Budget 2026: क्लाउड कंपनियों को 2047 तक नहीं देना होगा टैक्स, करोड़ों इंटरनेट यूजर्स पर पड़ेगा असर
- Authored by: Pradeep Pandey
- Updated Feb 1, 2026, 03:02 PM IST
यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब भारत वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े डेटा सेंटर निवेशों में से कुछ का गवाह बन रहा है। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) जैसी क्लाउड दिग्गज कंपनियों ने अकेले 2025 में ही भारत में करीब 40 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है।
20-Year Tax Holiday To Foreign Cloud Firms
भारत को वैश्विक डेटा सेंटर हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। बजट 2026 के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए 20 वर्षों की टैक्स हॉलीडे योजना का ऐलान किया। इस फैसले का मकसद लंबी अवधि के निवेश को आकर्षित करना और देश के तेजी से बढ़ते डेटा सेंटर इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
2047 तक टैक्स हॉलीडे का मिलेगा लाभ
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि भारत में स्थित डेटा सेंटर के जरिए दुनियाभर के ग्राहकों को क्लाउड सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियां वर्ष 2047 तक टैक्स छूट की पात्र होंगी, हालांकि ऐसी कंपनियों को भारतीय ग्राहकों को सेवाएं देने के लिए भारत में रजिस्टर्ड किसी स्थानीय रिसेलर के माध्यम से काम करना होगा।
सेफ हार्बर नियम से बढ़ेगी टैक्स स्पष्टता
सरकार ने इससे जुड़े एक और अहम प्रावधान के तहत 15 फीसदी का सेफ हार्बर नियम भी प्रस्तावित किया है। यह नियम उन मामलों में लागू होगा, जहां विदेशी क्लाउड कंपनी की किसी संबंधित इकाई द्वारा डेटा सेंटर सेवाएं प्रदान की जाती हैं। इससे कंपनियों को टैक्स को लेकर स्पष्टता मिलेगी और भारत में ऑपरेशंस को अधिक कुशल तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
भारत में तेजी से बढ़ रहा डेटा सेंटर सेक्टर
यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब भारत वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े डेटा सेंटर निवेशों में से कुछ का गवाह बन रहा है। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) जैसी क्लाउड दिग्गज कंपनियों ने अकेले 2025 में ही भारत में करीब 40 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है।
AI और डेटा कानून से बढ़ेगी मांग
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग और क्षेत्रीय डेटा संरक्षण कानूनों के चलते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसके परिणामस्वरूप भारत के डेटा सेंटर उद्योग में निवेश की नई लहर देखने को मिल रही है।
घरेलू और वैश्विक कंपनियों का बड़ा निवेश प्लान
वैश्विक हाइपरस्केलर्स के साथ-साथ रिलायंस, अडानी, टाटा और एलएंडटी जैसे भारतीय समूह भी अगले 5 से 7 वर्षों में डेटा सेंटर सेक्टर में 70 अरब डॉलर से अधिक का निवेश करने की तैयारी में हैं। इससे देश की कुल डेटा सेंटर क्षमता मौजूदा एक गीगावॉट से बढ़कर करीब 9 गीगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है।
डेटा खपत में जबरदस्त उछाल
भारत में डेटा खपत भी बीते कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2017 में जहां डेटा उपयोग करीब 8 एक्साबाइट था, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 229 एक्साबाइट तक पहुंच गया। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, डिजिटल पेमेंट्स, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारण रहे हैं।
वैश्विक डेटा सेंटर हब बनने की ओर भारत
सस्ती बिजली, तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और मजबूत इंजीनियरिंग टैलेंट के चलते भारत अब दुनिया के सबसे आकर्षक डेटा सेंटर गंतव्यों में उभर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा कानून और AI अपनाने की प्रक्रिया आने वाले वर्षों में भारत के डेटा सेंटर सेक्टर के लिए बड़े ग्रोथ ड्राइवर साबित होंगे।
करोड़ों इंटरनेट यूजर्स पर पड़ेगा असर
भारत सरकार के इस ऐलान का असर तत्काल तो नहीं, लेकिन लंबे समय बाद जरूर नजर आएगा। लोकल डाटा सेंटर होने से गेमिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और ओटीटी ऐप्स की स्पीड बेहतर होगी। मोबाइल और सिस्टम पर एआई का इस्तेमाल व्यापक तौर पर होगा। इसके अलावा हर कोई एआई का इस्तेमाल करने लगेगा। एआई का इस्तेमाल सस्ता भी हो सकता है।