भारत की टेलीकॉम कंपनी Airtel ने अपने नए 5G “Priority Postpaid” प्लान को लेकर उठ रहे सवालों पर सफाई दी है। कंपनी ने दूरसंचार विभाग (DoT) को बताया कि उसकी यह सेवा पूरी तरह नेट न्यूट्रैलिटी नियमों के तहत काम करती है और इससे प्रीपेड यूजर्स की इंटरनेट स्पीड या नेटवर्क पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
क्या है Priority Postpaid सेवा?
Airtel ने 19 मई को “Priority Postpaid” फीचर लॉन्च किया था। इसमें 5G Network Slicing तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तकनीक की मदद से एक ही 5G नेटवर्क को अलग-अलग वर्चुअल नेटवर्क में बांटा जा सकता है, ताकि कुछ सेवाओं को बेहतर स्पीड और कम लेटेंसी मिल सके, हालांकि इस फीचर को लेकर कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि पोस्टपेड यूजर्स को ज्यादा बेहतर इंटरनेट देकर नेट न्यूट्रैलिटी नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।
Airtel ने क्या कहा?
Airtel ने साफ कहा कि उसकी सेवा में किसी भी वेबसाइट, एप या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को विशेष प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। कंपनी के मुताबिक न तो किसी कंटेंट को ब्लॉक किया जा रहा है और न ही इंटरनेट स्पीड कम की जा रही है।
कंपनी ने यह भी कहा कि उसका 5G नेटवर्क अभी पूरी क्षमता से काफी कम इस्तेमाल हो रहा है। Airtel के अनुसार, नेटवर्क उपयोग का पीक स्तर करीब 38 प्रतिशत तक ही पहुंचता है और पोस्टपेड ट्रैफिक केवल 4 प्रतिशत हिस्सा है। इसलिए प्रीपेड यूजर्स के अनुभव पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
83 हजार करोड़ रुपये का निवेश
Airtel ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में उसने नेटवर्क मजबूत करने और कवरेज बढ़ाने के लिए करीब 83 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया है। कंपनी ने यह भी कहा कि उसके कुल मोबाइल ग्राहकों में लगभग 92 प्रतिशत प्रीपेड यूजर्स हैं, जो कंपनी की कुल कमाई का करीब 88 प्रतिशत हिस्सा देते हैं। ऐसे में कंपनी प्रीपेड ग्राहकों की सेवा खराब करने का जोखिम नहीं उठा सकती।
दुनिया के कई देशों में इस्तेमाल हो रही तकनीक
कंपनी ने DoT को बताया कि 5G Network Slicing तकनीक दुनिया के कई देशों जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर और मलेशिया में पहले से इस्तेमाल की जा रही है। Airtel का कहना है कि अगर भारत में इस तकनीक को सीमित किया गया तो इससे देश के टेलीकॉम सेक्टर की भविष्य की तकनीकी प्रगति प्रभावित हो सकती है।
