भारत में घूमने फिरने के लिए बहुत सी बेहद खूबसूरत जगहें हैं। जिनकी सुंदरता को शब्दों या कैमरा में कैद करना बेहद मुश्किल होता है। ऐसी ही जगहों में सिक्किम का भी नाम शामिल है। हालांकि सिक्किम घूमने का नाम आते ही आमतौर पर बर्फीली पहाड़ियां, खूबसूरत झीलें और गंगटोक की तस्वीरें दिमाग में आती हैं। लेकिन इसी राज्य में एक ऐसी घाटी भी है, जो स्वर्ग सी सुंदर है और उसके बारे में बहुत कम लोग बात करते हैं।
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इस वैली का नाम है जोंगू वैली, ट्रैवल क्रिएटर तान्या खनिजौ ने अपनी एक वीडियो में इस जगह की सैर से जुड़ी बातें शेयर की थी। उनके मुताबिक, जब उन्होंने कई लोगों से पूछा कि सिक्किम में सिर्फ एक जगह जाने का मौका मिले तो कहां जाना चाहिए, तो बार-बार एक ही नाम सामने आया.. जोंगू। इस जगह को लेकर सबसे दिलचस्प बात सिर्फ इसका शांत और प्राकृतिक माहौल नहीं, बल्कि यहां प्रवेश के लिए जरूरी परमिट भी है। तान्या के वीडियो के अनुसार, नॉर्थ सिक्किम के जोंगू को लंबे समय से एक ऐसी जगह के रूप में देखा जाता है जहां प्रकृति, स्थानीय जीवन और लेप्चा समुदाय की पहचान एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई है। यही वजह है कि यह जगह सामान्य पर्यटन स्थल से अलग अनुभव देती है।
यहां की असली खूबसूरती सिर्फ पहाड़ नहीं
जोंगू की खासियत यह है कि यहां पहुंचकर ऐसा महसूस नहीं होता कि आप किसी बड़े पर्यटन केंद्र में आ गए हैं। रास्ते, गांव, हरियाली और स्थानीय जीवन मिलकर एक धीमी रफ्तार वाली दुनिया बनाते हैं। तान्या की यात्रा में पेंटोंग जैसे दूरस्थ गांव तक पहुंचने का अनुभव भी शामिल रहा। उनके वीडियो के अनुसार, पेंटोंग गांव की आबादी करीब 200 है और यहां तक पहुंचने के रास्ते भी यात्रा का बड़ा हिस्सा हैं।
लेप्चा संस्कृति से जुड़ी पहचान
जोंगू लेप्चा समुदाय की पारंपरिक भूमि के रूप में जाना जाता है। यहां की संस्कृति में प्रकृति का स्थान सिर्फ खूबसूरत दृश्य तक सीमित नहीं है। जंगल, नदियां, खेती, स्थानीय बीज, पवित्र स्थल और पारंपरिक शिल्प रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा हैं। इसी वजह से जोंगू की यात्रा को सामान्य घूमने-फिरने से थोड़ा अलग अनुभव कहा जा सकता है। यहां घूमते समय स्थानीय घरों, धार्मिक स्थलों, जंगलों और परंपराओं का सम्मान करना बेहद जरूरी है।
क्यों लगता है परमिट
जोंगू में कोई अंतरराष्ट्रीय सीमा है या फिर कोई राष्ट्रीय उद्यान नहीं फिर भी यहां की एंट्री पर परमिट लगता है। दरअसल, ऐसा इसलिए क्योंकि सिक्किम सरकार की जानकारी के अनुसार पूरा जोंगू क्षेत्र Protected Area के दायरे में आता है और यहां जाने के लिए Protected Area Permit यानी PAP की व्यवस्था है। इसलिए परमिट की जरूरत का मतलब यह नहीं कि यह जगह कोई खतरनाक इलाका है। यह क्षेत्र अपनी संवेदनशील भौगोलिक, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक स्थिति के कारण विशेष नियमों के तहत आता है।
जोंगू ऐसी ही जगह है, जहां पहाड़ों के बीच मंजिल से ज्यादा मायने रास्ते और वहां के लोगों की कहानी रखती है। अगर आप भी आने वाले दिनों में सिक्किम घूमने का प्लान बना रहे हैं। तो जोंगू में कुछ दिन जरूर ही बिताएं।
