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ये नहीं देखा तो क्या देखा, झारखंड में छिपा है अनोखा मंदिर, बेहद कम लोगों को होगी जानकारी

Terracotta Temples Of Maluti: मलूटी झारखंड के दुमका जिले में स्थित एक छोटा सा गांव है। यह गांव अपने अद्वितीय टेराकोटा मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है, जो स्वदेशी मंदिर वास्तुकला और शिल्प कौशल का एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है। इन मंदिरों में आपको जरूर घूमने का प्लान करना चाहिए।

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Terracotta Temples

Terracotta Temples Of Maluti: विविधता से भरे देश भारत में खूबसूरत जगहों की भरमार है। भारत में कुछ ऐसी भी जगहें मौजूद हैं जिनके बारे में बेहद कम लोग जानते हैं। इन गैर-प्रसिद्ध स्थानों में से एक झारखंड में मलूटी के टेराकोटा मंदिर है। ये अविश्वसनीय मंदिर वास्तव में एक उल्लेखनीय सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल है लेकिन बहुत से लोग इसके बारे में नहीं जानते हैं। इन मंदिर के बारे में जानकर आप भी फटाफट से इस जगह घूमने का प्लान कर सकते हैं। ये जगह अपने आप में आपको एकदम अलग और अनूठा अनुभव प्रदान करेंगी।

टेराकोटा कला: मलूटी के मंदिर की खास बात ये है कि यह जटिल टेराकोटा कला से सुशोभित हैं। टेराकोटा एक प्रकार का मिट्टी आधारित बर्तन होता है जिसका उपयोग सदियों से विभिन्न संस्कृतियों में सजावटी और वास्तुशिल्प उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है।

वास्तुकला: इन मंदिरों की वास्तुकला भी अनूठी है। हैंमलुटी में मंदिर मुख्य रूप से पंचायतन शैली के हैं, जिसका अर्थ है कि उनमें एक केंद्रीय मंदिर है जो छोटे सहायक मंदिरों से घिरा हुआ है। मंदिर वास्तुकला की यह शैली भारत के कई हिस्सों में आम है।

17वीं शताब्दी के हैं मंदिर: माना जाता है कि मलूटी टेराकोटा मंदिर 17वीं शताब्दी के हैं। मलूटी मंदिरों को जो चीज़ अलग बनाती है, वह है उनकी स्वदेशी शैली और टेराकोटा का व्यापक उपयोग है। हिंदू पौराणिक कथाओं, स्थानीय किंवदंतियों और दैनिक जीवन के दृश्यों का भी ये मंदिर अनोखा मिश्रण पेश करते हैं।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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