टेक एंड गैजेट्स

ऑस्ट्रेलिया का बड़ा कदम, न्यूजरूम को फंड देने के लिए Google, Meta और TikTok पर टैक्स लगाने की तैयारी

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज(Anthony Albanese) ने कहा कि पत्रकारों के काम की एक तय कीमत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़ी विदेशी कंपनी को यह हक नहीं होना चाहिए कि वह पत्रकारों की बनाई सामग्री को बिना पैसे दिए इस्तेमाल करे।

Image

पत्रकारिता को आर्थिक मदद के लिए ऑस्ट्रेलिया सरकार ने उठाया बड़ा कदम। (फोटो क्रेडिट-iStock)

ऑस्ट्रेलिया सरकार की तरफ से एक नया प्रस्ताव दिया गया है, जिसमें Meta, Google और TikTok जैसी बड़ी डिजिटल कंपनियों से उनके कमाई का एक हिस्सा टैक्स के रूप में लेने की बात कही गई है। इस पैसे का इस्तेमाल न्यूज रिपोर्टरों को भुगतान करने के लिए किया जाएगा। सरकार ने मंगलवार को इस कानून का ड्राफ्ट जारी किया है और इसे 2 जुलाई तक संसद में पेश किया जा सकता है। इस कानून का मकसद यह है कि सोशल मीडिया कंपनियां न्यूज संस्थानों के साथ समझौता करें और पत्रकारिता को आर्थिक मदद दें।

इन प्लेटफॉर्म्स ने इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा कि यह एक तरह का 'डिजिटल सेवा टैक्स' है। उनका कहना है कि यह तेजी से बदल रहे विज्ञापन के काम को ठीक से नहीं समझता। उन्होंने यह भी कहा कि इससे लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ न्यूज सेक्टर बन पाना मुश्किल होगा।

प्रधानमंत्री ने कही ये बात

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज(Anthony Albanese) ने कहा कि पत्रकारों के काम की एक तय कीमत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़ी विदेशी कंपनी को यह हक नहीं होना चाहिए कि वह पत्रकारों की बनाई सामग्री को बिना पैसे दिए इस्तेमाल करे और उससे मुनाफा कमाए। उन्होंने आगे कहा कि पत्रकारिता में पैसा लगाना एक मजबूत और स्वस्थ लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी है।

यह ऑस्ट्रेलिया की दूसरी कोशिश है, जिसमें वह इन प्लेटफॉर्म्स से यह चाहता है कि वे अपने यूजर्स को दिखाए जाने वाले ऑस्ट्रेलियाई न्यूज के लेख और तस्वीरों के लिए पैसे दें।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बनाया गया था दबाव

2021 में बने एक कानून के जरिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर दबाव डाला गया था कि वे ऑस्ट्रेलियाई न्यूज कंपनियों के साथ समझौता करें और पत्रकारिता के लिए पैसे दें। इसी कानून के तहत ‘न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड’ बनाया गया था। इन प्लेटफॉर्म्स ने यह पसंद किया कि वे किसी जज से कीमत तय करवाने (मध्यस्थता) के बजाय सीधे न्यूज कंपनियों के साथ आपसी समझौते कर लें। लेकिन बाद में, इन कंपनियों ने अपनी सेवाओं से न्यूज कंटेंट हटाना शुरू कर दिया, ताकि उन्हें फिर से ऐसे समझौते करने से बचा जा सके।

प्रस्तावित ‘न्यूज बार्गेनिंग इंसेंटिव’ के तहत, जो बड़े प्लेटफॉर्म न्यूज कंपनियों के साथ समझौता नहीं करेंगे, उन्हें अपनी ऑस्ट्रेलिया में होने वाली कमाई का 2.25% टैक्स देना होगा। सरकार ने कहा है कि अगर ये प्लेटफॉर्म न्यूज कंपनियों को पत्रकारिता के लिए पैसे देने पर सहमत हो जाते हैं, तो उन्हें कुछ छूट दी जाएगी और उनका कुल खर्च कम हो जाएगा।

हर साल होगी लगभग इतनी कमाई

सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से हर साल करीब 200 से 250 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 144 से 179 मिलियन डॉलर) की कमाई होगी। यह रकम लगभग उतनी ही है, जितनी इन प्लेटफॉर्म्स ने न्यूज कंपनियों को उस समय दी थी, जब ‘न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड’ पूरी तरह लागू था।

यह भी पढ़ें- Credit Card रखने वालों की बड़ी टेंशन हुई खत्म, RBI के नए नियम ने दी बड़ी राहत

Gaurav Tiwari
गौरव तिवारीauthor

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से बदलती जानकारियो को सरल और समझने योग्य भाषा में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। वह गैजेट रिव्यू, टेलिकॉम अपडेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, टिप्स एंड ट्रिक्स, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण खबरों पर लगातार काम करते हैं। गौरव अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। उनकी स्टोरीज न सिर्फ टेक-सेवी पाठकों के लिए उपयोगी होती हैं, बल्कि आम यूजर्स को भी नई तकनीक समझने और अपनाने में मदद करती हैं।

और पढ़ें
End of Article