बीजेपी नेता बबीता फोगाट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया, जिसमें भारतीय पहलवान विनेश फोगाट को 30 और 31 मई को होने वाले एशियन गेम्स 2026 के सिलेक्शन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की इजाजत दी गई है। दिल्ली हाईकोर्ट का यह आदेश तब आया, जब भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने विनेश को 26 जून तक घरेलू प्रतियोगिताओं के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। खुद एक पूर्व पहलवान रहीं बबीता ने कहा कि कोर्ट का यह फैसला सही है।
अदालत ने फोगाट की उस अपील पर यह आदेश दिया, जिसमें उन्होंने 18 मई के एकल-न्यायाधीश पीठ के आदेश को चुनौती दी थी। उस आदेश में, उन्हें चयन ट्रायल में हिस्सा लेने के मामले में तुरंत कोई राहत नहीं दी गई थी। अपने आदेश में, अदालत ने कहा कि चूंकि चयन नीति और 'कारण बताओ नोटिस' (SCN) की जांच अभी एकल-न्यायाधीश पीठ द्वारा की जा रही है, इसलिए यह बहुत ज़रूरी है कि इस स्तर पर याचिका को बेकार न होने दिया जाए। ऐसा करने के लिए, फोगाट को एशियाई खेलों के ट्रायल में हिस्सा लेने से नहीं रोका जाना चाहिए।
बबीता ने जताई खुशी
न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, बबीता ने कहा, 'मैं कोर्ट के फैसले को मानती हूं और कोर्ट का फैसला सही है। मामला चाहे जो भी हो, कोर्ट अपना फैसला पहले ही सुना चुका है। कोर्ट से बड़ा कुछ नहीं है, इसलिए हमें कोर्ट के फैसले का स्वागत करना चाहिए और कोर्ट का शुक्रिया अदा करना चाहिए।' शनिवार को, दिल्लीहाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि विनेश को सिलेक्शन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की इजाजत दी जाए। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि ट्रायल्स की वीडियोग्राफी की जाए और उन पर भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के स्वतंत्र पर्यवेक्षकों द्वारा नजर रखी जाए।
22 मई को जारी किया गया आदेश
कोर्ट ने 22 मई को जारी अपने आदेश में, जिसे शनिवार को अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया गया, कहा, 'अपीलकर्ता (फोगाट) को एशियन गेम्स 2026 के लिए सिलेक्शन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की इजाजत दी जाएगी, जो 30.05.2026 और 31.05.2026 को होने हैं। इसमें कहा गया, 'यह पॉलिसी और सर्कुलर साफ तौर पर भेदभावपूर्ण हैं, क्योंकि ये प्रतिवादी नंबर 1 (WFI) को अपीलकर्ता जैसी मशहूर खिलाड़ियों पर विचार करने का कोई अधिकार नहीं देते, खासकर तब जब उन्होंने मैटरनिटी लीव (मातृत्व अवकाश) के कारण खेल से कुछ समय के लिए ब्रेक लिया हो।"
कोर्ट ने आगे कहा कि WFI ने 9 मई को फोगाट को जो 'कारण बताओ नोटिस' भेजा था, उसमें बताए गए आधार "पहले से सोचे-समझे और उन मामलों को फिर से खोलने वाले लगते हैं जो पहले ही सुलझ चुके थे।" कोर्ट ने यह भी कहा कि "खेल और न्याय के हित में यह जरूरी है कि अपीलकर्ता को सिलेक्शन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की इजाजत दी जाए।"
अदालत ने सटीक टिप्पणी
अदालत ने पाया कि फोगाट को चयन ट्रायल से बाहर रखने की वजह सीधे तौर पर उनका "ब्रेक और कुछ समय के लिए संन्यास" लेना है। अदालत ने आगे कहा कि कोई भी ऐसा नियम, जिससे किसी महिला को गर्भावस्था या बच्चे के जन्म के बाद ठीक होने के समय (पोस्ट-पार्टम रिकवरी) के कारण नुकसान होता है, वह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 में बताए गए भेदभाव न करने के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।
