दुनिया बहुत तेजी से डिजिटल हो रही है। अब अगली बड़ी छलांग 6G तकनीक है। हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू-आर) ने M.2160 नाम की रिपोर्ट जारी की है। इसमें बताया गया है कि 2030 तक 6G तकनीक कैसी होगी और इसका इस्तेमाल कहां-कहां होगा। जहां यह समझा जा सकता है कि
6G, 5G से कई गुना बेहतर होगा। इसमें इंटरनेट की स्पीड बहुत ज्यादा होगी, वीडियो या गेमिंग में जरा भी रुकावट नहीं आएगी, और मशीनें भी आपस में ज्यादा स्मार्ट तरीके से जुड़ेंगी। साथ ही यह तकनीक जमीन से लेकर सैटेलाइट तक हर जगह बिना टूटे नेटवर्क देगी।
भारत का 6G विजन
भारत सरकार ने मार्च 2023 में भारत 6G विज़न दस्तावेज़ जारी किया। इसका मकसद है कि 2030 तक भारत इस तकनीक में दुनिया का नेता बने। यानी भारत सिर्फ 6G का इस्तेमाल ही नहीं करेगा, बल्कि इसे बनाने और दुनिया को देने में भी आगे रहेगा।
सरकार की बड़ी पहलें
भारत तेजी से 6G टेक्नोलॉजी की तरफ बढ़ रहा है। 6G की तैयारी को लेकर भारत ने कई सारे बड़े कदम भी उठाए हैं जो इस उपलब्धी को पाने में मददगार साबित होने वाली हैं।
100 लैब्स की स्थापना: देशभर के कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज़ में 5G और 6G पर रिसर्च करने के लिए प्रयोगशालाएँ खोली गई हैं।
टीटीडीएफ योजना: यह योजना 2022 में शुरू हुई थी। अब तक 275 करोड़ रुपये से ज्यादा की 100 से अधिक परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इससे रिसर्च और स्टार्टअप्स को मदद मिल रही है।
भारत 6G एलायंस: इसमें उद्योग, रिसर्च संस्थान और विश्वविद्यालय मिलकर काम कर रहे हैं। यह गठबंधन दुनिया के दूसरे देशों के साथ मिलकर भी 6G पर काम कर रहा है।
टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब: आईआईआईटी बैंगलोर में बना यह हब नई तकनीकों पर रिसर्च कर रहा है, जैसे – स्मार्ट नेटवर्क, तेज़ एंटेना सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नेटवर्क।
6G से क्या बदलेगा?
6G सिर्फ इंटरनेट या फिर टेक्नोलॉजी का अपग्रेडेशन मात्र नहीं है। 6G इंटरनेट टेक्नोलॉजी दुनियाभर के करोड़ों लोगों पर सीधा असर डालेगी। इसकी मदद से AI, VR, आटोनॉमस गाड़ियों और स्मार्ट शहरों को कई अधिक तरीके से बेहतर बनाया जा सकेगा। यह टेक्नोलॉजी मानव, मशीन और हमारे पर्यावरण के बीच में एक पुल की तरह काम करेगा।
6G सिर्फ इंटरनेट स्पीड बढ़ाने के लिए नहीं है। इसके आने से – पढ़ाई और ऑनलाइन शिक्षा और आसान होगी। इसकी मदद से डॉक्टर किसी दूर स्थान में मौजूद मरीज का इलाज कर सकेंगे। फैक्ट्री और उद्योगों में मशीनें और स्मार्ट तरीके से काम करेंगी। इसकी मदद से ट्रैफिक सिस्टम को और भी बेहतर बनाया जा सकेगा।
भारत की यह तैयारी दिखाती है कि आने वाले समय में देश सिर्फ मोबाइल इस्तेमाल करने वाला उपभोक्ता नहीं रहेगा, बल्कि नई तकनीक बनाने वाला वैश्विक लीडर बनेगा।
