पिकलबॉल दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ता खेल है, ये अब महज कहने वाली बात नहीं रही। साल 1965 में पैडल पर आधारित नए खेल की शुरुआत वॉशिंगटन के बैनब्रिज आइलैंड पर हुई थी, जो पिकलबॉल के रूप में एक में एक बड़े वैश्विक स्वास्थ्य आंदोलन (Global Health Movement) का रूप ले चुका है। इस खेल के तेजी से बढ़ने की वैज्ञानिक वजहें भी अब सामने आ गई हैं।
एप्पल, हॉरवर्ड मेडिकल स्कूल और ब्रिंघम एंड विमेंस हॉस्पिटल ने संयुक्त रूप से हेल्थ के क्षेत्र में एक बड़ा शोध किया, जिसमें 2.5 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए। इस शोध में पांच साल और 18.6 करोड़ दिन का डेटा रिकॉर्ड किया गया। शोधकर्ता का मकसद ये जानना नहीं था कि पिकलबॉल की लोकप्रियता बढ़ रही है या नहीं, बल्कि वो ये पता लगाना चाहते थे कि क्या पिकलबॉल सच में आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है? इसका जवाब बहुत साफ था। शोध के दौरान जुलाई 2023 में एक बड़ा लक्ष्य हासिल किया और एक महीने में टेनिस को पछाड़कर सबसे लोकप्रिय रैकेट स्पोर्ट्स बन गया।
पिकलबॉल की लोकप्रियता में इज़ाफा किसी खास मौसम पर निर्भर नहीं है। टेनिस खेलने वालों की संख्या गर्मियों में बढ़ जाती है और सर्दियों में कम हो जाती है। वहीं, पिकलबॉल खेलने वालों की संख्या महीने-दर-महीने और साल-दर-साल बढ़ती ही जा रही है। यह इस बात का सबूत है कि यह खेल लोगों के लिए महज शौक नहीं रहा, बल्कि उनकी जीवनशैली का हिस्सा बन गया है। आंकड़े भी यही बता रहे हैं। पिकलबॉल की असली ताकत इसकी आसान पहुंच है। शोध के दौरान, लोगों ने बताया कि उन्होंने पारंपरिक रैकेट स्पोर्ट्स के बजाय पिकलबॉल को इसलिए चुना, क्योंकि इसमें ज्यादा सामाजिक माहौल मिलता है, इसे सीखना आसान है और इसे खेलने के लिए कोई मुश्किल शर्त नहीं है। यही वजह है कि उन्होंने टेनिस की तुलना में ज्यादा समय पिकलबॉल को दिया।
पिकलबॉल कोर्ट में कार्डियो का एक दिलचस्प रुख उभरकर सामना आया। टेनिस खेलते वक्त खिलाड़ियों की हार्ट-रेट ज्यादा तेजी से बढ़ती है। टेनिस में औसतन अधिकतम हृदयगति (हार्ट रेट) 152 होती है, जबकि पिकलबॉल में 143। पिकलबॉल का खेल टेनिस की तुलना में ज्यादा देर चलता है। टेनिस का एक मैच औसतन 81 मिनट चलता है, वहीं पिकलबॉल का मैच 90 मिनट चलता है। टेनिस मैच की तुलना में आप पिकलबॉल में 9 मिनट ज़्यादा एक्टिव रहते हैं। यह खेल इतना मजेदार है कि खिलाड़ी भूल जाते हैं कि वे खेल का लुत्फ नहीं उठा रहे हैं, बल्कि एक्सरसाइज कर रहे हैं। सबसे ज़रूरी बात यह है कि दोनों ग्रुप के खिलाड़ियों की हार्ट-रेट उनकी अनुमानित अधिकतम दर के 70 प्रतिशत तक पहुंच जाती है, जिसका मतलब है कि आप चाहे कोई भी पैडल चुनें, आपको कार्डियोवैस्कुलर फायदे निश्चित तौर मिलेंगे।
सामने आई मेंटल हेल्थ से जुड़ी चौंकाने वाली बात
पिकलबॉस के शोध में सबसे खास बात यह है कि इसमें पैरों की सक्रियता से कुछ लेना देना नहीं है। पिकलबॉल की स्थिर गति, स्थिर सोशल इंटरेक्शन और दिलचस्प रैलियां दिमाग में डोपामाइन और सेरोटोनिन हारमोन के स्तर को बढ़ाती हैं। स्क्रीनिंग के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं। PHQ-2 स्केल, जो कि डिप्रेशन की संभावना का पता लगाने का एक क्लिनिकल पैमाना है, उस पर टेनिस खिलाड़ियों के 3 या उससे ज्यादा का स्कोर करने की संभावना 51.3 प्रतिशत कम थी। वहीं, पिकलबॉल के मामले में यह आंकड़ा 60.1 प्रतिशत तक पहुंच गया। दोनों खेलों में नतीजे आम लोगों के मुकाबले में बेहतर दिखे, लेकिन टेनिस की तुलना में पिकलबॉल बाजी जीतने में सफल रहा।
दोनों के बीच यह अंतर बड़ा क्यों है? इसकी तीन वजह हैं, लगातार एरोबिक एक्सरसाइज से शरीर में फील-गुड' केमिकल रिलीज़ होते हैं। डबल्स फ़ॉर्मेट में खिलाड़ियों को एक-दूसरे के साथ तुरंत बातचीत और तालमेल बिठाना पड़ता है और लगातार रणनीति बनाने की ज़रूरत के कारण दिमाग पूरी तरह खेल में लगा रहता है, जिससे फालतू बातें सोचने का मौका ही नहीं मिलता। ऐसे में आपको 90 मिनट के खेल में थेरेपी, कार्डियो और दोस्ती तीनों चीजें एक साथ मिल जाती है। इस बदलाव के साथ खेल का इंफ्रास्ट्रक्चर भी बदल रहा है। 2025 में न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अमेरिका में 8,000 से ज़्यादा टेनिस कोर्ट्स को पहले ही पिकलबॉल सुविधाओं में बदला जा चुका है। अब पिकलबॉल वर्कआउट के लिए खास ट्रैकिंग फ़ीचर भी उपलब्ध हैं, जो डिवाइस के एक्टिविटी टूल्स की बढ़ती लिस्ट का हिस्सा हैं। प्लेयर्स ने पिछले कुछ वर्षों में यह अनुभव किया है कि गतिविधि, प्रतिस्पर्धा और आपसी जुड़ाव का यह मेल न सिर्फ पिकलबॉल कोर्ट्स को भर रहा है, बल्कि लोगों के शरीर और दिमाग को भी ज्यादा सेहतमंद बना रहा है।

एप्पल स्टडी
IPBL का असर
अमेरिका में एप्पल की स्टडी में जो बात सामने आई थी, अब वही भारत के शहरों में भी दिख रही है। भारत दुनिया के पांच सबसे तेज़ी से बढ़ते पिकलबॉल मार्केट में से एक बन गया है, यहां 1,50,000 से ज़्यादा एक्टिव खिलाड़ी हैं, 1,200 से ज़्यादा खास कोर्ट हैं और महज 24 महीनों में इसमें 150 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अहमदाबाद, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, गुड़गांव, दिल्ली में कोर्ट अलग-अलग हैं, लेकिन सेहत के फ़ायदे एक जैसे हैं।
इस बदलाव का अहम मोड़ दिसंबर 2025 में आया, जब नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में पहली इंडियन पिकलबॉल लीग (IPBL) शुरुआत हुई। यह देश में खेल जगत में हुई एक बहुत बड़ी घटना थी। इसने तत्काल लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। टूर्नामेंट का खिताबी मुकाबला भी रोमांचक रहा। एब्सोल्यूट स्पोर्ट्स की टीम 'मुंबई स्मैशर्स'ने ओपरैम वेंचर्स की टीम 'हैदराबाद रॉयल्स' को हराकर पहला खिताब अपने नाम किया।
इस लीग ने ज़मीनी स्तर पर ऐसी लहर पैदा की जैसी पिकलबॉल में पहले कभी नहीं देखी गई थी। हाउसिंग सोसायटियों और क्लबों से लेकर पब्लिक पार्क और यहां तक कि बेकार पड़ी टेनिस सुविधाएं और कोर्ट अचानक पिकलबॉल कोर्ट में तब्दील हो गए हैं और चहल-पहल से भर गए, जहां लोग खेलने, मेल-जोल बढ़ाने और फिट रहने के लिए आ रहे हैं। इस खेल की मांग अभूतपूर्व रही है,और इससे एक शानदार पिकलबॉल कम्युनिटी बनी है।
सुप्रीम कोर्ट की वकील संजीवनी पट्टजोशी ने अपने काम के लिए आवश्यक स्टैमिना डेवलप करने के लिए पिकलबॉल खेलना शुरू किया था। पिकलबॉल कोर्ट्स की उपलब्धता पर जोर देते हुए उन्होंने हाल ही में 'पिकलबॉल नाउ' को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ''आप चाहे किसी भी इलाके में रहते हों, 15-20 मिनट की दूरी पर एक पिकलबॉल कोर्ट उपलब्ध है। ऐसे ऐप्स हैं, जिनसे आप पहले से बुकिंग कर सकते हैं; बस पेमेंट करें और खेलें। खेल तक आसान पहुंच की यह सुविधा इसे गोल्फ या टेनिस जैसे खेलों से अलग बनाती है, जो अक्सर सिर्फ़ बड़े क्लबों में ही उपलब्ध होते हैं, जहां आपको मेंबरशिप लेनी पड़ सकती है या महंगे रैकेट और गियर खरीदने पड़ते हैं।''
अन्य बातें इस खेल के व्यापक होते पैमाने से पता चलती हैं। जून 2026 तकरीबन 5 करोड़ लोगों पिकलबॉल खेल चुके हैं, जिनमें से लगभग 2.3 करोड़ लोग अभी भी इससे जुड़े हैं और लगातार खेल रहे हैं। वो भी ऐसा खेल, जो अपने पैर पसार रहा है और अपना दायरा बड़ा कर रहा, ये आंकड़े इस बात की तस्तीक करते हैं कि इसमें लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता है। भारतवर्ष युवा इस खेल में अपना नाम करने की चाहत रख रहे हैं तो पिकलबॉल का वजूद न सिर्फ यहां बना रहेगा, बल्कि इसका भविष्य भी उज्ज्वल होगा।
