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भारत में एक मोबाइल टावर से टेलीकॉम कंपनी को कितनी कमाई होती है? यहां जानें पूरा गणित

एक बात समझना जरूरी है कि टावर का मालिक होना और टेलीकॉम कंपनी होना दो अलग-अलग चीजें हैं। कई बार टावर किसी दूसरी कंपनी का होता है और मोबाइल नेटवर्क चलाने वाली कंपनी उस टावर का इस्तेमाल करने के लिए किराया देती है।

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मोबाइल टावर की कमाई में लोकेशन का भी बहुत बड़ा योगदान होता है।

आज के समय में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का एक जरूरी हिस्सा बन गया है। हम फोन से बात करते हैं, इंटरनेट चलाते हैं, वीडियो देखते हैं और ऑनलाइन पेमेंट भी करते हैं। इन सभी कामों को सही तरीके से करने में मोबाइल टावर की बड़ी भूमिका होती है। आपने अपने आसपास कई मोबाइल टावर देखे होंगे। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक मोबाइल टावर से टेलीकॉम कंपनी कितनी कमाई करती है? क्या एक टावर से हर महीने हजारों रुपये मिलते हैं या लाखों रुपये? आइए, इसे आसान और सरल हिंदी भाषा में समझते हैं।

एक मोबाइल टावर से कितनी कमाई होती है?

भारत में एक मोबाइल टावर से होने वाली कमाई का कोई एक निश्चित आंकड़ा नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि टावर किस जगह लगा है, उस पर कितनी टेलीकॉम कंपनियों के उपकरण लगे हैं और वहां मोबाइल नेटवर्क की कितनी मांग है। अगर किसी टावर पर एक ही कंपनी के उपकरण लगे हैं, तो उससे होने वाली कमाई अलग होगी। वहीं, अगर एक ही टावर पर दो या तीन कंपनियां अपने नेटवर्क के उपकरण लगाती हैं, तो उस टावर से होने वाली कुल कमाई काफी बढ़ सकती है।

यहां एक बात समझना जरूरी है कि टावर का मालिक होना और टेलीकॉम कंपनी होना दो अलग-अलग चीजें हैं। कई बार टावर किसी दूसरी कंपनी का होता है और मोबाइल नेटवर्क चलाने वाली कंपनी उस टावर का इस्तेमाल करने के लिए किराया देती है।

एक टावर से हर महीने कितने रुपये मिलते हैं?

भारत में मोबाइल टावर से होने वाली कमाई को समझने के लिए टावर कंपनियों के आंकड़े देखना जरूरी है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान उपलब्ध उद्योग संबंधी आंकड़ों के अनुसार, टावर कंपनियों को किराये से औसतन लगभग 69,000 रुपये प्रति टावर प्रति माह की आय हुई। हालांकि, यह एक औसत आंकड़ा है। हर टावर से इतनी ही कमाई हो, यह जरूरी नहीं है।

उदाहरण के लिए, किसी टावर पर अगर एक ही टेलीकॉम कंपनी के उपकरण लगे हैं, तो उसकी कमाई कम हो सकती है। लेकिन अगर उसी टावर पर कई कंपनियां अपने डिवाइस लगाती हैं, तो टावर कंपनी की कुल कमाई बढ़ सकती है। बड़े शहरों में ज्यादा नेटवर्क की जरूरत और ग्रामीण इलाकों में कम मांग के कारण भी कमाई में अंतर हो सकता है।

क्या टावर की पूरी कमाई टेलीकॉम कंपनी को मिलती है

नहीं, यह बात समझना बहुत जरूरी है। मोबाइल टावर से होने वाली कमाई और मोबाइल नेटवर्क चलाने वाली कंपनी की कमाई अलग-अलग होती है। भारत में कई कंपनियां मोबाइल टावर बनाती हैं और दूसरी टेलीकॉम कंपनियों को किराये पर देती हैं। उदाहरण के लिए, Indus Towers जैसी कंपनियां टावर और उससे जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं।

वहीं, Jio और Airtel जैसी कंपनियां अपने ग्राहकों को कॉलिंग और इंटरनेट की सेवाएं देती हैं। ये कंपनियां अपने नेटवर्क के लिए टावर का इस्तेमाल कर सकती हैं और इसके बदले टावर कंपनी को भुगतान करती हैं।

कमाई किन बातों पर निर्भर करती है?

मोबाइल टावर से होने वाली कमाई कई चीजों पर निर्भर करती है। सबसे पहली बात है टावर की लोकेशन। शहरों, बाजारों और ज्यादा आबादी वाले इलाकों में नेटवर्क की मांग अधिक हो सकती है। दूसरी बात है टावर पर लगी टेलीकॉम कंपनियों की संख्या। जितनी अधिक कंपनियां टावर की सुविधाओं का इस्तेमाल करेंगी, टावर कंपनी की कमाई उतनी बढ़ सकती है।

इसके अलावा, टावर पर लगे उपकरणों की संख्या, 4G और 5G नेटवर्क की जरूरत, बिजली का खर्च, रखरखाव और टावर के मालिक के साथ हुआ समझौता भी कमाई को प्रभावित करते हैं। इसलिए गांव में लगे एक टावर और किसी बड़े शहर में लगे टावर की कमाई एक जैसी नहीं होती।

क्या टावर की पूरी कमाई मुनाफा ही होती है?

इस सवाल का जवाब है नहीं, टावर से मिलने वाली पूरी रकम मुनाफा नहीं होती। टावर को चलाने के लिए बिजली, बैटरी, उपकरणों की मरम्मत, सुरक्षा, जमीन का किराया और अन्य खर्च भी होते हैं। इन खर्चों को कमाई में से निकालने के बाद ही पता चलता है कि वास्तव में कितना मुनाफा हुआ।

अगर कोई टावर कंपनी एक महीने में 70,000 रुपये कमाती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसके पास पूरे 70,000 रुपये बच जाएंगे। उसका असली मुनाफा इस बात पर निर्भर करेगा कि टावर को चलाने में कितना खर्च हुआ है और कंपनी पर दूसरे कितने खर्च या कर्ज हैं।

क्या एक टावर से साल में लाखों रुपये की कमाई हो सकती है?

हां, एक मोबाइल टावर से साल में लाखों रुपये की कुल आय हो सकती है। उदाहरण के लिए, अगर किसी टावर से हर महीने औसतन 50,000 रुपये की आय होती है, तो एक साल में उसकी कुल आय 6 लाख रुपये होगी। अगर मासिक आय 70,000 रुपये है, तो सालाना आय 8.4 लाख रुपये होगी।

ध्यान रखें कि ये केवल समझाने के लिए दिए गए उदाहरण हैं, किसी खास टावर की कमाई की गारंटी नहीं। असली आय टावर की जगह, किराये के समझौते, उस पर मौजूद कंपनियों और परिचालन खर्चों के हिसाब से अलग-अलग होगी। आपको बता दें कि फिलहाल भारत में एक मोबाइल टावर से होने वाली कमाई का कोई निश्चित आंकड़ा नहीं है।

Gaurav Tiwari
गौरव तिवारीauthor

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से बदलती जानकारियो को सरल और समझने योग्य भाषा में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। वह गैजेट रिव्यू, टेलिकॉम अपडेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, टिप्स एंड ट्रिक्स, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण खबरों पर लगातार काम करते हैं। गौरव अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। उनकी स्टोरीज न सिर्फ टेक-सेवी पाठकों के लिए उपयोगी होती हैं, बल्कि आम यूजर्स को भी नई तकनीक समझने और अपनाने में मदद करती हैं।

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