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स्कूलों में Smartphone बैन से छात्रों पर क्या असर पड़ता है? सर्वे ने दुनिया को चौंका दिया!

Smartphone Ban in School: आज के समय स्मार्टफोन की वजह से छात्रों को पढ़ाई में काफी मदद तो मिल रही है, लेकिन इसी के साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। हाल ही में आई एक स्टडी में सामने आया है कि स्कूलों में फोन बैन करने से छात्रों का तनाव कम होता है, ध्यान बेहतर होता है।

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दुनियाभर के स्कूलों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल को लेकर किया गया सर्वे। AI IMAGE

Smartphone Ban in School: संस्कृत में एक स्लोक है, "अति सर्वत्र वर्जयेत्," हिंदी में इसका अर्थ है कि किसी भी चीज की अति (अधिकता या हद से ज्यादा होना) हमेशा बुरी होती है। आज के समय स्मार्टफोन के बिना हम और आप अपनी जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकते। जरूरी कामकाज से लेकर एंटरटेनमेंट तक, इंसान का स्मार्टफोन अब उसके लिए किसी बेस्ट फ्रेंड से कम नहीं है। हालांकि, सबसे बड़ी चिंता ये है कि मौजूदा समय में बच्चे खासकर स्टूडेंट भी हर वक्त फोन के साथ ही अपनी जिंदगी बिताते हैं।

घर तो ठीक है, लेकिन अब छात्र स्कूलों में भी मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि स्मार्टफोन की वजह से छात्रों को पढ़ाई में काफी मदद मिल रही है, लेकिन इसी के साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

हाल ही में आई एक स्टडी में सामने आया है कि स्कूलों में फोन बैन करने से छात्रों का तनाव कम होता है, ध्यान बेहतर होता है और उनका व्यवहार भी सकारात्मक दिशा में बदलता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी तरह से बैन करना हर स्थिति में सही समाधान नहीं है।

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स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते बच्चों की फाइल फोटो। istock

क्या कहता है सर्वे?

हंगरी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन में 1,198 सेकेंडरी स्कूल शिक्षकों से सर्वे किया गया। इस सर्वे में पाया गया कि स्कूलों में मोबाइल, टैबलेट, लैपटॉप और स्मार्टवॉच जैसे उपकरणों पर पाबंदी लगाने से छात्रों द्वारा फोन का इस्तेमाल काफी घट गया। पहले जहां 37 प्रतिशत छात्र स्कूल के समय में बार-बार फोन इस्तेमाल करते थे, वहीं पाबंदी के बाद यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 4 प्रतिशत रह गया।

इतना ही नहीं, टीचर्स ने स्टूडेंट्स के व्यवहार में कई सकारात्मक बदलाव नोट किए। बच्चों में आमने-सामने बातचीत बढ़ी, वे ज्यादा आउटडोर एक्टिविटी में शामिल होने लगे और शतरंज व कार्ड जैसे खेलों में रुचि बढ़ी। कुछ मामलों में ध्यान, क्लास में भागीदारी और याद रखने की क्षमता में सुधार भी देखा गया।

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स्मार्टफोन का इस्तेमाल कम करने से बच्चों में दिखे सकारात्मक बदलाव: रिपोर्ट istock

हालांकि, पढ़ाई में सुधार सीमित ही रहा। करीब 64% शिक्षकों ने कहा कि उन्हें कोई खास फर्क नजर नहीं आया, जबकि कुछ छात्रों ने फोन न मिलने की भरपाई घर पर देर रात तक मोबाइल चलाकर की।

इन देशों ने स्कूल में स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर लगाया बैन

रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के 58% देशों में स्कूलों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल को लेकर किसी न किसी तरह के नियम लागू हैं। यूरोप और सेंट्रल एशिया में यह आंकड़ा 86% तक पहुंच जाता है, जबकि साउथ एशिया में 92% देशों ने इस पर नियंत्रण के उपाय अपनाए हैं। फ्रांस, चीन, कनाडा, डेनमार्क, स्वीडन और इंग्लैंड जैसे देशों में पहले से ही स्कूलों में मोबाइल पर सख्ती लागू है।

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छात्रों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे स्मार्टफोन को लेकर UNESCO GEM ने जारी की रिपोर्ट। AI GENERATED

क्या कहती है UNESCO की रिपोर्ट?

यूनेस्को की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ फोन का नोटिफिकेशन देखना भी छात्रों का ध्यान भटका सकता है और दोबारा फोकस करने में 20 मिनट तक का समय लग सकता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ बैन लगाना ही समाधान नहीं है। इससे छात्रों की डिजिटल लर्निंग और नई तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सीखने के अवसर सीमित हो सकते हैं।

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सिर्फ फोन का नोटिफिकेशन देखना भी छात्रों का ध्यान भटका सकता है। istock

ऑस्ट्रेलिया के साउथ ऑस्ट्रेलिया में हुए एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि फोन बैन से छात्रों के मानसिक तनाव में 2.4% की कमी आई। साथ ही उदासी, डर और चिंता जैसे नकारात्मक भाव 5.2% तक घटे। हालांकि सकारात्मक भावनाओं में ज्यादा सुधार नहीं देखा गया।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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