What is Burner Phone? अगर आपको लगता है कि फोन्स सिर्फ दो तरह के होते हैं जिसमें स्मार्टफोन और नॉर्मल फीचर फोन शामिल होते हैं तो ऐसा नहीं है। फोन्स की कैटेगरी भी कई तरह की होती है और अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से फोन्स का उद्देश्य भी होता है। ऐसा ही एक फोन है जिसे बर्नर फोन (Burner Phone) कहा जाता है। आपने अक्सर इस फोन का नाम मूवीज और वेब सीरीज में सुना होगा। इस फोन का नाम आते ही यह सवाल मन में उठने लगता है कि आखिर यह किस तरह का फोन है और दूसरे फोन की तुलना में इसमें अलग क्या है? आज के आर्टिकल में हम इसी बर्नर फोन के बारे में आपको बताने वाले हैं।
Burner Phone प्राइवेसी प्रोटेक्टेड फोन होता है। इस फोन को सामान्यतौर पर अस्थाई कम्युनिकेशन के लिए डिजाइन किया गया है और इसमें आपको दूसरे नॉर्मल फोन की तुलना में ज्यादा प्राइवेसी फीचर्स मिलते हैं। इस्तेमाल करने के बाद इस डिवाइस को पूरी तरह से डिस्ट्राय कर दिया जाता है। इस फोन की सबसे बड़ी खास बात यह है कि इसे किसी भी तरह से हैक नहीं किया जा सकता है और साथ ही इसमें मौजूद डेटा को भी किसी तरह से लीक नहीं होता।
इसे ट्रैक करना है बेहद मुश्किल
बर्नर फोन पूरी तरह से अनट्रेसेबल फोन होता है मतलब इसे किसी भी तरह से ट्रैक करना लगभग नामुमकिन है। अगर कीमत की बात करें तो यह आम फोन या फिर स्मार्टफोन की तुलना में काफी कम होती है। ज्यादातर इस फोन का इस्तेमाल उन जगहों पर किया जाता है जहां पर प्राइवेसी एक प्रमुख कंसर्न हैं और अगर यूजर अपना नंबर किसी के साथ शेयर नहीं करना चाहता।
आपको बता दें कि बर्नर फोन एक छोटे फीचर फोन की तरह काम करता है। इसको शॉर्ट टर्म यूज के लिए डिजाइन किया गया है। मतलब इस्तेमाल होने के बाद इसे तोड़ दिया जाता है। बर्नर फोन में आपको लिमिटेड फीचर्स मिलते हैं। आप इस फोन में सिर्फ कॉलिंग, टेक्स्ट मैसेज और लिमिटेड वेब ब्राउजिंग की सुविधा मिलती है।
इस्तेमाल करने पर लाखों का जुर्माना और जेल तक की सजा
इस फोन का मकसद संवेदनशील कार्यों, पर्सनल मीटिंग या फिर जरूरी बात की प्राइवेसी को बनाए रखने के लिए किया जाता है। इसका एक बड़ा फायदा यह है कि इससे आप एक दूसरे से बात तो कर सकते हैं लेकिन इससे यूजर का नंबर दूसरी तरफ शेयर नहीं होता है। मतलब आपकी निजी जानकारी पूरी तरह से सेफ रहती है। इसके अलावा इसमें स्पैम मैसेज या फिर स्पैम कॉल की टेंशन भी नहीं होती है। आपको बता दें कि भारत में बर्नर फोन का इस्तेमाल करना बेहद कठिन या फिर यह कह सकते हैं कि लगभग नामुमकिन है। क्योंकि भारत में सिम एक्टिवेशन के लिए आपको आधार कार्ड जैसा जरूरी डॉक्यूमेंट आईडी प्रूफ के तौर पर देना होता है। अगर कोई व्यक्ति इसे इस्तेमाल करते हुए पकड़ा जाता है तो 3 साल तक की सजा और 50 लाख तक का जुर्माना लग सकता है।
