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ChatGPT वाले Open AI के सीईओ बोले - सरकार दे इसमें दखल, नहीं तो बुरा होगा अंजाम

  • Authored by: अंशुमन साकल्ले
  • Updated May 17, 2023, 02:28 PM IST

ChatGPT वाले Open AI के सीईओ सैम अल्टमैन Sam Altman ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर सरकार का हस्तक्षेप बहुत जरूरी है। अमेरिकी सीनेटर के सामने दिए गए बयान में सैम ने इसके खतत इस्तेमाल की भी बात की है।

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कोर्ट ने एआई के सबसे बड़े खतरे को लेकर गहरी चिंता जताई है जिसमें कम्प्यूटर से बनाई गई आवाज शामिल है।

Photo : BCCL
KEY HIGHLIGHTS
  • AI पर सरकार का हस्तक्षेप जरूरी
  • गलत इस्तेमाल हुआ तो अंजाम बुरा
  • अमेरिकी सीनेटर के सामने दिया बयान

Open AI CEO On Artificial Intelligence: चैट जीपीटी के कविता लिखने वाले चैटबॉट ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है, इस मामले पर चैट जीपीटी ओपनएआई के चीफ एग्जिक्यूटिव सैम अल्टमैन ने यूएस के न्यायालय में कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बहुत जरूरी है। कोर्ट ने एआई के सबसे बड़े खतरे को लेकर गहरी चिंता जताई है जिसमें कम्प्यूटर से बनाई गई आवाज शामिल है। चैटबॉट द्वारा लिखे गए शब्दों को एआई ने ठीक उसी आवाज में पेश किया जिस आवाज में वहां के मुख्य सीनेटर बात करते हैं। यूएस के सीनेटर रिचर्ड ब्लमेंथल ने कहा, "अगर आप घर पर बैठकर सुनेंगे तो आपको लगेगा कि ये आवाज और ये शब्द मेरे हैं। लेकिन असल में ये मेरी आवाज है ही नहीं।" उन्होंने आगे कहा कि एआई तकनीक रिसर्च एक्सपेरिमेंट से बहुत आगे बढ़ चुका है। ये अब सिर्फ साइंस फिक्शन नहीं रह गए हैं, बल्कि एक रूप में आ चुके हैं और सब जगह मौजूद हैं।

सरकार का हस्तक्षेप होगा जरूरी

सैम अल्टमैन ने अमेरिकी सीनेट के सामने अपने बयान में कहा कि अगर एआई का गलत इस्तेमाल हुआ तो ये बहुत खतरनाक स्तर तक गलत हो सकता है। ओपनएआई दुनिया पर छाने वाला है और इसके गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सरकारों द्वारा इसमें हस्तक्षेप करना बहुत जरूरी होगा।

कई जगह खतरे की घंटी है एआई

नैकरियों से लेकर कलाकारों और बहुत से अन्य काम चैटजीपीटी की सहायता से बहुत आसानी से किए जा रहे हैं। इससे व्यापक तौर पर लोगों की नौकरियों पर खतरा बन गया है, इसमें आर्टिस्ट, म्यूजिशियन और सामान्य जॉब करने वाले लोग बड़ी संख्या में शामिल हैं। अल्टमैन ने कहा कि क्रिएटरो पर कंट्रोल होना चाहिए, ये मानवता की भलाई के लिए बनाया गया टूल है।

लोकतंत्र भी है बहुत बड़ा खतरा

ओपनएआई चैटजीपीटी का उदाहरण देकर हम आपको बताते हैं कि इस एआई चैटबॉट के पास 2021 तक डेटा ही उपलब्ध है। कहने का मतलब आपको अगर किसी मौजूदा सरकार मुद्दे पर जानकारी चाहिए तो चैटजीपीट आपको सिर्फ 2021 तक का डेटा ही मुहैया कराए पाएगा। ऐसे में 2021 के बाद के तमाम बदलावों या नीतियों की जानकारी आपको नहीं दी जा सकेगी, कुल मिलाकर लोकतंत्र के लिए भी एआई बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

अंशुमन साकल्ले
अंशुमन साकल्लेauthor

अंशुमन साकल्ले जून 2022 से टाइम्स नाउ नवभारत (www.timesnowhindi.com/) में बतौर सीनियर स्पेशल करेस्पॉन्डेंट कार्यरत हैं। ये ईएमएमसी, दैनिक भास्कर, एनडीटीवी और जी न्यूज डिजिटल में काम करने के बाद संस्थान से जुड़े। इन्हें सभी मुख्य बीट्स पर काम करने का अनुभव है और ये 12 वर्ष से भी ज्यादा इसी पेशे में गुजार चुके हैं। एक्सपर्टीज की बात करें तो ऑटो और टेक से जुड़ी तमाम खबरों का जिम्मा यही संभाल रहे हैं। ऑन ग्राउंड रिपोर्ट हो या वीडियो या फिर गाड़ियों का रिव्यू, ये हमेशा अलग-अलग एंगल से खबरों को रोचक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। भोपाल के रहने वाले अंशुमन बड़े घुमक्कड़ हैं और ये देश की लगभग सभी प्रचलित जगहों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कर चुके हैं। एनडीटीवी से लेकर अब तक इन्होंने सिर्फ ऑटोमोबाइल जगत से जुड़ी खबरों पर ही काम किया है, हालांकि कोर बीट से इतर चुनाव, बजट या किसी भी बडे इवेंट पर इन्हें बड़ी और महत्वपूर्ण खबरों की जिम्मेदारी भी दी जाती है। इन सबके अलावा राजनीति में भी इन्हें खासी दिलचस्पी है, यही वजह है कि मध्यप्रदेश की पॉलिटिक्स को ये बहुत गहराई से जानते हैं।

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