टेक एंड गैजेट्स

लॉन्च होते ही वायरल हो गया है ऐप, हर 48 घंटे में पूछता है- “क्या आप जिंदा हैं?”

यह ऐप खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाया गया है जो बड़े शहरों में अकेले रहते हैं। इसमें युवा प्रोफेशनल्स, घर से दूर काम करने वाले कर्मचारी और बुजुर्ग लोग शामिल हैं, जिनके बच्चे दूसरे शहरों में रहते हैं। ऐसी जिंदगी में कई बार दिन बीत जाते हैं और किसी को पता नहीं चलता कि सामने वाले के साथ क्या चल रहा है।

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Are You Dead App China/photo-Canva

कल्पना कीजिए कि आपका मोबाइल फोन हर दो दिन में आपसे सिर्फ एक सवाल पूछे “क्या आप जिंदा हैं?” और अगर आपने जवाब नहीं दिया, तो आपके परिवार या किसी करीबी को अलर्ट चला जाए। सुनने में अजीब लगता है, लेकिन चीन में ऐसा ही एक ऐप इन दिनों तेजी से वायरल हो रहा है। इस ऐप का नाम है “Are You Dead?”, जिसे लाखों लोग अपनी डिजिटल सुरक्षा के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।

कैसे काम करता है ‘Are You Dead?’ ऐप

यह ऐप बेहद सिंपल डिजाइन पर काम करता है। इसमें न तो चैट है, न प्रोफाइल और न ही कोई सोशल फीड। स्क्रीन पर सिर्फ एक बड़ा सा बटन होता है, जिस पर लिखा रहता है “I’m Alive”। यूजर को हर 48 घंटे में एक बार इस बटन को टैप करना होता है।

अगर कोई यूज़र लगातार दो बार चेक-इन करना भूल जाता है, तो ऐप अपने आप पहले से तय किए गए इमरजेंसी कॉन्टैक्ट को अलर्ट भेज देता है। यह कॉन्टैक्ट माता-पिता, भाई-बहन, दोस्त या पड़ोसी कोई भी हो सकता है। मैसेज में चेतावनी दी जाती है कि यूजर से संपर्क नहीं हो पा रहा है और कुछ गड़बड़ हो सकती है।

अकेले रहने वालों के लिए डिजिटल सेफ्टी नेट

यह ऐप खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाया गया है जो बड़े शहरों में अकेले रहते हैं। इसमें युवा प्रोफेशनल्स, घर से दूर काम करने वाले कर्मचारी और बुजुर्ग लोग शामिल हैं, जिनके बच्चे दूसरे शहरों में रहते हैं। ऐसी जिंदगी में कई बार दिन बीत जाते हैं और किसी को पता नहीं चलता कि सामने वाले के साथ क्या चल रहा है। ऐसे में यह ऐप एक डिजिटल सेफ्टी नेट की तरह काम करता है, जो बिना परेशान किए चुपचाप आपकी मौजूदगी दर्ज करता रहता है।

क्यों पसंद आ रहा है यह ऐप?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस ऐप की सबसे बड़ी ताकत इसकी सादगी है। यह यूजर का ध्यान नहीं मांगता, न ही किसी सोशल ऐप जैसा दबाव बनाता है, लेकिन जब सच में जरूरत पड़ती है, तब यह यूजर की आवाज बनकर सामने आता है।

‘Loneliness Tech’ या जरूरत का समाधान?

कुछ लोग इस ऐप को “Loneliness Tech” यानी अकेलेपन से निपटने वाली टेक्नोलॉजी बता रहे हैं। उनका मानना है कि भीड़भाड़ वाले शहरों में लोग अंदर से बेहद अकेले हो चुके हैं। परिवार दूर रहते हैं, पड़ोसियों से बातचीत कम होती जा रही है। वहीं कुछ लोगों को यह विचार असहज भी करता है। उनका सवाल है, क्या हम ऐसे दौर में पहुंच गए हैं, जहां हमें जिंदा होने का सबूत भी एक ऐप के जरिए देना पड़े?

डर जो इस ऐप की लोकप्रियता दिखाता है

इस ऐप की लोकप्रियता एक गहरे डर को भी उजागर करती है न दिखने का डर, यानी अगर कुछ हो जाए और किसी को खबर तक न मिले। यही डर इसे सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि आधुनिक शहरी जिंदगी का आईना बनाता है। यह कहानी शायद सिर्फ चीन तक सीमित न रहे। भारत जैसे देशों में भी लाखों लोग रोज़गार के लिए अकेले शहरों की ओर जाते हैं। ऐसे में आने वाले समय में इस तरह के ऐप भारतीय यूजर्स को भी बेहद परिचित और जरूरी लग सकते हैं।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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