माउथ टेपिंग वेल्नेस इंडस्ट्री का एक नया ट्रेंड है, जिसमें लोग रात को सोते समय अपने होठों पर विशेष मेडिकल टेप चिपका लेते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य मुंह से सांस लेने की आदत को रोकना और जबरन नाक से सांस लेने को बढ़ावा देना है।
डॉक्टरों के अनुसार, नाक से सांस लेना प्राकृतिक रूप से शरीर के लिए सबसे सही तरीका है। नाक हवा को फिल्टर करती है, उसे नमी देती है और फेफड़ों तक पहुंचाने से पहले सही तापमान पर लाती है। इसके अलावा, नाक से सांस लेने पर शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड का उत्पादन होता है जो खून के बहाव को बेहतर बनाता है।
जो लोग रात में मुंह से सांस लेते हैं, उन्हें अक्सर सुबह उठकर मुंह में सूखापन, गले में खराश और सांसों की बदबू की समस्या होती है। लंबे समय तक मुंह से सांस लेने से दांतों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है और खर्राटों की समस्या बढ़ सकती है।
दावा किया जाता है कि माउथ टेपिंग से खर्राटों में कमी आती है और गहरी नींद मिलती है। हालांकि ईएनटी विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल कुछ लोगों के लिए मामूली राहत दे सकता है, लेकिन यह खर्राटों या अनिद्रा का कोई स्थाई इलाज नहीं है।
स्लीप एप्निया, नेज़ल पॉलिप्स, साइनस, एलर्जी या सांस की अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों को भूलकर भी माउथ टेपिंग नहीं करनी चाहिए। ऐसे मरीजों में रात के समय सांस रुकने या घबराहट होने का गंभीर जोखिम रहता है।
यदि आप इसे आजमाना चाहते हैं, तो साधारण सेलोटेप का इस्तेमाल कभी न करें। इसके लिए केवल त्वचा के अनुकूल मेडिकल-ग्रेड टेप का ही उपयोग करें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे आजमाने से पहले किसी ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
माउथ टेपिंग किसी समस्या का मूल समाधान नहीं है। यदि आपको रात में सांस लेने में तकलीफ होती है या भारी खर्राटे आते हैं, तो सोशल मीडिया ट्रेंड्स को फॉलो करने के बजाय डॉक्टर से जांच करवाकर सही कारण का इलाज कराना चाहिए।