छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि सिर्फ आधार कार्ड (Aadhaar Card) के आधार पर किसी व्यक्ति की उम्र तय नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी की जिम्मेदारी केवल इसलिए शुरू नहीं हो जाती कि उसे प्रीमियम की राशि मिल गई है। बीमा पॉलिसी पर दर्ज तारीख और समय से ही बीमा अनुबंध प्रभावी माना जाएगा।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला 19 अप्रैल 2019 की रात हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा है। एक टाटा सूमो ने मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई, जबकि तीसरा व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल व्यक्ति का एक पैर घुटने के ऊपर से काटना पड़ा। मृतकों के परिजनों और घायल ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) में मुआवजे की मांग की थी। ट्रिब्यूनल ने मुआवजा तो मंजूर किया, लेकिन बीमा कंपनी को जिम्मेदार नहीं माना। अदालत ने वाहन चालक और मालिक को ही मुआवजा देने का आदेश दिया।
प्रीमियम जमा होने के बावजूद बीमा कंपनी क्यों नहीं हुई जिम्मेदार?
वाहन मालिक का तर्क था कि दुर्घटना वाले दिन शाम 4 बजे बीमा प्रीमियम एजेंट के जरिए जमा करा दिया गया था और शाम 4:35 बजे तक राशि बीमा कंपनी के खाते में पहुंच गई थी। इसलिए दुर्घटना होने के समय बीमा कंपनी की जिम्मेदारी बनती है।
हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि केवल प्रीमियम जमा होने से बीमा कवरेज शुरू नहीं हो जाता। बीमा अनुबंध उसी तारीख और समय से प्रभावी होता है, जो पॉलिसी में दर्ज होता है। इस मामले में बीमा पॉलिसी 20 अप्रैल 2019 को रात 12:01 बजे से लागू हुई थी, जबकि हादसा उससे करीब दो घंटे पहले हो चुका था। अदालत ने यह भी माना कि जिस व्यक्ति ने प्रीमियम जमा कराया था, वह बीमा कंपनी का अधिकृत एजेंट नहीं था। इसलिए उसके कार्यों के लिए बीमा कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
आधार कार्ड से उम्र तय करने पर हाईकोर्ट की टिप्पणी
घायल व्यक्ति के मुआवजे की गणना करते समय ट्रिब्यूनल ने उसकी उम्र आधार कार्ड के अनुसार 68 वर्ष मान ली थी। जबकि दावा याचिका, मेडिकल रिकॉर्ड और दिव्यांगता प्रमाणपत्र में उसकी उम्र 58 से 60 वर्ष के बीच बताई गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल आधार कार्ड के आधार पर उम्र तय करना सही नहीं है। अदालत ने उपलब्ध अन्य दस्तावेजों को अधिक विश्वसनीय मानते हुए उसकी उम्र 61 से 65 वर्ष के बीच मानी।
मुआवजे की राशि में भी किया बड़ा इजाफा
हाईकोर्ट ने घायल व्यक्ति की दिव्यांगता 35 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत मानी। अदालत ने कहा कि वह बढ़ई का काम करता था, जिसमें शारीरिक क्षमता और कौशल की जरूरत होती है। पैर कट जाने से उसकी आजीविका पर गंभीर असर पड़ा है। इसके बाद अदालत ने तीनों मामलों में मुआवजे की राशि बढ़ा दी।
घायल रंजीत भुंजिया का मुआवजा 96,400 रुपये से बढ़ाकर 3,90,800 रुपये किया गया। बिसनाथ भुंजिया की मृत्यु पर मुआवजा 2,18,200 रुपये से बढ़ाकर 4,26,400 रुपये कर दिया गया। पंचराम भुंजिया की मृत्यु पर मुआवजा 10,73,900 रुपये से बढ़ाकर 21,57,800 रुपये कर दिया गया। इसके साथ ही अदालत ने 9 फरवरी 2022 से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया।
