विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ 'विश्वसनीय कार्रवाई' करनी होगी, तभी दुनिया को यह भरोसा होगा कि इस्लामाबाद अपनी कही बात पर अमल करेगा। अपनी पाक्षिक ब्रीफिंग के दौरान, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से पूछा गया कि पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की टिप्पणियों को नई दिल्ली किस नजरिए से देखती है। मुनीर ने मंगलवार को कहा था कि देश में उग्रवाद के बढ़ते खतरे के बीच सशस्त्र बल आतंकवाद को हराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान को कार्रवाई करके और पक्का इरादा दिखाकर यह साबित करना होगा और इससे पहले कि दुनिया उसकी बातों पर यकीन करे, उसे सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई करनी होगी।'
TIMES NOW Navbharat पर यह भी पढ़ें: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री की बहन 30 दिन की हिरासत में; इमरान के बाद अब अलीमा भी पहुंची सलाखों के पीछे
'भारत दोनों पक्षों-यूक्रेन और रूस-के संपर्क में है'
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके यूक्रेनी समकक्ष के बीच हुई बैठक के बारे में सवाल पर विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'विदेश मंत्री ने कल यूक्रेन के विदेश मंत्री से मुलाकात की। इस बैठक में, उन्होंने संघर्ष में हाल ही में हुए घटनाक्रमों पर चर्चा की। विदेश मंत्री ने एक बार फिर भारत का पक्ष रखा कि बातचीत और कूटनीति ही शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता है। भारत दोनों पक्षों-यूक्रेन और रूस-के संपर्क में है और हमने उनसे कहा है कि अगर भारत किसी भी तरह से योगदान दे सकता है, तो भारत ऐसा करने के लिए तैयार है। मैं उस बात को भी दोहराना चाहूंगा जो प्रधानमंत्री ने बिश्केक में रूस के राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान कही थी कि अंतहीन युद्धों की जगह अब शांति की ओर बढ़ना चाहिए या युद्ध को खत्म करने की दिशा में कदम उठाना चाहिए। इसलिए, भारत को उम्मीद है कि बातचीत और कूटनीति के जरिए जल्द ही इस संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान निकलेगा।'
'जापान के साथ हमारा दायरा बहुत बड़ा'
वहीं जापान के बारे में जयसवाल कहते हैं, 'लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) का एक प्रतिनिधिमंडल आया था। इस प्रतिनिधिमंडल ने विदेश सचिव से मुलाकात की। इसकी अगुवाई LDP के इंटरनेशनल ब्यूरो के डायरेक्टर जनरल, मिस्टर तारो कोनो ने की। वे पहले जापान के रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और डिजिटल मंत्री भी रह चुके हैं। यह प्रतिनिधिमंडल 'इंडिया-जापान डिस्टिंग्विश्ड विजिटर्स प्रोग्राम' के तहत भारत आया है। वे 18 से 22 (सितंबर) तक यहां हैं। इसलिए आज उनका आखिरी दिन है। विदेश सचिव के साथ बैठक में उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की, जो जाहिर तौर पर बहुत अच्छे चल रहे हैं। आप जानते हैं कि जापान के साथ हमारा दायरा बहुत बड़ा है और इस रिश्ते के सभी पहलुओं पर चर्चा हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच बनी आर्थिक सुरक्षा साझेदारी भी शामिल है। रक्षा के क्षेत्र में भी हम अच्छा काम कर रहे हैं। हम संयुक्त अभ्यास करते हैं। कुल मिलाकर, ऐसी बातचीत और संवाद ही भारत और जापान के बीच मौजूद खास रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और बढ़ावा देते हैं।'
