स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। एक समय था, जब भारतीय बल्लेबाजी की सबसे बड़ी ताकत तकनीक, टाइमिंग और विकेट बचाकर खेलने की क्षमता मानी जाती थी। वनडे क्रिकेट में लक्ष्य का पीछा करना हो या टी20 में बड़ा स्कोर खड़ा करना, भारतीय बल्लेबाज अक्सर पारी को संभालने और आखिरी ओवरों में तेजी से रन बनाने की रणनीति अपनाते थे। हालांकि, 2021 और 2022 के टी20 वर्ल्ड कप में मिली हार ने टीम इंडिया को अपनी बल्लेबाजी की सोच पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया।
आईसीसी टूर्नामेंटों में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों की आक्रामक बल्लेबाजी ने भारतीय टीम को एक अहम सबक दिया। बड़े मुकाबले जीतने के लिए सिर्फ मजबूत बल्लेबाजी क्रम काफी नहीं है, बल्कि विरोधी टीम को शुरुआत से ही दबाव में रखना भी जरूरी है। इसके लिए रन बनाने की रफ्तार बढ़ाना और बड़े शॉट खेलने का जोखिम उठाना अहम था। यहीं से टीम इंडिया की बल्लेबाजी में बदलाव की शुरुआत हुई। रोहित शर्मा ने इस नई सोच को मैदान पर खुलकर अपनाया और अपने साथियों को भी बेखौफ क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया। उनकी शुरू की गई इस आक्रामक रणनीति ने आगे चलकर भारतीय टी20 बल्लेबाजी की पहचान बदल दी।
बना दिया वर्ल्ड रिकॉर्ड
इस बदलाव का असर अब आंकड़ों में भी साफ नजर आता है। साल 2026 में भारत ने 40 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 400 छक्के जड़कर एक कैलेंडर वर्ष में यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली टीम बनने का रिकॉर्ड बनाया। अभिषेक शर्मा की विस्फोटक शुरुआत से लेकर मध्यक्रम के आक्रामक अंदाज तक, भारतीय बल्लेबाजी अब पहली गेंद से ही विपक्षी गेंदबाजों पर हावी होने की कोशिश करती है। न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में भारतीय बल्लेबाजों ने कुल 142 छक्के लगाए, जबकि न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों के बल्ले से 61 छक्के निकले। इसके अलावा, 2026 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए 11 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में कुल 259 छक्के लगे, यानी प्रति मैच औसतन 23.5 छक्के।

भारत ने एक साल में जड़े सबसे ज्यादा छक्के।
टॉप ऑर्डर बल्लेबाजों की तूफानी बैटिंग
भारतीय बल्लेबाजों के इस आक्रामक प्रदर्शन में टॉप ऑर्डर की भूमिका सबसे अहम रही है। आंकड़ों के मुताबिक, अभिषेक शर्मा 86 छक्कों के साथ सबसे आगे हैं। उनके बाद ईशान किशन ने 60 और संजू सैमसन ने 50 छक्के लगाए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि भारत की पावर-हिटिंग अब केवल मध्यक्रम या आखिरी ओवरों में बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है। टीम के शीर्ष बल्लेबाज भी शुरुआत से ही बड़े शॉट खेलने और मैच का रुख तय करने की जिम्मेदारी उठा रहे हैं।
पावरप्ले में बहे रन
भारत की बल्लेबाजी में आए इस बदलाव का असर पावरप्ले में भी देखने को मिला है। टीम ने शुरुआती छह ओवरों में दो बार 100 रन का आंकड़ा पार किया है। 2026 में खेले गए 40 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के दौरान भारतीय बल्लेबाजों ने 239 ओवरों में 2,681 रन बनाए। इस दौरान टीम का स्ट्राइक रेट 189.96 और रन रेट 11.21 रहा। ये आंकड़े भारतीय बल्लेबाजी की आक्रामकता और तेजी से रन बनाने की रणनीति को दर्शाते हैं।
हालांकि, इस बदलाव की कहानी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है। इसकी नींव 2021 और 2022 के टी20 वर्ल्ड कप में मिली निराशा के बाद पड़ी थी। 2021 में पाकिस्तान ने भारत को 10 विकेट से हराया, जबकि 2022 के टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने भी भारत को 10 विकेट से करारी शिकस्त दी। इन लगातार झटकों के बाद टीम की रणनीति और बड़े मुकाबलों में उसके खेलने के तरीके पर सवाल उठने लगे थे। ऐसे समय में रोहित शर्मा ने स्पष्ट किया कि भारतीय टीम अब अपने खिलाड़ियों को खुलकर खेलने की आजादी देना चाहती है।
रोहित ने भड़काई थी आग
रोहित ने कहा था कि पिछले वर्ल्ड कप में अच्छे नतीजे नहीं मिलने का मतलब यह नहीं है कि टीम खराब क्रिकेट खेल रही थी। उन्होंने खिलाड़ियों को आजादी के साथ खेलने देने की बात कही और यह भी स्पष्ट किया कि नई रणनीति अपनाने के दौरान टीम को कुछ मैचों में हार का सामना करना पड़ सकता है। उनके मुताबिक, नतीजे हमेशा भारत के पक्ष में नहीं जाएंगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होगा कि खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं। टीम का मकसद अपने खेल में बदलाव करना और समय के साथ आगे बढ़ना है।

टी20 वर्ल्ड कप 2024 के दौरान रोहित शर्मा। फोटो- ICC
रोहित की इस सोच को तत्कालीन हेड कोच राहुल द्रविड़ का भी समर्थन मिला। दोनों ने भारतीय टीम को अधिक आक्रामक क्रिकेट खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। इसका असर धीरे-धीरे मैदान पर दिखाई देने लगा। बल्लेबाजों ने सिर्फ विकेट बचाने के बजाय रन बनाने की गति को प्राथमिकता देना शुरू किया। अब टीम की रणनीति यह है कि विपक्षी गेंदबाजों को शुरुआत से ही दबाव में रखा जाए और पारी के आखिरी ओवरों तक रन बनाने की रफ्तार बनाए रखी जाए।
हिटमैन ने दिया फॉर्मूला
इस बदलाव में रोहित शर्मा की भूमिका बेहद अहम रही। उन्होंने 2023 के वनडे वर्ल्ड कप में भारतीय टीम को तेज शुरुआत दिलाने की रणनीति अपनाई। इसके बाद 2024 के टी20 वर्ल्ड कप में भी उन्होंने पावरप्ले के दौरान आक्रामक बल्लेबाजी करके विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की। रोहित के इस अंदाज ने टीम के अन्य बल्लेबाजों को भी अपनी स्वाभाविक आक्रामकता के साथ खेलने का भरोसा दिया। नतीजतन, भारतीय बल्लेबाजी में ऐसी संस्कृति विकसित हुई, जिसमें बड़े शॉट खेलने की जिम्मेदारी सिर्फ किसी एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि पूरी टीम की है।
आज इसी सोच का नतीजा 400 छक्कों के ऐतिहासिक आंकड़े के रूप में सामने आया है। छक्के लगाने का यह सिलसिला अभी थमा नहीं है। इसे बस आठ हफ्तों के लिए रोका गया है। दिसंबर में श्रीलंका के खिलाफ तीन मैचों की T20I सीरीज में श्रेयस अय्यर की टीम फिर से अपने जोरदार शॉट्स का प्रदर्शन करेगी।
फिनिशर्स का बोझ हुआ हल्का
भारत के 400 छक्के सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि उसकी बल्लेबाजी की सोच में आए बड़े बदलाव का प्रतीक हैं। अब पावर-हिटिंग केवल फिनिशर्स की जिम्मेदारी नहीं रह गई है। टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों से भी उम्मीद की जाती है कि वे पहली गेंद से ही विपक्षी टीम पर दबाव बनाएं और तेजी से रन जुटाएं। यही बदलाव आधुनिक टी20 क्रिकेट की दिशा भी तय कर रहा है। आने वाले समय में उन टीमों को ज्यादा सफलता मिल सकती है, जिनके बल्लेबाज शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाने में सक्षम हों। भारतीय टीम इस बदलाव की एक बड़ी मिसाल बनकर उभरी है और उसके आंकड़े बताते हैं कि टी20 क्रिकेट में अब सिर्फ टिककर खेलना नहीं, बल्कि तेजी से रन बनाकर मैच पर नियंत्रण हासिल करना भी उतना ही जरूरी है।
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