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8th Pay Commission: कैसे 18,000 रुपये से बढ़कर ₹54,000 हो जाएगी न्यूनतम सैलरी? समझें फिटमेंट फैक्टर का गणित

8वें वेतन आयोग लागू करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। हालांकि, अभी तक फिटमेंट फैक्टर को लेकर सरकार की ओर से कोई घोषणा नहीं की गई है। इसी आधार पर सैलरी में बढ़ोतरी होगी।

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8वां वेतन आयोग

8th Pay Commission: देशभर में केंद्र सरकार के अधिन काम करने वालीे सरकारी कर्मचारी 8वें वेतन आयोग लागू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके लागू होने से कर्मचारियों की सैलरी और रिटायर हो चुके लोगों के पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। हालांकि, बहुत कुछ तय होने वाले फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगा। बता दें कि 'फिटमेंट फैक्टर' एक ऐसी संख्या है जिसका इस्तेमाल नई बेसिक पे की गणना करने के लिए किया जाता है। फिटमेंट फैक्टर जितना ज्यादा होगा, सैलरी में उतनी ही ज्यादा बढ़ोतरी होगी। आइए समझते हैं कि कैसे फिटमेंट फैक्टर से सैलरी बढ़ोतरी तय होगी।

क्या है फिटमेंट फैक्टर?

आसान भाषा में समझें तो बेसिक सैलरी X फिटमेंट फैक्टर = नई सैलरी

इसको उदाहरण से समझते हैं— अभी, सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉई को 7th Pay Commission के तहत मिनिमम बेसिक पे 18,000 रुपये मिलती है।

अगर बेसिक सैलरी 18000 रुपये है और 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को 3 तय किया जाता है तो नई बढ़ोतरी होगी: 3X18000 रुपये = 54,000 रुपये

अगर सरकार 2.1 का फिटमेंट फैक्टर अपनाती है, तो बेसिक पे बढ़कर ₹37,800 हो सकती है। 2.5 के फिटमेंट फैक्टर के साथ, बेसिक पे ₹45,000 तक बढ़ सकती है।

उदाहरण के लिए, लेवल 10 के कर्मचारी, जिनकी अभी बेसिक पे ₹56,100 है, उनकी बेसिक पे 2.1 का फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर लगभग ₹1.18 लाख तक बढ़ सकती है। अगर सरकार 2.5 का फिटमेंट फैक्टर चुनती है, तो बेसिक पे लगभग ₹1.4 लाख तक बढ़ सकती है। 3.0 के फिटमेंट फैक्टर के तहत, बदली हुई बेसिक पे ₹1.68 लाख तक जा सकती है।

7वें वेतन आयोग के तहत, सरकार ने इसे 2.57 तय किया था। इससे जनवरी 2016 से केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 6ठे वेतन आयोग के तहत ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गई थी।

कर्मचारी संगठनों की क्या है मांग?

नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), जो केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करती है, ने 3.83 के फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। अगर सरकार यह मांग मान लेती है, तो न्यूनतम बेसिक पे मौजूदा ₹18,000 से बढ़कर लगभग ₹69,000 हो सकती है। बता दें कि फिटमेंट फैक्टर सिर्फ बेसिक सैलरी ही नहीं बढ़ाता है। यह कई अन्य पेमेंट और रिटायरमेंट फायदों पर भी असर डालता है जो बेसिक पे से जुड़े होते हैं। इनमें हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA), पेंशन, ग्रेच्युटी और रिटायरमेंट के अन्य फायदे शामिल हैं। अगर बेसिक पे बढ़ती है, तो इन फायदों को भी उसी हिसाब से बदला जाता है।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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