स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड में से एक भारतीय क्रिकेट बोर्ड का चीफ सेलेक्टर होना, मतलब दो धारी तलवार पर सवार होना होता है। चीफ सेलेक्टर की कुर्सी जितनी ताकतवर होती है। उतनी ही मुश्किल भी। क्योंकि भारत के क्रिकेट को खेला नहीं पूजा जाता है। ऐसे में चीफ सेलेक्टर का एक फैसला उन्हें दूरदर्शी बना सकता है तो वहीं दूसरा सवा सौ करोड़ भारतीयों के निशाने पर ला सकता है। लेकिन अजीत अगरकर ने यह जिम्मेदारी बखूबी संभाली।
जुलाई 2023 में जब अजीत अगरकर (Ajit Agarkar) ने भारतीय टीम के मुख्य चयनकर्ता (Chief Selector) की जिम्मेदारी संभाली। तब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी, वरिष्ठ खिलाड़ियों का सम्मान बनाए रखते हुए टीम इंडिया के भविष्य की नींव तैयार करना। उन्होंने यह दो जिम्मेदारी बखूबी निभाई। अगरकर ने अपने कार्यकाल में कई ऐसे फैसले लिए, जिन पर खूब बहस हुई। लेकिन उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनके लिए गए फैसले ने वो रिजल्ट दिया है, जिस पर भारतीय क्रिकेट फैंस को गर्व होना चाहिए। आइए अगरकर के लिए गए मुश्किल फैसलों पर एक नजर डालते हैं।
हार्दिक पांड्या को T20 कप्तानी से हटाना
टी20 विश्व कप 2024 के बाद लगभग सभी को उम्मीद थी कि रोहित शर्मा की जगह हार्दिक पांड्या भारत के नए टी20 कप्तान बनेंगे। वह टी20 वर्ल्ड कप के दौरान उप-कप्तान भी थे और पहले भी इस फॉर्मेट में कप्तानी कर चुके थे। जुलाई 2024 में अजीत अगरकर ने एक बोल्ड फैसला लेते हुए सूर्यकुमार यादव को टीम का फुल टाइम कप्तान बना दिया। चयन समिति का मानना था कि कप्तान ऐसा होना चाहिए जो लगातार उपलब्ध रहे, जबकि हार्दिक की फिटनेस और वर्कलोड चिंता का विषय थे। यह फैसला काफी विवादित रहा, लेकिन अगरकर अपने रुख पर कायम रहे।

फोटो- BCCI
टीम बैलेंस को दी प्राथमिकता
टी20 विश्व कप 2024 से पहले हार्दिक पांड्या खराब फॉर्म से गुजर रहे थे। कई क्रिकेट विशेषज्ञ उनकी जगह किसी और खिलाड़ी को मौका देने की मांग कर रहे थे। वो, अगरकर ही थे जिन्होंने हार्दिक को बैक किया और साफ कहा कि हार्दिक जैसा ऑलराउंडर भारतीय क्रिकेट में दुर्लभ है और टीम संतुलन के लिए उनका होना जरूरी है। आलोचनाओं के बावजूद उन्होंने हार्दिक का समर्थन किया और बाद में यही खिलाड़ी भारत की विश्व कप जीत में अहम साबित हुआ।
युवा नेतृत्व पर भरोसा
अजीत अगरकर के कार्यकाल की सबसे बड़ी पहचान रही है नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को लीडर के तौर पर आगे बढ़ाना। चाहे टी20 में सूर्यकुमार यादव को कप्तानी देना हो या फिर चाहे चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के बाद रोहित से वनडे कप्तानी छीनकर गिल को कप्तान बनाना रहा हो। रोहित से वनडे की कप्तानी छीनने के फैसले की भी खूब आलोचना हुई थी। लेकिन, यहां भी अगरकर अपने फैसले पर अडिग रहे। इसके बाद टेस्ट में भी शुभमन गिल को कप्तान नियुक्त किया। अगरकर ने युवा नेतृत्व पर भरोसा जताया।
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लोकप्रियता नहीं, फॉर्म को महत्व
अजीत अगरकर ने कई बार संकेत दिया कि चयन केवल नाम या प्रतिष्ठा के आधार पर नहीं होगा। उन्होंने खिलाड़ियों के वर्तमान प्रदर्शन और टीम की जरूरतों को प्राथमिकता दी। यही वजह रही कि जब आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टी20 टीम का चयन किया तो सूर्या को न सिर्फ कप्तानी से हटाया बल्कि टीम से भी बाहर कर दिया। जबकि सूर्या ने कप्तान के रूप में कुछ भी खराब नहीं किया था। सूर्या ने कप्तान के रूप में 52 मैच खेले और 42 मैच जीते। साथ ही भारत को तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप का चैंपियन बनाया। हालांकि, वह पिछले दो साल से वह फॉर्म में नहीं थे। अगरकर ने साफ कर दिया कि लोकप्रियता नहीं टीम के भविष्य के लिए फॉर्म जरूरी है।

फोटो- BCCI
ट्रांजिशन पीरियड को संभाला
भारतीय क्रिकेट लंबे समय तक दिग्गज खिलाड़ियों के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। लेकिन, हर टीम को एक दिन बदलाव के दौर से गुजरना पड़ता है। टीम को भी समय-समय पर बदलाव के दौर से गुजरना पड़ा। हालांकि, अगरकर ने इस कठिन घड़ी को अपनी सूझबूझ से संभाला। आर अश्विन (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास), रोहित शर्मा और विराट कोहली (दोनों के टी20I और टेस्ट से संन्यास) के संन्यास से वह घबराए नहीं। बल्कि उन्होंने नए खिलाड़ियों को इसके लिए तैयार किया और भविष्य की टीम का खाका तैयार कर दिया।
