फीफा विश्व कप रेफरी राफेल क्लॉस की निष्पक्षता पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा उठाए गए सवालों के बाद फीफा ने उनका बचाव किया। ट्रंप ने अमेरिका के स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को ’रेड कार्ड’ दिखाने के फैसले के बाद क्लॉस की ईमानदारी पर सवाल खड़े किए थे, जिस पर फीफा ने सार्वजनिक प्रतिक्रिया देते हुए रेफरी का समर्थन किया।
ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में बिना किसी ठोस आधार का उल्लेख किए कहा था कि ब्राजील के 46 वर्षीय रेफरी का ’अतीत कुछ संदिग्ध लगता है’। अमेरिका की बेल्जियम से 1-4 की हार से पहले जारी बयान में फीफा ने क्लॉस का समर्थन करते हुए कहा, अपने पूरे करियर में उन्होंने हमेशा पेशेवर रवैये और ईमानदारी के सर्वोच्च मानकों का पालन किया है।
ओमर आर्टन के लिए नहीं आया को बयान
फीफा ने उन्हें विश्व के शीर्ष रेफरी में से एक और विश्व कप रेफरी पैनल का अहम सदस्य करार दिया। फीफा ने हालांकि, पिछले महीने सोमालिया के रेफरी ओमर आर्टन के समर्थन में ऐसा कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया था, जिन्हें अमेरिका के अधिकारियों ने विश्व कप से पहले देश में प्रवेश की अनुमति नहीं दी थी।
बालोगुन को दिखाया रेड कॉर्ड
क्लॉस अपने दूसरे विश्व कप में रेफरी की भूमिका निभा रहे हैं। विश्व कप में अपने चार मैचों के करियर में बालोगुन पहले खिलाड़ी रहे, जिन्हें क्लॉस ने ’रेड कार्ड’ दिखाया। फीफा के मुख्य रेफरी अधिकारी पियरलुइगी कोलीना ने कहा, ’’वह अनुभवी और बेहद सम्मानित रेफरी हैं। हमें उन पर मैच अधिकारी के रूप में पूरा भरोसा है।
ट्रंप ने की टिप्पणी
ट्रंप की टिप्पणी संभवतः 2024 में ब्राजील की सीनेट द्वारा की गई मैच फिक्सिंग जांच से जुड़ी थी। उस जांच में हालांकि क्लॉस पर किसी भी तरह की गड़बड़ी या अनियमितता का आरोप नहीं लगाया गया था। ब्राजील फुटबॉल महासंघ ने भी स्पष्ट किया, ’उनके रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे उनकी ईमानदारी पर सवाल उठे या किसी तरह के गलत आचरण का संदेह पैदा हो।
