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Hormuz में एक्टिव हुए स्कैमर्स, फंसे जहाजों को निकालने के लिए क्रिप्टो में कर रहे वसूली

हॉर्मुज में बढ़ते तनाव ने न केवल व्यापार को प्रभावित किया है, बल्कि साइबर ठगी के नए रास्ते भी खोल दिए हैं। अब ऐसे क्षेत्रों में कंपनियों को अब ऑपरेशनल चुनौतियों के साथ-साथ वित्तीय धोखाधड़ी से भी सतर्क रहना होगा।

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हॉर्मुज में एक्टिव हुए स्कैमर्स, फंसे जहाजों को निकालने के लिए क्रिप्टो में कर रहे वसूली

Photo : iStock

वैश्विक समुद्री मार्ग हॉर्मुज (Strait of Hormuz) के पास फंसे जहाजों को लेकर एक नया साइबर फ्रॉड सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ठग खुद को ईरानी अधिकारी बताकर शिपिंग कंपनियों से सुरक्षित रास्ता देने के बदले क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान मांग रहे हैं।

क्रिप्टो में मांगी जा रही ‘ट्रांजिट फीस’

समुद्री जोखिम विश्लेषण कंपनी मारिस्क्स (Marisks) ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि कुछ अज्ञात समूह शिपिंग कंपनियों से संपर्क कर रहे हैं। ये स्कैमर्सBitcoin या Tether (USDT) में भुगतान मांगते हैं और बदले में जलडमरूमध्य पार कराने का दावा करते हैं।

प्रोफेशनल मैसेजिंग से बढ़ा भरोसा

रिपोर्ट के अनुसार, ठग बेहद व्यवस्थित मैसेज और प्रक्रिया का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे वे असली अधिकारियों जैसे लगते हैं। इसी वजह से कई शिपिंग कंपनियां उनके जाल में फंस रही हैं। बता दें कि हॉर्मुज जलडमरुमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से पहले वैश्विक तेल और LNG सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा गुजरता था। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण पहले ही व्यापार प्रभावित है, और अब इस तरह की ठगी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

ईरान पर क्रिप्टो भुगतान के दावे

इस महीने की शुरुआत में खबरें आई थीं कि ईरान जहाजों से बिटकॉइन में शुल्क लेने पर विचार कर रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि खाली टैंकरों को छूट दी जा सकती है, जबकि अन्य से प्रति बैरल करीब 1 डॉलर वसूला जा सकता है।

कंपनियों के लिए कानूनी जोखिम

ब्लॉकचेन एनालिटिक्स कंपनी Chainalysis की विशेषज्ञ कैटलिन मार्टिन ने चेतावनी दी है कि यदि शिपिंग कंपनियां ऐसे भुगतान करती हैं, तो उन्हें गंभीर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। इस पूरे घटनाक्रम का असर ईरान की क्रिप्टो माइनिंग इंडस्ट्री पर भी पड़ा है। Bitcoin की हैशरेट में पिछले तिमाही में 77% की गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की माइनिंग क्षमता घटकर करीब 2 EH/s रह गई है।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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