेवा के तौर पर परिभाषित नहीं किया गया है, हालांकि यहां जिम्मेदारी कानून से नहीं बल्कि कैब ऐप की पॉलिसी से आती है। जब कोई यात्री AC-श्रेणी वाली कैब बुक करता है, तो किराए में पहले से ही ईंधन और AC का खर्च शामिल होता है। ऐसे में ड्राइवर पर कॉन्ट्रैक्ट के तहत AC देने की जिम्मेदारी बनती है, बशर्ते AC खराब न हो।
Uber, Ola जैसी कंपनियां AC को लेकर क्या कहती हैं?
Uber और Ola दोनों ही अपनी सामान्य कैटेगरी की राइड्स- जैसे Uber Go, Premier, Ola Mini और Prime—को AC-इनेबल्ड मानती हैं। Uber ने साफ कहा है कि अगर यात्री ने AC कैटेगरी की राइड बुक की है, तो ड्राइवर को AC चालू रखना चाहिए। Ola का कहना है कि ड्राइवरों को डिफॉल्ट रूप से AC चलाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जब तक कि यात्री खुद मना न करे। दोनों प्लेटफॉर्म यात्रियों को AC न मिलने की शिकायत ऐप के जरिए दर्ज करने की सुविधा देते हैं। बार-बार शिकायत मिलने पर ड्राइवर को चेतावनी, रेटिंग में गिरावट या सस्पेंशन तक झेलना पड़ सकता है।
क्या यात्री ड्राइवर की AC से मना करने की शिकायत कर सकता है?
हां, यात्री बिल्कुल शिकायत कर सकता है। Uber और Ola दोनों में इन-ऐप सपोर्ट सिस्टम मौजूद है। यात्री राइड के दौरान या खत्म होने के बाद “Help” या “Support” सेक्शन में जाकर “AC नहीं दिया गया” जैसी कैटेगरी चुन सकता है। यह शिकायत सीधे कंपनी तक जाती है, न कि किसी सरकारी विभाग के पास। जांच के बाद ड्राइवर को चेतावनी, रेटिंग कटौती या अकाउंट पर कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा, यात्री सोशल मीडिया या कस्टमर केयर ईमेल के जरिए भी मामला उठा सकता है।
ड्राइवर AC चलाने से क्यों कतराते हैं?
- AC को लेकर ड्राइवरों की भी अपनी परेशानियां हैं।
- AC चलाने से माइलेज कम होता है और ईंधन या CNG का खर्च बढ़ जाता है।
- कंपनियों की कमीशन कटौती के बाद ड्राइवरों की कमाई पहले से ही सीमित होती है।
- ट्रैफिक में AC ज्यादा ईंधन खपत करता है, जिससे छोटी दूरी की राइड घाटे का सौदा बन जाती है।
- कई बार कार का AC कमजोर या खराब होता है, जिसकी मरम्मत महंगी पड़ती है।
भारत में यह समस्या कितनी आम है?
- ऐप-कैब में AC न मिलने की शिकायत सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं है।
- दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में यह समस्या बार-बार सामने आई है।
- 2025 में हैदराबाद में ड्राइवरों ने कम किराए और बढ़ते ईंधन खर्च के विरोध में “नो-AC आंदोलन” तक चला दिया था।
- कोलकाता में कंपनियों ने माना कि AC से जुड़ी शिकायतें काफी ज्यादा थीं, हालांकि बाद में सुधार के दावे किए गए।
- एक राष्ट्रीय सर्वे के मुताबिक, 2025 में करीब 59% ऐप-कैब यूजर्स ने किसी न किसी तरह की खराब सेवा का अनुभव किया।
टकराव से बचने के लिए यात्री और ड्राइवर क्या करें?
- इस तरह के विवाद से बचने के लिए दोनों पक्षों को व्यावहारिक रवैया अपनाना होगा।
- यात्री शुरुआत में ही अपनी AC की पसंद साफ तौर पर बता दें और जरूरत पड़ने पर शांति से ऐप के जरिए शिकायत करें।
- ड्राइवरों को AC की स्थिति के बारे में ईमानदारी से बताना चाहिए और बिना ठोस कारण AC से इनकार नहीं करना चाहिए।
- राइड की शुरुआत में साफ बातचीत अक्सर गलतफहमियों को खत्म कर देता है और सफर को आसान बना देता है।
