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NCAAFS 2025: अब उम्र से छेड़छाड़ नहीं कर पाएंगे एथलीट, खेल मंत्रालय की नई संहिता तैयार- कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार

खेलों में उम्र संबंधी धोखाधड़ी के खिलाफ राष्ट्रीय संहिता (एनसीएएएफएस) 2025 के मसौदे को खेल मंत्रालय ने अगले सप्ताह केन्द्रीय मंत्रिमंडल के पास भेजने की तैयारी कर ली है।

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मनसुख मांडवीय (फोटो क्रेडिट Mansukh Mandviya X)

नई दिल्ली: खेलों में उम्र संबंधी धोखाधड़ी के खिलाफ राष्ट्रीय संहिता (एनसीएएएफएस) 2025 के मसौदे को खेल मंत्रालय ने अगले सप्ताह केन्द्रीय मंत्रिमंडल के पास भेजने की तैयारी कर ली है। इसमें आयु धोखाधड़ी उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के प्रावधान के साथ खिलाड़ियों की सही उम्र का पता लगाने के लिए एआई-आधारित बोन स्कैन की बात कही गई है।

खेल मंत्रालय ने मांगी थी जनता की राय और सुझाव

खेल मंत्रालय ने इस साल मार्च में एनसीएएएफएस को सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए ऑनलाइन पोस्ट किया गया था। खेल मंत्रालय के एक सूत्र ने पीटीआई को बताया कि यह प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है। सूत्र ने कहा, 'लगभग 15 साल बाद संशोधित होने वाली इस संहिता को अगले सप्ताह मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। चूंकि यह एक संहिता है ऐसे में मंत्रिमंडल की मंजूरी ही पर्याप्त होगी। हमें आम जनता से बहुत सारी प्रतिक्रिया मिली और उन सभी की जांच की गई है। यह संहिता मोटे तौर पर उसी रूप में रहेगी, जिस तरह इसे इस साल परामर्श प्रक्रिया के लिए तैयार किया गया था।'

बड़ी समस्या रही है खेलों में उम्र की धोखाधड़ी

भारतीय खेलों में युवा और जूनियर स्तर पर आयु धोखाधड़ी एक बड़ी समस्या रही है, जहां चिकित्सा जांच के प्रावधानों के बावजूद अक्सर अधिक आयु के एथलीट प्रतिस्पर्धा करते हुए पकड़े जाते हैं। संशोधित संहिता के अनुसार सभी इच्छुक और पंजीकृत खिलाड़ियों को आयु सत्यापन के लिए तीन अनिवार्य दस्तावेज जमा करने होंगे। इसमें जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड/मतदाता पहचान पत्र/पासपोर्ट/पैन कार्ड और स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र/मैट्रिकुलेशन प्रमाण पत्र शामिल है। इसके बाद दस्तावेज सत्यापन भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) और राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) द्वारा किया जाएगा।

खेल मंत्रालय नहीं रखता है उम्र से छेड़छाड़ का रिकॉर्ड

मंत्रालय अब तक आयु धोखाधड़ी की घटनाओं का रिकॉर्ड नहीं रखता रहा है। इस तरह के मामलों के लिए अब तक 2010 की एनसीएएएफएस की मदद ली जाती थी लेकिन इसमें उल्लंघन करने वालों के लिए सजा का प्रावधान नहीं था। संशोधित संहिता में पहली बार अपराध करने वाले एथलीटों के लिए दो साल के प्रतिबंध की सिफारिश की गई है। दूसरी बार उल्लंघन करने पर आजीवन प्रतिबंध लगेगा और ‘भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी।’

स्थाई रूप से दर्ज की जाएगी उम्र

संहिता में कहा गया है,'सभी मौजूदा पंजीकृत एथलीट दस्तावेज को साइ या एनएसएफ को अनिवार्य तौर पर जमा करेंगे। ऐसे मामलों में जहां कोई दस्तावेज गुम हो गया हो या दस्तावेजों की प्रामाणिकता के बारे में संदेह है, खिलाड़ियों को मेडिकल जांच के लिए भेजा जाएगा। आयु सत्यापन के बाद, एथलीट की आयु एक समर्पित डेटाबेस में स्थायी रूप से दर्ज की जाएगी। यह रिकॉर्ड अपरिवर्तनीय रहेगा और एथलीट के पूरे खेल करियर के दौरान आयु के निश्चित प्रमाण के रूप में काम करेगा।'

एक बार की माफी का है संहिता में प्रावधान

संहिता में एक बार की माफी योजना का प्रावधान है, जो मौजूदा एथलीटों को नीति लागू होने के छह महीने के भीतर अपनी सही आयु साइ या संबंधित एनएसएफ को स्व-घोषित करने की अनुमति देगा। आयु को मेडिकल जांच के माध्यम से संबोधित किया जाएगा। इसमें पारंपरिक टीडब्ल्यू 3 विधि (हड्डी के विकास के आधार पर हड्डी की उम्र का अनुमान) एमआरआई स्कैन, और सामान्य शारीरिक और दांतों की जांच शामिल है। उन्होंने कहा, 'मामले में सटीकता और क्षमता बढ़ाने के लिए उन्नत एआई-आधारित प्रौद्योगिकियां (जैसे बोनेक्सपर्ट) एक पायलट चरण में शुरू की जा सकती हैं।'

ऐसे की जा सकेगी धोखाधड़ी की शिकायत, मिलेगा ईनाम

‘बोनेक्सपर्ट’ किसी बच्चे के हाथ के एक्स-रे का विश्लेषण स्वचालित रूप से करता है, बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के, ताकि हड्डी की उम्र का पता लगाया जा सके। संहिता में एक ‘व्हिसिलब्लोअर’ तंत्र भी है, जहां ₹5,000 रुपये के शुल्क को देकर गोपनीयता के साथ उम्र धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज की जा सकती हैं। यह शिकायत अगर सही पाई जाती हैं, तो खेल मंत्रालय न केवल शुल्क वापस करेगा बल्कि उल्लंघन की रिपोर्ट करने वाले को अतिरिक्त ₹2,000 रुपये का भुगतान भी करेगा।

फैसले के खिलाफ अपील का भी है प्रावधान

चिकित्सा परीक्षण रिपोर्ट से असंतुष्ट एथलीट आकलन के 15 दिनों के भीतर साइ के क्षेत्रीय निदेशक या अपने संबंधित राष्ट्रीय खेल संघों की तीन सदस्यीय समिति के पास अपील दायर कर सकेंगे। मसौदे के अनुसार प्रतिकूल फैसले को केंद्रीय अपील समिति (सीएसी) में चुनौती दी जा सकेगी, जिसका नेतृत्व साइ के महानिदेशक करेंगे। सीएसी का निर्णय हालांकि बाध्यकारी होगा। राष्ट्रीय खेल संघों को इन प्रावधानों के अनुपालन की रिपोर्ट द्विवार्षिक रूप से जमा करनी होगी और उनकी फंडिंग को इससे जोड़ा जाएगा।

Navin Chauhan
नवीन चौहानauthor

नवीन चौहान टाइम्स नाउ नवभारत की स्पोर्ट्स टीम में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा प्राप्त करने के बाद वे पिछले 15 वर्षों से सक्रिय रूप से मीडिया जगत में जुड़े हैं। प्रिंट मीडिया और डिजिटल—दोनों माध्यमों में काम करने के अनुभव ने उन्हें खेल पत्रकारिता में व्यापक दृष्टिकोण और गहरी समझ प्रदान की है। अपने लंबे करियर में नवीन ने कई बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को कवर किया है। इनमें आईपीएल, बैडमिंटन प्रीमियर लीग, इंडियन सुपर लीग, टी20 विश्व कप, आईसीसी विश्व कप, और तीन ओलंपिक—लंदन, रियो और टोक्यो—जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट शामिल हैं। नवीन चौहान ने अपने करियर में कई प्रसिद्ध भारतीय खिलाड़ियों और कोचों के इंटरव्यू भी किए हैं, जिनमें पीवी सिंधू, विजेंदर सिंह और पुलेला गोपीचंद जैसे नाम शामिल हैं। अब तक नवीन 15,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं, जिनमें ग्राउंड रिपोर्टिंग, विश्लेषणात्मक लेख, स्पेशल स्टोरीज़, प्लेयर प्रोफाइल और टूर्नामेंट-आधारित एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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