ET NOW GBS 2026: डिजिटल हाईवे ने बदली अर्थव्यवस्था की तस्वीर, 12 साल में 1 GB डेटा की कीमत 287 से घटकर हो गई 9 रुपए, बोले ज्योतिरादित्य सिंधिया
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Feb 14, 2026, 01:42 PM IST
ET NOW GBS 2026: नई दिल्ली के होटल ताज पैलेस में आयोजित ET NOW Global Business Summit 2026 में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि पिछले दस सालों में भारत की डिजिटल यात्रा सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि एक व्यापक संरचनात्मक क्रांति रही है। इस डिजिटल बदलाव ने भारत को आर्थिक मजबूती, वैश्विक प्रभाव और तकनीकी नेतृत्व में अग्रणी बनाया है।
ET NOW Global Business Summit 2026 में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया
ET NOW GBS 2026: नई दिल्ली के होटल ताज पैलेस में आयोजित ET NOW Global Business Summit 2026 में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत की डिजिटल यात्रा केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़ी संरचनात्मक क्रांति रही है। उन्होंने बताया कि इस बदलाव ने भारत को आर्थिक मजबूती, वैश्विक प्रभाव और तकनीकी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाया है। इस समिट की थीम “A Decade of Disruption. A Century of Change” है।
डिजिटल हाईवे ने बदली अर्थव्यवस्था की तस्वीर
सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने एक अदृश्य डिजिटल हाईवे तैयार किया है। यह डिजिटल बुनियादी ढांचा आज व्यापार, कारोबार और पूरी अर्थव्यवस्था को शक्ति दे रहा है। उन्होंने बताया कि करीब एक दशक पहले देश में केवल 6 करोड़ ब्रॉडबैंड उपभोक्ता थे, जो अब बढ़कर 100 करोड़ हो गए हैं। डेटा की कीमतों में भी भारी गिरावट आई है। करीब 12 साल पहले 1 जीबी डेटा की कीमत 287 रुपये थी, जो अब घटकर करीब 9 रुपये रह गई है। उन्होंने कहा कि भारत में डेटा की कीमत दुनिया के औसत का सिर्फ 5 प्रतिशत है। जहां वैश्विक औसत करीब 2.49 डॉलर प्रति जीबी है, वहीं भारत में यह करीब 11 सेंट है। उनके अनुसार, सस्ता डेटा आज भारत की अर्थव्यवस्था की नींव बन चुका है।
डिजिटल पेमेंट में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी
डिजिटल लेनदेन के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए स्किंडिया ने कहा कि आज दुनिया के कुल डिजिटल ट्रांजैक्शनों में भारत की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत है। Unified Payments Interface (यूपीआई) हर महीने करीब 20 अरब लेनदेन प्रोसेस करता है, जो सालाना करीब 250 अरब ट्रांजैक्शन होते हैं। इनका कुल मूल्य लगभग 4.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है। उन्होंने कहा कि भारत केवल अपनी अर्थव्यवस्था को नहीं चला रहा, बल्कि अपनी डिजिटल व्यवस्था के जरिए वैश्विक व्यापार को भी नई दिशा दे रहा है। आज भारत की डिजिटल कनेक्टिविटी 190 देशों तक पहुंच चुकी है।
टेलीकॉम में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने शुरुआती कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि वर्ष 2007 में जब वे टेलीकॉम विभाग से जुड़े थे, तब भारत 4G तकनीक में दुनिया से पीछे था। लेकिन 5G के मामले में भारत ने दुनिया के साथ कदम मिलाया और अब 6G में नेतृत्व करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने बताया कि एक महत्वपूर्ण फैसला यह था कि भारत ने केवल विदेशी कंपनियों जैसे Nokia, Ericsson, Huawei, ZTE और Samsung पर निर्भर रहने के बजाय अपना घरेलू टेलीकॉम स्टैक तैयार किया। सरकारी कंपनी Bharat Sanchar Nigam Limited (बीएसएनएल) ने अपने रेडियो एक्सेस नेटवर्क, कोर सॉफ्टवेयर और बेस ट्रांससीवर स्टेशन खुद विकसित करने का रास्ता चुना।
एक कंसोर्टियम जिसमें Centre for Development of Telematics (सी-डॉट), Tejas Networks और Tata Consultancy Services शामिल थे, ने 19 महीनों में स्वदेशी 4G स्टैक तैयार किया। पिछले साल सितंबर में प्रधानमंत्री ने इस स्वदेशी तकनीक पर आधारित 1 लाख टावरों का उद्घाटन किया। सिंधिया ने कहा कि इस उपलब्धि के साथ भारत उन पांच देशों में शामिल हो गया है जो अपना 4G स्टैक विकसित कर सकते हैं।
5G का सबसे तेज रोलआउट
5G सेवा के विस्तार पर बोलते हुए सिंधिया ने कहा कि भारत ने दुनिया में सबसे तेज 5G रोलआउट किया। सिर्फ 22 महीनों में करीब 5 लाख टावर लगाए गए और इसके लिए घरेलू टेलीकॉम कंपनियों ने लगभग 4.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया। आज देश के 99.9 प्रतिशत जिलों में 5G कवरेज पहुंच चुकी है। केवल एक जिला भौगोलिक कठिनाइयों के कारण अभी जुड़ना बाकी है। भारत के 120 करोड़ मोबाइल उपभोक्ताओं में से 40 करोड़ यानी करीब 35 प्रतिशत लोग 5G सेवा का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि 2030 तक यह संख्या 100 करोड़ तक पहुंच सकती है।
6G मानकों में भारत की भागीदारी
भविष्य की तकनीक 6G को लेकर सिंधिया ने कहा कि पहली बार भारत वैश्विक मानक तय करने वाली संस्थाओं जैसे 3rd Generation Partnership Project (3GPP) और International Telecommunication Union (आईटीयू) में सक्रिय भागीदारी कर रहा है। साल 2023 में गठित Bharat 6G Alliance में शुरुआत में 18 सदस्य थे, जो अब बढ़कर 100 हो चुके हैं। इसमें स्टार्टअप, टेक कंपनियां, टेलीकॉम ऑपरेटर और सरकारी संस्थाएं शामिल हैं। इस गठबंधन का लक्ष्य है कि 6G के अंतिम मानकों में भारत की 10 प्रतिशत वैश्विक पेटेंट हिस्सेदारी हो। सिंधिया ने कहा कि भारत अब डिजिटल डिवाइड को डिजिटल डिविडेंड में बदलने की दिशा में काम कर रहा है। उनका मानना है कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीक का निर्माता और वैश्विक मानक तय करने वाला देश बनने की ओर अग्रसर है।
