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मोबाइल फोन होंगे सस्ते? GST काउंसिल की बैठक में 18% टैक्स घटाने पर हो सकता है फैसला

12 सितंबर की GST काउंसिल बैठक में मोबाइल फोन पर GST घटाने का फैसला हुआ तो इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिल सकता है, लेकिन फिलहाल इसे संभावित फैसला ही माना जाना चाहिए। बैठक में टैक्स कटौती के अलावा GST व्यवस्था में फंसी वर्किंग कैपिटल, ITC और कारोबारियों के अनुपालन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने पर भी बड़ा फोकस रहने की उम्मीद है।

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374 दिन बाद होगी GST काउंसिल की बैठक

मोबाइल फोन खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। GST काउंसिल की 12 सितंबर को होने वाली बैठक में मोबाइल फोन पर लगने वाले GST को कम करने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। फिलहाल मोबाइल हैंडसेट पर 18 प्रतिशत GST लगता है। हालांकि, टैक्स में कटौती का प्रस्ताव अभी अंतिम नहीं है और आधिकारिक एजेंडा भी जारी नहीं हुआ है।

374 दिन बाद होगी GST काउंसिल की बैठक

GST काउंसिल की यह बैठक करीब 374 दिनों के अंतराल के बाद होने जा रही है। पिछली बैठक में मुख्य रूप से टैक्स रेट को तर्कसंगत बनाने पर चर्चा हुई थी, लेकिन इस बार कारोबारियों के लिए GST अनुपालन को आसान बनाने और टैक्स व्यवस्था में मौजूद व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने पर ज्यादा जोर रहने की उम्मीद है। मोबाइल फोन पर GST घटाने का प्रस्ताव इसी बैठक में चर्चा के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकता है। हैंडसेट की मांग में आई सुस्ती को देखते हुए मोबाइल इंडस्ट्री को टैक्स में कमी से राहत मिलने की उम्मीद है।

18% से कम हो सकता है मोबाइल फोन पर GST

फिलहाल मोबाइल फोन पर 18 प्रतिशत GST लगाया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, काउंसिल इस दर को किसी निचले टैक्स स्लैब में लाने पर विचार कर सकती है। अगर ऐसा फैसला होता है तो मोबाइल फोन की कीमतों में कमी आने की संभावना बन सकती है। हालांकि, जब तक GST काउंसिल आधिकारिक तौर पर फैसला नहीं लेती, तब तक टैक्स कटौती को तय नहीं माना जा सकता। यह भी स्पष्ट नहीं है कि अगर दर घटती है तो नई GST दर कितनी होगी।

कारोबारियों के लिए Compliance आसान करने पर जोर

इस बैठक में सिर्फ टैक्स रेट ही नहीं, बल्कि GST व्यवस्था से जुड़ी कई प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर भी चर्चा हो सकती है। जानकारों के मुताबिक, GST 2.0 के बाद टैक्स स्लैब को सरल किया गया है, लेकिन कुछ उद्योगों में Inverted Duty Structure की समस्या बढ़ी है।

इस व्यवस्था में कंपनियों को कच्चे माल और इनपुट पर जितना GST देना पड़ता है, अंतिम उत्पाद पर उतना टैक्स नहीं बनता। इससे कंपनियों का टैक्स क्रेडिट फंस जाता है और उनकी वर्किंग कैपिटल पर दबाव बढ़ता है। मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, फार्मा और FMCG जैसे सेक्टर इस समस्या से प्रभावित हैं।

Input Service का GST रिफंड भी मुद्दा

जानकारों का कहना है कि मौजूदा रिफंड व्यवस्था से कुछ राहत मिली है, लेकिन इसमें इनपुट सर्विस पर दिए गए GST क्रेडिट को पूरी तरह कवर नहीं किया जाता। ऐसे में कानून में बदलाव करके इनपुट सर्विस क्रेडिट के रिफंड की अनुमति देने की मांग उठ रही है। GST से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों के बाद इस मुद्दे पर अंतिम नीति निर्णय GST काउंसिल के स्तर पर होने की उम्मीद है।

ईमानदार टैक्सपेयर्स को ITC सुरक्षा देने की मांग

बैठक में Input Tax Credit (ITC) से जुड़े नियमों पर भी चर्चा हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी खरीदार ने सभी नियमों का पालन करते हुए सामान या सेवा खरीदी है, लेकिन बाद में सप्लायर अपना टैक्स जमा नहीं करता, तो खरीदार का ITC नहीं फंसना चाहिए।

इसके लिए ईमानदार और नियमों का पालन करने वाले टैक्सपेयर्स को कानूनी सुरक्षा देने की जरूरत बताई जा रही है। इसके अलावा GST 2.0 के बाद पुराने और ट्रांजिशनल क्रेडिट से जुड़े मामलों पर भी विचार हो सकता है।

करीब 6,000 करोड़ रुपये के Compensation Cess का मामला

GST काउंसिल के सामने Compensation Cess का मुद्दा भी आ सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, GST 2.0 के बाद कुछ कंपनियों के पास करीब 6,000 करोड़ रुपये का जमा Compensation Cess रह गया है।

ऑटोमोबाइल सेक्टर और कोयले का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों पर इसका असर पड़ा है। कुछ कंपनियों ने इसका भार खुद उठाया है, कुछ ने इसे ग्राहकों पर डाला है, जबकि कुछ ने रकम के समायोजन या वापसी के लिए कानूनी रास्ता अपनाया है। ऐसे में काउंसिल इसके समाधान के लिए कोई मैकेनिज्म तैयार कर सकती है।

मोबाइल के साथ इन मुद्दों पर भी नजर

GST काउंसिल निर्माण और वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े कुछ Blocked ITC नियमों की समीक्षा कर सकती है। इसके अलावा ITC, Place of Supply और Product Classification जैसे विवादित मुद्दों पर अदालत जाने से पहले उन्हें स्पष्ट करने की व्यवस्था बनाने का सुझाव भी दिया गया है।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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