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दिलचस्प है X-ray की खोज, एक रोशनी से हुआ था मेडिकल इतिहास में बड़ा कमाल

एक्स-रे लाइट के जैसी विद्युत चुम्बकीय तरंगें हैं, लेकिन इनकी वेवलेंग्थ 1,000 गुना कम होती हैं। रॉन्टगन ने जल्द ही हड्डियों में अवशोषित होने के दौरान मांस में घुसने की इन रेज (किरणों) की खास क्षमता को कैच कर लिया, जिससे इन्हें मेडिकल फील्ड में चमत्कार के रूप में फौरन पहचान मिल गई।

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एक्स-रे आविष्कार की कहानी

Photo : iStock
KEY HIGHLIGHTS
  • विल्हेम कॉनराड रॉन्टगन ने की थी एक्स-रे की खोज
  • एक रोशनी से हुई थी एक्स-रे की खोज
  • रॉन्टगन ने एक्स-रे को पेटेंट नहीं किया था

X-Ray Invention Story : फिजिसिस्ट विल्हेम कॉनराड रॉन्टगन ( Wilhelm Conrad Röntgen) ने एक्स-रे (X-Ray) की खोज के साथ मेडिकल इतिहास की सबसे अहम सफलताओं में से एक को हासिल किया था। कैथोड लाइट्स के काँच में प्रवेश करने की एबिलिटी के साथ एक्सपेरीमेंट करते समय, रॉन्टगन ने पास की स्क्रीन से निकलने वाली एक अस्पष्ट चमक देखी। उससे आकर्षित होकर उन्होंने इस रहस्यमयी लाइट का नाम "एक्स-रे" (X-Ray) रखा।

क्या होती हैं एक्स-रेज (X-Rays)

एक्स-रे लाइट के जैसी विद्युत चुम्बकीय तरंगें (Electromagnetic Waves) हैं, लेकिन इनकी वेवलेंग्थ 1,000 गुना कम होती हैं। रॉन्टगन ने जल्द ही हड्डियों में अवशोषित होने के दौरान मांस में घुसने की इन रेज (किरणों) की खास क्षमता को कैच कर लिया, जिससे इन्हें मेडिकल फील्ड में चमत्कार के रूप में फौरन पहचान मिल गई।

रेडिएशन (Radiation) के नुकसान की पहचान नहीं हो पाई जल्दी

एक्स-रे की अहमियत को फौरन पहचान लिया गया, लेकिन शुरुआत में रेडिएशन (Radiation) के हानिकारक प्रभावों को नहीं समझा गया। मगर कुछ समय बाद एक्स-रे इक्विपमेंट चलाने वाले ऑपरेटर कैंसर जैसी बीमारियों में पड़ने लगे। रेडिएशन ने अपना काम करना शुरू कर दिया था।

युद्ध में एक्स-रे का इस्तेमाल

Historic Vids के अनुसार बाल्कन युद्ध (Balkan War) के दौरान, गोलियों का पता लगाने और फ्रैक्चर की पहचान करने के लिए एक्स-रे को पहली बार लड़ाई के दौरान इस्तेमाल किया गया। अपनी इस जबरदस्त खोज के लिए विल्हेम कॉनराड रॉन्टगन को 1901 में भौतिकी में पहले नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

खास बात यह है कि रॉन्टगन ने अपने व्यक्तिगत पायदे के लिए एक्स-रे को पेटेंट नहीं करने का फैसला किया और अपनी इस उपलब्धि के लिए विनम्र बने रहे।

रेडिएशन का असर

रेडिएशन के कुछ लेवल से मानव शरीर को नुकसान हो सकता है और अगर इसका लेवल हाई हो तो ये घातक साबित हो सकता है।

Kashid Hussain
काशिद हुसैन author

<p>काशिद हुसैन अप्रैल 2023 से Timesnowhindi.Com (टाइम्स नाउ नवभारत) के साथ काम कर रहे हैं। यहां पर वे सीनियर कॉरेस्पोंडेंट हैं। टाइम्स नाउ नवभारत की बिजनेस टीम में वह शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड और आर्थिक जगत से जुड़ी सभी तरह की स्टोरी और वेब स्टोरी करते हैं। रिसर्च आधारित स्टोरी के लिए नए एंगल तलाश करना और रीडर्स की रुचि के अनुसार कॉपी लिखने पर फोकस रहता है। शेयर बाजार में खास रुचि है और इससे जुड़ी रियल टाइम खबरें कम समय में लगाने में विशेषज्ञता है। मीडिया में काम करने का 8 वर्षों का अनुभव है, जिसमें गुडरिटर्न्स और शेयर मंथन वेबसाइटों के अलावा निवेश मंथन पत्रिका में भी काम किया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी पत्रकारिता में ग्रेजुएशन के बाद आईआईएमसी, नई दिल्ली से रेडियो एंव टेलीविजन में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। ग्रेजुएशन के दौरान सहारा समय और सिटी न्यूज में इंटर्नशिप के साथ-साथ अखबार और वेबसाइट के लिए लिखना शुरू कर दिया था। काशिद को किताबें पढ़ना, फिल्में देखना और क्रिकेट में रुचि है। बिजनेस के अलावा खेल जगत और इंटरनेशनल खबरों में भी रुचि है।<br></p>

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