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हीरा खरीदने से पहले जान लें सरकार का नया नियम, अब सिर्फ इसे ही माना जाएगा असली Diamond

नेचुरल डायमंड काउंसिल (NDC) के मुताबिक, भारतीय रत्न और ज्वेलरी उद्योग में लंबे समय से प्राकृतिक हीरों और उनके विकल्पों को लेकर शब्दों का गलत इस्तेमाल होता रहा है। इसी वजह से ग्राहक अक्सर यह समझ नहीं पाते थे कि वे असल में क्या खरीद रहे हैं। BIS द्वारा अपनाया गया नया मानक IS 19469:2025, इसी समस्या का समाधान है। यह अंतरराष्ट्रीय मानक ISO 18323:2015 का अपडेटेड रूप है, जिसका उद्देश्य डायमंड इंडस्ट्री में उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करना है।

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Diamond New Rules/Photo-AI

अगर आपको गहने खरीदते समय हीरे को लेकर भ्रम में रहते हैं तो आपके लिए राहत की खबर है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने हीरों से जुड़ी शब्दावली को लेकर एक नया नियम लागू किया है, जिसका मकसद उपभोक्ताओं को गुमराह होने से बचाना और ज्वेलरी बाजार में पारदर्शिता बढ़ाना है। यह कदम खास तौर पर ऑनलाइन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर फैले भ्रम को दूर करने के लिए उठाया गया है।

नेचुरल डायमंड काउंसिल का फैसला

नेचुरल डायमंड काउंसिल (NDC) के मुताबिक, भारतीय रत्न और ज्वेलरी उद्योग में लंबे समय से प्राकृतिक हीरों और उनके विकल्पों को लेकर शब्दों का गलत इस्तेमाल होता रहा है। इसी वजह से ग्राहक अक्सर यह समझ नहीं पाते थे कि वे असल में क्या खरीद रहे हैं। BIS द्वारा अपनाया गया नया मानक IS 19469:2025, इसी समस्या का समाधान है। यह अंतरराष्ट्रीय मानक ISO 18323:2015 का अपडेटेड रूप है, जिसका उद्देश्य डायमंड इंडस्ट्री में उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करना है।

उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा?

नए मानक के तहत ‘डायमंड’ शब्द का इस्तेमाल बिना किसी अतिरिक्त विशेषण के केवल प्राकृतिक हीरे के लिए किया जा सकेगा। विक्रेता इसके लिए ‘नेचुरल’, ‘रियल’, ‘जेन्युइन’ या ‘प्रेशियस’ जैसे शब्दों का उपयोग कर सकते हैं। वहीं, लैब में बनाए गए हीरों के लिए पूरी पारदर्शिता अनिवार्य कर दी गई है।

लिखना होगा लैब में बनाया गया हीरा

ऐसे उत्पादों को सिर्फ ‘Laboratory-grown diamond’ या ‘Laboratory-created diamond’ कहना होगा। ‘LGD’, ‘लैब-ग्रोन’ या ‘लैब-डायमंड’ जैसे संक्षिप्त या अनौपचारिक शब्दों का इस्तेमाल अब मान्य नहीं होगा। इसके अलावा, उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले शब्दों पर भी रोक लगाई गई है। लैब-निर्मित हीरों के लिए ‘नेचर’, ‘प्योर’, ‘अर्थ-फ्रेंडली’ या ‘कल्चर्ड’ जैसे शब्दों का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। केवल ब्रांड नाम लिख देना भी पर्याप्त नहीं माना जाएगा, जब तक उसके साथ स्पष्ट रूप से ‘लैबोरेटरी-ग्रोन’ न लिखा हो।

इंडस्ट्री ने किया स्वागत

NDC की मैनेजिंग डायरेक्टर ऋचा सिंह ने कहा कि यह मानक उपभोक्ताओं के लिए लंबे समय से जरूरी स्पष्टता लेकर आया है। उनके मुताबिक, “जब कोई व्यक्ति हीरा खरीदता है, तो उसे साफ, ईमानदार और बिना भ्रम के यह पता होना चाहिए कि वह क्या ले रहा है।”

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेय author

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिय... और देखें

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