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‘वर्क-फ्रॉम-होम’ के नाम पर खूब हो रही ठगी, एक गलती और बैंक अकाउंट खाली, इन ठगों को ऐसे पहचानें

Work From Home And Part Time Jobs के नाम पर हर रोज लोगों के साथ भारी ठगी हो रही है। आप भी इसके शिकार हो सकते हैं लेकिन यदि आप इस स्कैम को पहचान लेंगे तो बच भी सकते हैं।

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‘वर्क-फ्रॉम-होम’ के नाम पर खूब रही ठगी, एक गलती और आपका बैंक अकाउंट खाली

कोरोना महामारी के आने के बाद दो शब्द खूब प्रचलित हुए। पहला तो कोरोना ही है और दूसरा वर्क-फ्रॉम-होम। कोविड काल में तमाम कंपनियों ने लोगों को वर्क-फ्रॉम-होम की सुविधा दी थी और उसके बाद लोगों को इसकी ऐसी लत लगी कि आज भी यदि किसी कंपनी में वर्क-फ्रॉम-होम की सुविधा मिल रही है लेकिन सैलरी कम हो तो लोग उसी कंपनी को चुनेंगे।

राजस्थान में वर्क-फ्रॉम-होम के नाम पर बड़ी ठगी

अब इसी वर्क-फ्रॉम-होम स्कैम के मामले में राजस्थान के करौली से पशु चिकित्सा विज्ञान के 20 वर्षीय छात्र को गिरफ्तार किया गया है। इस फर्जीवाड़े में नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को हस्तलेखन से जुड़े काम का लालच देकर ठगा जाता था।

पीड़ित से 34 हजार रुपये की ठगी

आरोपी की पहचान अनुज मीना के रूप में हुई है। यह गिरफ्तारी मध्य दिल्ली के एक पीड़ित की शिकायत के बाद की गई, जिसने इस घोटाले में 34,000 रुपये गंवा दिए थे। पीड़ित ने सोशल मीडिया के जरिए संपर्क किया था, जहां उसे घर बैठे काम का झांसा दिया गया।

फर्जी शुल्क के नाम पर वसूली

जांच में सामने आया कि जालसाजों ने पंजीकरण शुल्क, सामग्री शुल्क, जीएसटी और खाता सत्यापन जैसे अलग-अलग बहानों से पैसे वसूले। इसके अलावा, पीड़ित को भ्रमित रखने के लिए असफल ट्रांजैक्शन और छोटी-छोटी बकाया राशि का बहाना बनाकर और रकम ऐंठी गई।

एफआईआर के बाद शुरू हुई कार्रवाई

इस मामले में 29 अप्रैल को एफआईआर दर्ज की गई, जिसके बाद आरोपियों की तलाश के लिए एक विशेष टीम गठित की गई। वित्तीय लेन-देन की जांच के दौरान पुलिस को एक यूपीआई खाते का पता चला, जो आरोपी से जुड़ा हुआ था। सोशल मीडिया अकाउंट के तकनीकी विश्लेषण से जुड़े मोबाइल नंबरों की पहचान की गई। इसके बाद पुलिस टीम ने करौली में छापेमारी कर 1 मई को अनुज मीना को गिरफ्तार कर लिया।

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सह-आरोपी के साथ मिलकर रची साजिश

पूछताछ में सामने आया कि मीना ने गणेश शर्मा उर्फ प्रिंस उर्फ गोलू नामक व्यक्ति के साथ मिलकर साइबर धोखाधड़ी के तरीके सीखे थे। दोनों ने मिलकर सोशल मीडिया अकाउंट बनाए और नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को निशाना बनाया।

रैकेट का तरीका और आगे की जांच

जानकारी के मुताबिक, शर्मा ऑनलाइन बातचीत संभालता था, जबकि मीना बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराकर पैसों के लेन-देन में मदद करती थी। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य पीड़ितों और सह-आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।

कैसे करें इस तरह के स्कैम की पहचान?

स्कैम देश में तमाम तरह के हो रहे हैं और लोग अपनी कमाई भी गंवा रहे हैं। इनसे बचने का एक ही तरीका है कि आप सतर्क रहे हैं। आप जितना सावधान और सतर्क रहेंगे, स्कैमर्स उतने ही आपसे दूर रहेंगे। इसके अलावा किसी भी स्कैम की सबसे बड़ी पहचान यही है कि आपसे पैसे मांगे जाते हैं। ये पैसे कई बार रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में तो कई बार रिफंड के नाम पर मांगे जाते हैं।

यदि कोई आपसे नौकरी देने के लिए पैसे मांग रहा है तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। साथ ही यदि कोई आपसे लंबा चौड़ा फॉर्म भरवा रहा है और बैंक डिटेल, ओटीपी, आधार कार्ड आदि की जानकारी मांग रहा है तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए। कई बार ये स्कैमर्स आपको भरोसा दिलाने के लिए आपके बैंक अकाउंट में पैसे तक भेज देते हैं। इनसे सावधान रहें।

स्कैम होने पर क्या करें?

किसी भी तरह के स्कैम के शिकार होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा सोशल मीडिया पर साइबर दोस्त से भी शिकायत करें। साथ ही स्थानीय साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत करें।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेय author

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिय... और देखें

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