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प्रधानमंत्री ने की बॉर्डर पर बसे गांवों को देखने की अपील, जानें ऐसे 10 गांव जो देख सकते हैं आप

Border Villages of India: प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं से सीमावर्ती गांवों को देखने की अपील की है। जानिए माणा, चितकुल, तुरतुक और हनले समेत भारत के 10 खूबसूरत बॉर्डर विलेज।

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क्या आप करेंगे देश के फर्स्ट विलेज की सैर

Border Villages of India: सीमा का नाम सुनते ही हमारे मन में चौकियां, कंटीले तार और सैनिकों की तस्वीर उभरती है। मगर भारत की सरहदों के पास एक दूसरी दुनिया भी सांस लेती है। कहीं खुबानी से लदे बाग हैं, कहीं देवदार के जंगल और कहीं आसमान इतना साफ है कि रात में तारे छत के बिल्कुल करीब दिखाई देते हैं। इन गांवों की जिंदगी कठिन जरूर है, लेकिन प्रकृति ने इन्हें दिल खोलकर खूबसूरती दी है। यहां कुदरत का नूर दिखता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ‘विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026’ के प्रतिभागियों से बातचीत के दौरान युवाओं से सीमावर्ती गांवों को देखने और समझने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश के युवा जितना इन गांवों को जानेंगे, उतनी गहराई से भारत से जुड़ सकेंगे। यदि आप भी भीड़ वाले हिल स्टेशनों से आगे निकलना चाहते हैं, तो ये 10 सीमावर्ती गांव आपकी ट्रैवल लिस्ट में होने चाहिए।

भारत के वो गांव जिनको कहा गया फर्स्ट विलेज ऑफ इंडिया

1. माणा, उत्तराखंड

बद्रीनाथ से करीब तीन किलोमीटर दूर बसा माणा अब ‘फर्स्ट विलेज ऑफ इंडिया’ के रूप में जाना जाता है। पत्थर की गलियां, हिमालय की बर्फीली चोटियां और सरस्वती नदी की तेज आवाज यहां एक अलग ही संसार रचती हैं। गांव में व्यास गुफा, गणेश गुफा और विशाल चट्टानों से बना भीम पुल देखा जा सकता है। छोटे-छोटे घरों के बाहर ऊनी वस्त्र और स्थानीय जड़ी-बूटियां बेचती महिलाएं इस यात्रा में पहाड़ी संस्कृति का रंग भर देती हैं। माणा घूमने के लिए बद्रीनाथ यात्रा का समय सबसे सुविधाजनक रहता है।

2. नीति, उत्तराखंड

चमोली जिले की नीति घाटी में बसा नीति गांव भारत-तिब्बत सीमा के बेहद करीब है। यहां पहुंचते ही आसपास खड़े विशाल, रूखे और बर्फ से ढके पहाड़ अपनी ओर ध्यान खींचते हैं। पत्थर और लकड़ी के पुराने घर गांव को ऐसा रूप देते हैं, मानो समय यहां कुछ देर के लिए ठहर गया हो। यह भोटिया समुदाय का पारंपरिक निवास रहा है और सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण अधिकांश परिवार निचले क्षेत्रों में चले जाते हैं। यहां की यात्रा से पहले सड़क और अनुमति संबंधी जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

3. मलारी, उत्तराखंड

धौली गंगा के किनारे बसा मलारी उत्तराखंड के उन गांवों में है, जिनका जिक्र सामान्य पर्यटन नक्शों में कम दिखाई देता है। दूर से दिखते स्लेटी पहाड़, हरी ढलानें और पारंपरिक मकान इसे बेहद सादगी भरी सुंदरता देते हैं। गांव के पुराने घरों की बनावट स्थानीय मौसम और जीवनशैली की कहानी सुनाती है। मलारी में पर्यटन की चकाचौंध नहीं, बल्कि पहाड़ी जीवन की असली तस्वीर मिलती है। जोशीमठ से आगे बढ़कर यहां पहुंचा जा सकता है, लेकिन यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन के निर्देश जांचना जरूरी है।

4. चितकुल, हिमाचल प्रदेश

बास्पा नदी के किनारे बसा चितकुल किन्नौर की सांगला घाटी का सबसे चमकदार नगीना है। बर्फ से ढके पहाड़, लकड़ी के सुंदर घर और खेतों के बीच बहती ठंडी हवा गांव को किसी चित्र जैसा बना देती है। इसे पुराने हिंदुस्तान-तिब्बत व्यापार मार्ग का अंतिम आबाद गांव कहा जाता है। यहां का माथी देवी मंदिर स्थानीय आस्था और किन्नौरी वास्तुकला का खूबसूरत उदाहरण है। सुबह नदी किनारे सैर और शाम को पहाड़ों पर उतरती सुनहरी धूप - आपको अपने मोहपाश में बांध लेगी।

5. नाको, हिमाचल प्रदेश

किन्नौर की ऊंची और शांत पहाड़ियों में बसा नाको गांव अपने नीले पानी वाली छोटी-सी झील के लिए प्रसिद्ध है। मिट्टी और पत्थर से बने घर, संकरी गलियां और प्राचीन बौद्ध मठ इसे अनोखा हिमालयी रूप देते हैं। आसपास के भूरे पहाड़ों के बीच नाको झील किसी चमकते आईने जैसी दिखाई देती है। यहां की सुबह बेहद शांत और रात तारों से भरी होती है। कुछ दिन सुकून वाले चाहते हैं तो आपके लिए नाको बेहतरीन पड़ाव हो सकता है।

6. तुरतुक, लद्दाख

श्योक नदी की घाटी में बसा तुरतुक को लद्दाख के ठंडे रेगिस्तान का हरे-भरे वंडर कह सकते हैं। पत्थर की दीवारों से घिरी गलियों के बीच खुबानी और अखरोट के पेड़ गांव को अलग ही लुक देते हैं। यहां लद्दाखी बौद्ध संस्कृति से अलग बाल्टी संस्कृति, भाषा और खानपान देखने को मिलता है। लकड़ी के छोटे पुल, पानी की यहां वहां से निकलतीं धाराएं और बर्फीले पहाड़ मिलकर इसे बेहद फोटोजेनिक बनाते हैं। हालांकि नियंत्रण रेखा के करीब होने के कारण यहां आने वाले पर्यटकों को निर्धारित सीमा और स्थानीय निर्देशों का पालन करना होता है।

7. हनले, लद्दाख

करीब 14 हजार फीट की ऊंचाई पर बसा हनले अपनी जमीन से अधिक अपने आसमान के लिए आकर्षित करता है। प्रदूषण और कृत्रिम रोशनी बेहद कम होने के कारण यहां रात में आकाश तारों से भर उठता है। गांव में प्राचीन हनले मठ और भारतीय खगोलीय वेधशाला प्रमुख आकर्षण हैं। अगर आप यहां जा रहे हैं तो ऊंचाई के कारण यहां जाने से पहले शरीर कोमौसम के अनुकूल होने देने का समय जरूर दें।

8. काहो, अरुणाचल प्रदेश

लोहित नदी के किनारे बसा काहो देश के सुदूर पूर्वी सीमावर्ती गांवों में शामिल है। सुबह की पहली रोशनी जब हरे पहाड़ों और नदी पर गिरती है, तो पूरा इलाका सुनहरे रंग में रंगा होता है। कम आबादी वाला यह गांव शहरी शोर से बहुत दूर शांत और आत्मीय अनुभव के लिए परफेक्ट है। यहां के लोग, उनका सादा जीवन और प्रकृति से उनका गहरा रिश्ता - इस यात्रा को खास बनाते हैं। हां यह ध्यान रखें कि अरुणाचल प्रदेश जाने के लिए जरूरी इनर लाइन परमिट पहले से बनवाना होता है।

9. जेमिथांग, अरुणाचल प्रदेश

तवांग जिले का जेमिथांग भूटान और चीन की सीमाओं के पास बसी हरी-भरी घाटी है। घने जंगल, साफ बहती नदी और धुंध में लिपटे पहाड़ - इसे एक अलग ही रहस्यमय सुंदरता देते हैं। यहां स्थित गोर्सम कोरा स्तूप बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है। वसंत में घाटी के रंग और सर्दियों में बर्फ से ढके दृश्य इसका मिजाज पूरी तरह बदल देते हैं। तवांग से आगे बढ़कर शांत और कम देखे गए अरुणाचल को समझना हो, तो जेमिथांग शानदार विकल्प है।

10. दावर, गुरेज घाटी

जम्मू-कश्मीर की गुरेज घाटी में किशनगंगा नदी के किनारे बसा दावर ऊंचे पहाड़ों से घिरा सुंदर सीमावर्ती ठिकाना है। लकड़ी के घर, हरे मैदान और नदी का दूधिया पानी इसे किसी पुरानी कश्मीरी पेंटिंग जैसा रूप देते हैं। इस घाटी से हब्बा खातून पर्वत साफ नजर आता है। गर्मियों में जहां पूरा क्षेत्र चमकीली हरियाली और जंगली फूलों से सज जाता है। वहीं सर्दियों में भारी बर्फ के कारण संपर्क प्रभावित हो सकता है, इसलिए मई से सितंबर के बीच यात्रा अपेक्षाकृत आसान रहती है।

इन गांवों की यात्रा से ही समझ आता है कि कठिन मौसम और सीमित सुविधाओं के बीच भी लोग अपनी परंपराओं और जमीन से कितनी मजबूती से जुड़े हैं। हां, जाने से पहले मौसम, सड़क, परमिट और सुरक्षा से जुड़े मौजूदा नियम जरूर जांच लें।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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