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Arratai: डाउनलोड में नंबर-1, लेकिन यूज कोई नहीं कर रहा! क्या Koo की रहा पर चला Zoho का मेड इन इंडिया ऐप?

Arratai ऐप की चर्चा पिछले एक महीने से खूब हो रही है। पूरा सोशल मीडिया Arratai से भरा पड़ा है। लोग एक-दूसरे से Arratai को इस्तेमाल करने के लिए अपील भी कर रहे हैं। इसका फायदा डाउनलोड्स में भी दिख रहा है लेकिन एक्टिव यूजर्स नहीं बढ़ रहे। यदि ऐसा ही रहा है तो Arratai को Koo बनने में देर नहीं लगेगी।

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Arratai app active users/Photo-Play Store

भारत में हाल ही में एक दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिला है। Zoho द्वारा लॉन्च किया गया Arratai ऐप डाउनलोड के मामले में एप-स्टोर पर भारत का नंबर-1 ऐप बन गया है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े डाउनलोड आंकड़ों के बावजूद लोग इस ऐप का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।

डाउनलोड तो हुआ, लेकिन इस्तेमाल नहीं

Arratai की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह कुछ ही दिनों में एप-स्टोर चार्ट के शीर्ष पर पहुंच गया, लेकिन डाउनलोड के बाद यूजर्स इसे ओपन या इस्तेमाल करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।

एक यूजर का कहना है, “मेरे फोन में करीब 2200 कॉन्टेक्ट सेव हैं, जिनमें से लगभग 150 लोगों ने Arratai को डाउनलोड किया है, लेकिन कोई भी इसका इस्तेमाल नहीं कर रहा।”

Zoho का देसी जवाब व्हाट्सएप को

Arratai को Zoho ने “Made in India” पहल के तहत लॉन्च किया है। इसे भारतीय मैसेजिंग ऐप्स की श्रेणी में WhatsApp के विकल्प के रूप में पेश किया गया। Zoho ने इसे एक सुरक्षित और डेटा-प्रोटेक्टेड प्लेटफॉर्म बताया है, जिसमें चैटिंग, मीडिया शेयरिंग और ग्रुप फीचर्स दिए गए हैं।

लोग एक्टिव क्यों नहीं हो रहे?

  • फ्रेंड बेस की कमी: अधिकतर यूजर्स के दोस्तों या परिवार के लोग इस ऐप पर सक्रिय नहीं हैं।
  • फीचर्स में नयापन नहीं: यूजर्स का कहना है कि यह व्हाट्सएप जैसा ही दिखता है, लेकिन कोई खास नया फीचर नहीं है।
  • नेटवर्क इफेक्ट की कमी: मैसेजिंग ऐप्स तभी सफल होते हैं जब अधिक लोग एक साथ जुड़ें, यह Arratai के साथ नहीं हो पाया।
  • पहचान और भरोसे की कमी: नए ऐप पर डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर यूजर्स अभी भी आशंकित हैं।
  • सिक्योरिटी: इस ऐप की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इसमें एंड टू एंड एंक्रिप्शन नहीं है जो कि किसी भी चैट ऐप के लिए बहुत जरूरी है।

फिलहाल क्या स्थिति है?

Arratai की डाउनलोड संख्या तो लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके सक्रिय यूजर्स बेहद कम हैं। यह स्थिति Zoho के लिए एक चुनौती है क्योंकि किसी भी मैसेजिंग ऐप की सफलता यूजर्स की एक्टिविटी पर निर्भर करती है, सिर्फ डाउनलोड पर नहीं, नहीं तो इसकी हालत भी कू और इंस्टाग्राम थ्रेड की तरह होने में देर नहीं लगेगी।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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