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AI की तैयारी वाले टॉप-10 देशों में शामिल हुआ भारत, एक्सपर्ट्स में दूसरे नंबर पर

AI In India: खुदरा और थोक व्यापार जीडीपी का 10 प्रतिशत हिस्सा है, जहां एआई सार्वजनिक वितरण और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन को सुव्यवस्थित कर सकता है, जिससे नुकसान कम होता है। वहीं सार्वजनिक सेवाएं जीडीपी का 6 प्रतिशत हिस्सा हैं, जो एआई सेवा वितरण और आपातकालीन प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने के अवसर देता है।

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AI In India (Image Source: iStockphoto)

Top 10 Countries Prepared For AI: एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की तैयारी में टॉप दस देशों में भारत भी शामिल है, और देश में एआई के माध्यम से सार्वजनिक क्षेत्र में परिवर्तन की अपार संभावनाएं दिखाई दे रही है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) की 73 अर्थव्यवस्थाओं के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट से पता चला है कि भारत एआई एक्सपर्ट्स में दुनिया भर में दूसरे स्थान पर है और एआई से संबंधित पेटेंट में मजबूत आधार के साथ रिसर्च पब्लिशर्स में तीसरे स्थान पर है।

टॉप-10 में भारत

दूसरी ओर, अध्ययन की गई 70 प्रतिशत से अधिक अर्थव्यवस्थाएं इकोसिस्टम भागीदारी, कौशल और अनुसंधान एवं विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में औसत से नीचे स्कोर करती हैं। बीसीजी के टेक्नोलॉजी और डिजिटल एडवांटेज प्रैक्टिस के इंडिया लीडर, सैबल चक्रवर्ती ने कहा, "एआई के क्षेत्र में भारत की अग्रणी भूमिका कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसे उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी को एकीकृत करने पर देश के जोर को रेखांकित करती है। एआई की तैयारी में शीर्ष 10 देशों में से एक के रूप में भारत में एआई के माध्यम से सार्वजनिक क्षेत्र में बदलाव की अपार संभावनाएं हैं।''

एआई विशेषज्ञों में दूसरे नंबर पर

भारत में बीसीजी के सार्वजनिक क्षेत्र अभ्यास का नेतृत्व करने वाले मारियो गोंसाल्वेस ने कहा, "एआई विशेषज्ञों में भारत विश्व स्तर पर दूसरे स्थान पर है और एआई से संबंधित पेटेंट में मजबूत आधार के साथ अनुसंधान प्रकाशनों में यह तीसरे स्थान पर है।" रिपोर्ट ने आगे दिखाया कि एआई एक्सपोजर भारत में कई प्रमुख क्षेत्रों में फैला हुआ है। व्यावसायिक सेवाएं सकल घरेलू उत्पाद का 16 प्रतिशत हिस्सा हैं और सरकारी संचालन के लिए प्रशासनिक दक्षता में संभावित सुधार के साथ महत्वपूर्ण एआई एक्सपोजर है।

AI और भारत

खुदरा और थोक व्यापार जीडीपी का 10 प्रतिशत हिस्सा है, जहां एआई सार्वजनिक वितरण और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन को सुव्यवस्थित कर सकता है, जिससे नुकसान कम होता है। वहीं सार्वजनिक सेवाएं जीडीपी का 6 प्रतिशत हिस्सा हैं, जो एआई सेवा वितरण और आपातकालीन प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने के अवसर देता है। कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन सकल घरेलू उत्पाद में 17 प्रतिशत का योगदान देता है। उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए सटीक खेती और जोखिम मूल्यांकन में एआई का उपयोग कर सकते हैं।

सकल घरेलू उत्पाद के 8 प्रतिशत के साथ निर्माण क्षेत्र बुनियादी ढांचे की योजना और संपत्ति के रखरखाव के लिए एआई का उपयोग कर सकता है। कला मनोरंजन और व्यक्तिगत सेवाएं भी 8 प्रतिशत के साथ सार्वजनिक सुविधाओं के प्रबंधन में एआई से लाभान्वित हो सकती हैं।

चक्रवर्ती ने कहा, "इस संभावना को साकार करने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, एआई शोध क्षमताओं को बढ़ाना और कार्यबल प्रशिक्षण का विस्तार करना शामिल है। ग्रामीण क्षेत्रों में एआई शिक्षा का विस्तार करने और सार्वजनिक-निजी सहयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों के साथ-साथ अनुसंधान केंद्रों, क्लाउड क्षमताओं और डेटा प्रणालियों में निवेश महत्वपूर्ण है।"

रिपोर्ट में एआई के नैतिक उपयोग को संबोधित करने, पूर्वाग्रह को समझने और प्रौद्योगिकी को जिम्मेदारी से अपनाने को सुनिश्चित करने के लिए नियामक ढांचों की भी मांग की गई है।

इनपुट- आईएएनएस

Vishal Maithil
Vishal Mathelauthor

विशाल मैथिल टाइम्स नाऊ नवभारत में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर 2023 से जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता में 6+ वर्षों के अनुभव के साथ वह टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया, गैजेट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर गहरी समझ रखते हैं। वे ऑटोमोबाइल, बिजनेस, यूटिलिटी और हाइपरलोकल से लेकर एजुकेशन और इंटरनेशनल बीट्स पर भी काम कर चुके हैं। भोपाल से ताल्लुक रखने वाले विशाल ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मीडिया रिसर्च में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। रिसर्च के क्षेत्र में उनके कई पेपर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर, अमर उजाला, मासिक पत्रिका "संदेश" और सोशल मीडिया फर्म में भी काम किया है। टेक-यूटिलिटी और बिजनेस से जुड़ी खबरों को आसान और काम की भाषा में समझाना विशाल को खूब आता है। वो कोशिश करते हैं कि कम शब्दों में ज्यादा और साफ-सुथरी जानकारी मिल जाए। किताबें पढ़ना और संगीत सुनना उनका पसंदीदा काम है। आप इनसे Vishal.mathel@timesgroup.com पर संपर्क कर सकते हैं।

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