Kota Rajasthan Traffic Model: क्या आपने कभी सोचा है कि कोई ऐसा शहर भी हो सकता है, जहां गाड़ी चलाते वक्त बार-बार रेड लाइट पर रुकना ही न पड़े? सुनने में थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन राजस्थान का कोटा ऐसा देश का पहला शहर बन गया है। इसे भारत का पहला ट्रैफिक सिग्नल-मुक्त शहर कहा जाता है। चंबल नदी के किनारे बसा कोटा वैसे तो देशभर में कोचिंग हब के तौर पर पहचान रखता है। हर साल हजारों नहीं, बल्कि लाखों छात्र यहां आईआईटी-जेईई और नीट जैसी परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं। इतनी भीड़ के बावजूद यहां ट्रैफिक का हाल दिल्ली या मुंबई जैसा नहीं है। आज हम आपको कोटा के ट्रैफिक सिस्टम के बारे में बताएंगे।
आखिर कैसे चलता है कोटा का ट्रैफिक?
कोटा में आपको आम शहरों की तरह हर थोड़ी दूरी पर रेड-ग्रीन लाइट नहीं दिखेंगी। यहां पूरे शहर में ज्यादातर जगहों पर गोल चक्कर (राउंड अबाउट), फ्लाईओवर और चौड़ी सड़कें बनाई गई हैं। इससे गाड़ियां रुक-रुक कर नहीं, बल्कि धीरे-धीरे लेकिन लगातार चलती रहती हैं।
इसके अलावा पीक आवर्स में जहां जरूरत होती है वहां ट्रैफिक पुलिस खड़ी रहती है और ट्रैफिक को कंट्रोल करती है। लेकिन खास बात यह है कि बिना पुलिस के भी कोटा शहर के लोग काफी हद तक नियमों का पालन करते हुए आराम से सड़क पर वाहन चलाते हैं।
सड़कों की प्लानिंग से हुआ गेम चेंज
कोटा की सड़कें सोच-समझकर डिजाइन की गई हैं। कई जगह फ्लाईओवर बनाए गए हैं ताकि ट्रैफिक सीधे निकल जाए और चौराहों पर भीड़ न लगे। गोल चक्कर का इस्तेमाल ज्यादा किया गया है, जिससे गाड़ियां बिना पूरी तरह रुके दिशा बदल सकें। यहां के ड्राइवर भी गोल चक्कर पर गाड़ी चलाने के आदी हैं। इसके अलावा शहर में हॉर्न कम बजाते हैं और रैश ड्राइविंग कम देखने को मिलती है। ये कुछ मुख्य वजह है कि इस शहर का ट्रैफिक स्मूथ रहता है।
कोटा का ट्रैफिक सिस्टम यह सिखाता है कि अगर शहर की प्लानिंग ठीक तरह से की गई हो, सड़कें चौड़ी हों और लोग नियम मानें, तो बिना ज्यादा सिग्नल के भी ट्रैफिक को संभाला जा सकता है। हालांकि इस ट्रैफिक मॉडल को देश के हर शहर में पूरी तरह लागू भले संभव न हो, लेकिन इससे इतना जरूर समझ आता है कि स्मार्ट प्लानिंग और जिम्मेदार ड्राइविंग मिलकर ट्रैफिक की बड़ी समस्या को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
