एक ऐसी तारीख जिसे ऑस्ट्रेलिया कभी भी भूल नहीं पाएगा। एक ऐसा दिन जब भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऐसे टेस्ट सीरीज का अंत हुआ जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी का वह सीरीज जिसने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के मन में हरभजन सिंह का खौफ पैदा कर दिया और 0-1 से पिछड़ने के बाद 2-1 जीत दर्ज की।
चेन्नई टेस्ट जीतकर सीरीज अपने नाम
चेन्नई टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी 391 के जवाब में भारत ने टॉप ऑर्डर के शानदार प्रदर्शन के दम पर 501 रन बनाए और 110 रन का महत्वपूर्ण बढ़त हासिल किया। भारत की तरफ से सचिन तेंदुलकर ने सर्वाधिक 126 रन की पारी खेली। सचिन के अलावा एसएस दास ने 84, राहुल द्रविड़ ने 81, वीवीएस लक्ष्मण ने 65 और एस रमेश ने 61 रन की पारी खेली।
दूसरी पारी में भी ऑस्ट्रेलिया के सामने हरभजन सिंह की बड़ी चुनौती थी, नतीजा पूरी टीम केवल 264 रन बनाकर ढेर हो गई। भारत के सामने 155 रन का लक्ष्य था जो उसने 8 विकेट खोकर हासिल कर लिए। दूसरी पारी में लक्ष्मण ने सर्वाधिक 66 रन की पारी खेली। इस जीत के साथ ही भारत ने सीरीज में 0-1 से पिछड़ने के बावजूद पहले ऐतिहासिक कोलकाता टेस्ट और फिर चेन्नई टेस्ट जीतकर सीरीज 2-1 से अपने नाम कर लिया।
ऑस्ट्रेलिया के लिए भज्जी बने खौफ
इस मैच में अकेले हरभजन सिंह के सामने ऑस्ट्रेलिया टीम पस्त हो गई। उन्होंने इस मैच में 15 विकेट झटके और प्लेयर ऑफ द मैच बने। उन्होंने पहली पारी में 7 तो दूसरी पारी में 8 विकेट झटके। इतना ही नहीं 3 मैच की सीरीज खत्म होने तक हरभजन सिंह, ऑस्ट्रेलिया के लिए खौफ का दूसरा नाम बन चुके थे। हरभजन ने 3 मैच की इस सीरीज में 32 विकेट लिए और प्लेयर ऑफ द सीरीज बने।
