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Exclusive: कैसे पड़ा अविनाश से झंडू कुमार नाम? कॉमनवेल्थ मेडलिस्ट ने किया खुलासा

झंडू कुमार ने टाइम्स नाउ से खास बातचीत की। उन्होंने अपना नाम अविनाश से बदलकर झंडू रखने के बारे में बात की। साथ ही उन्होंने गर्व से अपना ब्रॉन्ज मेडल दिखाया और कहा कि इससे उनकी जिंदगी बदल जाएगी। अविनाश ऊर्फ झंडू कुमार ने यह बताया कि उन्हें कौन सा एक्टर बहुत पसंद है।

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झंडू कुमार से खास बातचीत।

करिश्मा, नई दिल्ली। ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) में मेंस की हैवीवेट कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले भारतीय पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार का दिल्ली एयरपोर्ट पर जोरदार स्वागत हुआ। CWG 2026 के ब्रॉन्ज मेडलिस्ट ने गेम्स में भारत के लिए पहला मेडल जीतने पर खुशी जाहिर की। साथ ही गोल्ड मेडल न जीत पाने का दुख भी जताया।

भारत लौटने पर झंडू कुमार ने टाइम्स नाउ से खास बातचीत की। उन्होंने अपना नाम अविनाश से बदलकर झंडू रखने के बारे में बात की। साथ ही उन्होंने गर्व से अपना ब्रॉन्ज मेडल दिखाया और कहा कि इससे उनकी जिंदगी बदल जाएगी। अविनाश ऊर्फ झंडू कुमार ने यह बताया कि उन्हें कौन सा एक्टर बहुत पसंद है।

'लोगों के तानों का दिया जवाब'

झंडू कुमार ने नम आंखों से कहा, पोलियो की वजह से बचपन में उन्हें बहुत ताने सुनने पड़ते थे। लोग उन्हें 'झंडू' कहते थे, लेकिन उन्होंने इस नेगेटिव बात को पॉजिटिव चीज में बदल दिया। जब मेडल जीता तो उन सभी को जवाब दे दिया जो लोग मुझे झंडू बोलते थे। मैं सलमान खान से प्रेरित हूं। उनकी फिल्में देखकर, जिम जाने की प्रेरणा मिली और वहीं से सफर शुरू हुआ।

उठाया 190 किलोग्राम भार

बता दें कि झंडू कुमार ने ग्लासगो के SEC आर्माडिलो में पुरुषों की हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता। ग्रुप B में हिस्सा ले रहे 28 वर्षीय खिलाड़ी ने अपनी दूसरी कोशिश में 190 किलोग्राम का अपना सर्वश्रेष्ठ लिफ्ट रिकॉर्ड किया और 130.9 अंक हासिल किए।

कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा पावरलिफ्टिंग मेडल का फैसला सिर्फ उठाए गए वजन के आधार पर नहीं, बल्कि बॉडीवेट कोएफिशिएंट सिस्टम के जरिए किया जाता है। अलग-अलग बॉडीवेट कैटेगरी के खिलाड़ी लाइटवेट और हेवीवेट डिवीजन में एक साथ हिस्सा लेते हैं और फाइनल रैंकिंग एथलीट के बॉडीवेट और सबसे ज्यादा सफल लिफ्ट के आधार पर तय की जाती है।

आखिरी लिफ्ट में चूके

झंडू ने 181 किलोग्राम की सफल लिफ्ट के साथ शुरुआत की और फिर अपनी दूसरी कोशिश में वजन बढ़ाकर 190 किलोग्राम कर दिया। इसके बाद 28 वर्षीय खिलाड़ी ने अपनी आखिरी लिफ्ट में 196 किलोग्राम वजन उठाने की कोशिश की, जो बर्मिंघम 2022 में बने कॉमनवेल्थ गेम्स के रिकॉर्ड से ज्यादा होता।

भारत का प्रदर्शन

हालांकि, वह लिफ्ट पूरी नहीं कर सके और आखिरकार तीसरे स्थान पर रहकर ब्रॉन्ज मेडल जीता। यह मेडल 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा पावरलिफ्टिंग में भारत का पहला पोडियम फिनिश भी था। चौथे दिन के बाद, भारत मेडल टैली में दो सिल्वर, एक गोल्ड और एक ब्रॉन्ज मेडल के साथ आठवें स्थान पर है। ऑस्ट्रेलिया 39 पदकों के साथ चार्ट में सबसे आगे है, जिसमें 17 स्वर्ण, 9 रजत और 13 कांस्य पदक शामिल हैं।

Umesh Kumar
उमेश कुमारauthor

उमेश कुमार पत्रकारिता में पिछले 7 वर्षों से सक्रिय हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से करने के बाद उन्होंने डिजिटल मीडिया में बतौर स्पोर्ट्स राइटर अपनी मजबूत पहचान बनाई। उमेश ने अमर उजाला (प्रिंट), ईटीवी भारत (हैदराबाद), दैनिक भास्कर और दैनिक जागरण जैसे संस्थानों के साथ काम किया है। उमेश ने क्रिकेट की कई बायलेटरल सीरीज, आईपीएल, वर्ल्ड कप, प्रो कबड्डी लीग, फीफा वर्ल्ड कप, हॉकी वर्ल्ड कप और ओलंपिक जैसे बड़े राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को कवर किया है। खेलों की गहरी समझ और डेटा-ड्रिवन स्टोरीटेलिंग उनकी लेखनी की खासियत है।

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