Satellite communication services: दूरसंचार विभाग ने सोमवार को कड़े सुरक्षा मानदंड जारी करते हुए सैटेलाइट संचार सेवाओं के कानूनी 'इंटरसेप्शन' को अनिवार्य कर दिया। इसके अलावा संचार कंपनियां किसी भी रूप में देश की सीमा के बाहर स्थित किसी भी टर्मिनल या सर्विस के साथ यूजर्स के कनेक्शन को नहीं जोड़ सकेंगी। विदेशों में उपभोक्ताओं के डेटा प्रोसेसिंग पर भी रोक लगा दी गई है।
सुरक्षा नियमों के तहत सेवा प्रदाताओं को देश में अपनी स्थापना के कुछ वर्षों के भीतर सैटेलाइट नेटवर्क के अपने जमीनी उपकरणों तथा सुविधाओं के कम से कम 20 प्रतिशत हिस्से को स्वदेशी बनाना होगा। दूरसंचार विभाग का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरकार पहली बार आम जनता के लिए सैटेलाइट संचार सेवा खोलने की तैयारी कर रही है। इस सेवा को आपराधिक तत्वों, खासकर आतंकवादियों द्वारा किसी भी दुरुपयोग से बचने के लिए उपाय करने की जरूरत है।
Starlink भी रेस में शामिल
एलन मस्क के नेतृत्व वाली स्टारलिंक, भारती समूह समर्थित वनवेब और जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस जैसी प्रमुख कंपनियां भारत में सैटेलाइट संचार सेवाएं प्रदान करने की दौड़ में हैं। ताजा निर्देश के अनुसार, उपग्रह संचार सेवा लाइसेंस धारक को भारत में विशिष्ट गेटवे तथा केंद्रों के लिए सुरक्षा मंजूरी लेनी होगी।
नियमों के अनुसार सैटेलाइट संचार कंपनियों को भारत में परिचालन शुरू करने से पहले दूरसंचार विभाग (डीओटी) या उसके अधिकृत प्रतिनिधियों को निगरानी सहित सुरक्षा पहलुओं के संबंध में पूरी जानकारी देनी होगी।
इनपुट-भाषा
