Junior Hockey World Cup 2025: जूनियर पुरुष हॉकी विश्व कप के कांस्य पदक के प्लेऑफ मुकाबले में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 2021 की चैम्पियन अर्जेंटीना को 4-2 से हराकर नौ साल बाद इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में पदक जीत लिया। दो बार (होबार्ट 2001 और लखनऊ 2016) की चैम्पियन रही भारतीय टीम ने आखिरी बार 2016 में पदक जीता था। पिछले दो संस्करणों में टीम कांस्य पदक का मुकाबला हारकर चौथे स्थान पर रही थी। तीन क्वार्टर तक दो गोल से पिछड़ने के बाद, भारतीय टीम ने असाधारण वापसी करते हुए अंतिम 11 मिनटों में दनादन चार गोल दागकर मेयर राधाकृष्णन स्टेडियम में मौजूद दर्शकों में मानो नई जान फूंक दी।
भारतीय गोल और स्कोरर
भारत के लिए गोल दागने वाले खिलाड़ी थे अंकित पाल (49वां मिनट), मनमीत सिंह (52वां मिनट), शारदानंद तिवारी (57वां मिनट, पेनल्टी स्ट्रोक), और अनमोल इक्का (58वां मिनट)। वहीं, अर्जेंटीना के लिए निकोलस रौद्रिगेज (5वां मिनट) और सैंटियागो फर्नांडिस (44वां मिनट) ने गोल किए।
शुरुआती 45 मिनट में भारतीय टीम दबाव में
मैच के पहले तीन क्वार्टर तक भारतीय टीम पूरी तरह से दबाव में नजर आई और गोल करने के लिए संघर्ष करती दिखी। टूर्नामेंट के राउंड रॉबिन चरण में 29 गोल करने वाली मेजबान टीम, कठिन प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ गोल करने को जूझती दिखी। पिछले मैच में जर्मनी ने उसकी फॉरवर्ड पंक्ति को बांधे रखा था, वहीं इस मुकाबले में अर्जेंटीना के गोल में भारतीय टीम ज्यादा घुस नहीं पाई और पहले हाफ में एक भी पेनल्टी कॉर्नर हासिल करने में नाकाम रही।
मैच शुरू होते ही भारतीय खिलाड़ी अनमोल इक्का की गलती पर अर्जेंटीना को पेनल्टी स्ट्रोक मिल गया, जिसे निकोलस रौद्रिगेज ने गोल में बदलकर पांचवें मिनट में ही मेयर राधाकृष्णन स्टेडियम पर जमा भारी तादाद में दर्शकों को निराशा हाथ लगाई। पहले क्वार्टर के आखिरी मिनट में भारत को बराबरी का मौका मिला जब आमिर अली से गेंद लेकर सौरभ आनंद कुशवाहा आगे बढ़े और अंकित पाल को गेंद सौंपी, लेकिन अजित यादव इस मूव को अंजाम तक पहुंचाने में नाकाम रहे। दूसरे क्वार्टर में भी यही कहानी दोहराई गई और भारतीय टीम ने कई मौके गंवाए। पहले हाफ में अर्जेंटीना ने एक गोल से बढ़त बना ली थी।
दूसरे हाफ के पहले ही मिनट में भारत को मैच का पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन पेनल्टी कॉर्नर पर भारत की कमजोरी उजागर हुई जब लगातार चार मौकों में से एक भी गोल में तब्दील नहीं हो सका। चौथे पेनल्टी कॉर्नर पर अनमोल का सीधा शॉट गोलपोस्ट से टकराकर बाहर निकल गया। इस बीच, जवाबी हमलों में अर्जेंटीना को 40वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन टूर्नामेंट की खोज रहे गोलकीपर प्रिंसदीप सिंह ने एक बार फिर शानदार बचाव किया। हालांकि, तीसरा क्वार्टर खत्म होने से एक मिनट पहले सैंटियागो फर्नांडिस ने भारतीय डिफेंस को पूरी तरह चकमा देकर गोल के बायें ओर से सटीक शॉट लगाकर गेंद को भीतर घुसा दिया और अर्जेंटीना को 2-0 की बढ़त दिला दी।
अंतिम क्वार्टर में गोलों की बारिश
तीन क्वार्टर तक 0-2 से पिछड़ने के बाद, भारतीय खिलाड़ियों ने अंतिम क्वार्टर में अपने खेल का स्तर अविश्वसनीय रूप से ऊपर उठा दिया। 49वें मिनट में मिले पेनल्टी कॉर्नर को अंकित पाल ने गोल में बदलकर भारत का खाता खोला। इसके बाद, 52वें मिनट में भारत को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला, जिस पर अनमोल इक्का के शॉट पर गेंद डिफ्लैक्ट होकर मनमीत सिंह की स्टिक से टकराकर गोल के भीतर गई, और स्कोर 2-2 से बराबर हो गया।
जब लग रहा था कि मैच शूटआउट में जाएगा, तब आखिरी सीटी बजने से तीन मिनट बाकी रहते भारत को एक अहम पेनल्टी स्ट्रोक मिला, जिसे शारदानंद तिवारी ने बिना कोई गलती किए गोल में बदलकर पहली बार भारत को बढ़त (3-2) दिलाई। अर्जेंटीना को अगले ही मिनट में पेनल्टी कॉर्नर मिला लेकिन गोलकीपर प्रिंसदीप सिंह ने एक बार फिर शानदार बचाव किया। भारत ने 58वें मिनट में मिले पेनल्टी कॉर्नर को अनमोल इक्का के गोल में बदलकर 4-2 की निर्णायक बढ़त हासिल कर ली और नौ साल बाद जूनियर पुरुष हॉकी विश्व कप में कांस्य पदक पर कब्ज़ा किया।
