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बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर हो सकता है बड़ा फैसला, बिहार सरकार कर रही है तैयारी

गृह विभाग का प्रभार भी संभाल रहे चौधरी ने कहा, "राज्य सरकार ने इस संबंध में बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निम्हांस) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। नाबालिगों के बीच स्क्रीन टाइम और ऑनलाइन गेमिंग बढ़ने पर नियंत्रण का मुद्दा गंभीर चिंता का विषय है।

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(AP Photo/Steven Senne, File)

बिहार सरकार बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ने और सोशल मीडिया मंचों के संपर्क में रहने से होने वाले दुष्प्रभावों पर नियंत्रण के लिए एक नीति तैयार कर रही है। यह जानकारी उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को विधानसभा में दी।

PTI/भाषा के मुताबिक गृह विभाग का प्रभार भी संभाल रहे चौधरी ने कहा, "राज्य सरकार ने इस संबंध में बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निम्हांस) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। नाबालिगों के बीच स्क्रीन टाइम और ऑनलाइन गेमिंग बढ़ने पर नियंत्रण का मुद्दा गंभीर चिंता का विषय है। यह बहु-क्षेत्रीय विषय है, जिसमें कई हितधारक शामिल हैं। निम्हांस की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद सभी संबंधित पक्षों की बैठक बुलाकर इस संबंध में नीति तैयार की जाएगी।"

यह मुद्दा प्रश्नकाल के दौरान जनता दल यूनाइटेड (जदयू) विधायक समृद्ध वर्मा ने उठाया। उन्होंने कहा, "यह एक अदृश्य महामारी है, जो बिहार के भविष्य की जड़ों को कमजोर कर रही है। आकर्षक खिलौने और किताबों की जगह अब लंबे समय तक स्क्रीन पर स्क्रॉलिंग ने ले ली है, जो बच्चों का ध्यान लगातार बांधे रखता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भी इसे चेतावनी के रूप में उद्धृत किया गया है और इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट के रूप में मान्यता दी गई है।"

वर्मा ने कहा, "डोपामाइन किस तरह मानसिक नियंत्रण को प्रभावित करता है और वास्तविक जीवन को नीरस बना देता है, यह सभी जानते हैं। इससे नाबालिगों में व्यवहारगत परिवर्तन और एकाग्रता में कमी देखी जा रही है। बिहार में इंटरनेट की पहुंच व्यापक है, लेकिन उससे निपटने के लिए डिजिटल साक्षरता का स्तर कम है। हम बच्चों को एआई सिखा रहे हैं, लेकिन उसकी विषाक्तता से बचाव का उपाय कहां है?"

उन्होंने राज्य सरकार से सभी सरकारी विद्यालयों में ’डिजिटल हाइजीन’ को अनिवार्य पाठ के रूप में शामिल करने का आग्रह किया। साथ ही, प्रत्येक जिला अस्पताल में ’लत परामर्श केंद्र’ (एडिक्शन काउंसिलिंग सेंटर) स्थापित करने और ग्रामीण माताओं को ’स्क्रीन टाइम प्रबंधन’ के बारे में जागरूक करने के लिए जीविका दीदी नेटवर्क का उपयोग करने का सुझाव दिया। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा, "विभाग ने निम्हांस, बेंगलुरु से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद इस विषय पर निश्चित रूप से नीति बनाई जाएगी।"

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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