मानसून के दौरान खराब मौसम की वजह से देशभर में कई उड़ानें प्रभावित होती हैं। कई बार यात्रियों को घंटों एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ता है, तो कभी फ्लाइट रद्द होने की स्थिति बन जाती है। ऐसे में अधिकांश यात्रियों को यह जानकारी नहीं होती कि ऐसे हालात में उनके क्या अधिकार हैं और एयरलाइंस को क्या सुविधाएं देना अनिवार्य है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, फ्लाइट कैंसिल या लंबी देरी होने पर यात्रियों को कई महत्वपूर्ण अधिकार मिलते हैं।
फ्लाइट रद्द होने पर एयरलाइन को पहले से देनी होगी जानकारी
यदि किसी उड़ान को रद्द किया जाता है, तो एयरलाइन की जिम्मेदारी है कि वह यात्रियों को कम से कम दो सप्ताह पहले इसकी सूचना दे। इससे यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बदलने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। अगर एयरलाइन निर्धारित समय से 24 घंटे से भी कम समय पहले फ्लाइट रद्द होने की जानकारी देती है, तो यात्रियों को अतिरिक्त अधिकार मिलते हैं।
कैंसिल फ्लाइट पर मिलेंगे ये विकल्प
ऐसी स्थिति में यात्री अपनी सुविधा के अनुसार पूरा टिकट रिफंड लेने का विकल्प चुन सकते हैं। यदि वे यात्रा जारी रखना चाहते हैं, तो एयरलाइन को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के वैकल्पिक उड़ान उपलब्ध करानी होगी। इसके अलावा, नियमों के अनुसार जहां लागू हो, वहां मुआवजा भी दिया जा सकता है।
एयरलाइन को भोजन और होटल की भी करनी होगी व्यवस्था
यदि फ्लाइट रद्द होने की वजह से यात्रियों को एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ता है, तो एयरलाइन को भोजन और रिफ्रेशमेंट उपलब्ध कराने होंगे। वहीं, यदि स्थिति ऐसी बनती है कि रातभर रुकना पड़े, तो यात्रियों के लिए होटल में ठहरने की व्यवस्था भी एयरलाइन की जिम्मेदारी होगी।
बारिश के कारण फ्लाइट लेट होने पर क्या मिलेगा?
मानसून के दौरान खराब मौसम के कारण फ्लाइट में देरी होना आम बात है। ऐसे मामलों में भी यात्रियों के लिए कुछ सुविधाएं तय की गई हैं। यदि फ्लाइट 2 घंटे या उससे अधिक देर से उड़ान भरती है, तो एयरलाइन को यात्रियों को फ्री रिफ्रेशमेंट और भोजन उपलब्ध कराना होगा।
6 घंटे से ज्यादा देरी होने पर बढ़ जाते हैं अधिकार
अगर फ्लाइट 6 घंटे या उससे अधिक लेट होती है, तो यात्रियों को मुफ्त भोजन के साथ यात्रा को री-शेड्यूल कराने या पूरा रिफंड लेने का विकल्प भी दिया जाना चाहिए।
रातभर की देरी पर होटल और ट्रांसपोर्ट की सुविधा
यदि फ्लाइट की देरी इतनी अधिक हो जाए कि यात्रियों को रातभर रुकना पड़े, तो एयरलाइन को होटल में ठहराने के साथ-साथ एयरपोर्ट से होटल और होटल से एयरपोर्ट तक आने-जाने की व्यवस्था भी करनी होगी।
देरी की गणना कैसे होती है?
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, फ्लाइट में देरी की अवधि मूल निर्धारित प्रस्थान समय के आधार पर गिनी जाती है। यानी एयरलाइन बाद में नया समय घोषित कर दे, तब भी यात्रियों के अधिकार मूल उड़ान समय के अनुसार ही तय होंगे।
